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सर्दियों में शिशुओं में ब्रोंकियोलाइटिस: लक्षण और इलाज

सर्दियों के मौसम में शिशुओं में सांस से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ जाती हैं। इन्हीं में से एक गंभीर लेकिन आम बीमारी है ब्रोंकियोलाइटिस। यह बीमारी खासकर 6 महीने से 2 साल तक के शिशुओं को ज्यादा प्रभावित करती है। समय पर पहचान और सही इलाज न मिलने पर यह सांस की गंभीर तकलीफ में बदल सकती है। नोएडा में बाल रोग पल्मोनोलॉजिस्ट उपलब्ध है। नोएडा में शिशुओं के श्वसन रोगों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और पीडियाट्रिक अस्पताल उपलब्ध हैं। इसलिए लक्षण दिखते ही इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।

 

शिशु की जांच या इलाज के लिए संपर्क करें: +91 9667064100

 

ब्रोंकियोलाइटिस क्या है? (What is bronchiolitis)

ब्रोंकियोलाइटिस एक वायरल संक्रमण हैं। जिसमें शिशुओं के फेफड़ों की छोटी वायुनलिकाएं सूजती हैं। उनमें बलगम भर जाता है। इससे शिशु को सांस लेने में कठिनाई, घरघराहट और खांसी होती है। यह बीमारी आमतौर पर सर्दियों में अधिक देखी जाती है और नवजात व छोटे शिशु इसके प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर इलाज कराना चाहिए।

 

सर्दियों में शिशुओं को ब्रोंकियोलाइटिस क्यों होता है (Why do babies get bronchiolitis in the winter)

 

  • ठंडी हवा और कम नमी

  • बंद कमरों में रहना

  • वायरल संक्रमण का तेजी से फैलना

  • शिशु की कमजोर इम्यूनिटी

  • बड़े बच्चों या वयस्कों से वायरस का संपर्क


शिशुओं में ब्रोंकियोलाइटिस के शुरुआती लक्षण (Early symptoms of bronchiolitis in infants)


शुरुआत में यह सामान्य सर्दी जैसा लगता है, लेकिन 2–3 दिन में लक्षण बढ़ सकते हैं

 

  • हल्की खांसी

  • नाक बहना या नाक बंद होना

  • छींक आना

  • दूध पीने में कमी

  • हल्का बुखार

  • शिशु का चिड़चिड़ा होना


शिशुओं में ब्रोंकियोलाइटिस के गंभीर लक्षण (Severe symptoms of bronchiolitis in infants)

 

  • तेज या कठिन सांस लेना

  • सांस लेते समय सीने का धंसना

  • घरघराहट (Wheezing)

  • होंठ या नाखून नीले पड़ना

  • बहुत ज्यादा सुस्ती

  • पल्स ऑक्सीमीटर में ऑक्सीजन 94% से कम

 

बच्चे में घरघराहट और सांस की तकलीफ के कारण (Causes of wheezing and difficulty breathing in children)

 

  • वायुनलिकाओं में सूजन

  • गाढ़ा बलगम

  • फेफड़ों में हवा का सही प्रवाह न होना

  • RSV या अन्य वायरस संक्रमण

  • पहले से मौजूद श्वसन समस्या


शिशुओं में ब्रोंकियोलाइटिस का इलाज (Treatment of bronchiolitis in infants)

ब्रोंकियोलाइटिस शिशुओं में होने वाला एक सामान्य लेकिन कभी-कभी गंभीर श्वसन संक्रमण है। यह बीमारी खासतौर पर 2 साल से कम उम्र के बच्चों में देखी जाती है और सर्दियों में इसके मामले अधिक बढ़ जाते हैं। सही समय पर इलाज और देखभाल से अधिकांश शिशु पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।


हल्के मामलों में घरेलू देखभालः

हल्के ब्रोंकियोलाइटिस में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन सतत घरेलू देखभाल बहुत जरूरी होती है।


पर्याप्त आराम

शिशु का शरीर संक्रमण से लड़ रहा होता है, इसलिए उसे भरपूर आराम देना आवश्यक है। बच्चे को ज्यादा रोने या थकाने वाली गतिविधियों से बचाएं। पर्याप्त नींद श्वसन तंत्र को रिकवर करने में मदद करती है। शिशु को आरामदायक और गर्म वातावरण में रखें।


मां का दूध या गुनगुना तरलः

मां का दूध शिशु की इम्यूनिटी बढ़ाने में सबसे प्रभावी होता है। बार-बार थोड़ी मात्रा में दूध पिलाएं। मां के दूध से डिहाइड्रेशन नहीं होता। बड़े शिशुओं को गुनगुना पानी या ओआरएस (ORS) डॉक्टर की सलाह से दिया जा सकता है बहुत ठंडा दूध या तरल न दें, इससे खांसी और सांस की दिक्कत बढ़ सकती है।


नाक की सफाईः

ब्रोंकियोलाइटिस में नाक बंद होने से शिशु को सांस लेने और दूध पीने में परेशानी होती है। डॉक्टर की सलाह से सलाइन ड्रॉप्स डालें। सॉफ्ट बल्ब सिरिंज से धीरे-धीरे नाक साफ करें। दूध पिलाने से पहले नाक साफ करना ज्यादा लाभकारी होता है।


कमरे में नमी बनाए रखनाः

सूखी हवा शिशु की सांस की नलियों को और संकरा कर सकती है। कमरे में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। हल्की भाप कमरे में रखी जा सकती है। शिशु को सीधे भाप न दें, जलने का खतरा रहता है।

 

मेडिकल इलाजः

अगर शिशु में सांस तेज चल रही हो, दूध पीने में दिक्कत हो या ऑक्सीजन लेवल कम हो, तो मेडिकल ट्रीटमेंट जरूरी हो जाता है।


पल्स ऑक्सीमेट्री से ऑक्सीजन मॉनिटरिंगः

पल्स ऑक्सीमीटर एक सरल और सुरक्षित उपकरण है, जिसकी मदद से शिशु के खून में ऑक्सीजन की मात्रा मापी जाती है। सामान्य स्थिति में शिशु का ऑक्सीजन स्तर 94 प्रतिशत या उससे अधिक होना चाहिए। यदि यह स्तर धीरे-धीरे कम होने लगे, तो इसे गंभीर संकेत माना जाता है और ऐसे में तुरंत चिकित्सकीय इलाज की आवश्यकता होती है। लगातार पल्स ऑक्सीमीटर से मॉनिटरिंग करने पर शिशु की स्थिति बिगड़ने से पहले ही समस्या की पहचान हो जाती है, जिससे समय रहते सही उपचार शुरू किया जा सकता है।

 

जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन सपोर्टः

अगर शिशु को सांस लेने में कठिनाई हो या उसका ऑक्सीजन लेवल कम पाया जाए, तो डॉक्टर की निगरानी में नेजल कैनुला या ऑक्सीजन मास्क के माध्यम से ऑक्सीजन दी जाती है। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ बाल चिकित्सालय उपलब्ध है। इससे फेफड़ों तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचती है, जिससे शरीर को जरूरी ऑक्सीजन मिलने लगती है और शिशु की सांस की गति धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है। समय पर दिया गया ऑक्सीजन सपोर्ट शिशु की हालत को बिगड़ने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

नेब्युलाइजेशन-

नेब्युलाइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें दवा को भाप के रूप में बदलकर सीधे फेफड़ों तक पहुंचाया जाता है। इससे सांस की नलियों में आई सूजन कम होती है और शिशु को होने वाली घरघराहट (व्हीज़िंग) में राहत मिलती है। हालांकि, नेब्युलाइजेशन हर शिशु के लिए जरूरी नहीं होता। डॉक्टर बच्चे के लक्षणों और स्थिति को देखकर ही तय करते हैं कि नेब्युलाइजेशन की आवश्यकता है या नहीं और उसमें कौन-सी दवा दी जानी चाहिए।


आईवी फ्लुइडः

कई बार बीमारी के दौरान शिशु ठीक से दूध नहीं पी पाता, जिससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की निगरानी में इंट्रावेनस (IV) फ्लुइड दिया जाता है, जिससे शरीर में पानी और आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहता है। इससे शिशु को कमजोरी से बचाया जा सकता है और उसकी रिकवरी प्रक्रिया को बेहतर तरीके से सपोर्ट मिलता है।

 

कब तुरंत अस्पताल ले जाएं?

 

  • सांस बहुत तेज या कठिन हो

  • होंठ या नाखून नीले पड़ने लगें

  • दूध बिल्कुल न पी रहा हो

  • बार-बार उल्टी हो रही हो

  • बच्चा बहुत सुस्त या बेहोश-सा लगे


शिशु को अस्पताल कब ले जाना चाहिए (When should I take my baby to the hospital)

 

  • सांस बहुत तेज चल रही हो

  • दूध पीना बंद कर दे

  • ऑक्सीजन स्तर कम हो

  • बार-बार उल्टी हो

  • नीले होंठ या बेहोशी

 

ब्रोंकियोलाइटिस संक्रामक है या नहीं (Is bronchiolitis contagious or not)

हां। यह बीमारी बहुत संक्रामक होती है और खांसी, छींक या संक्रमित हाथों से फैलती है। नोएडा में बाल पल्मोनोलॉजिस्ट उपलब्ध है। एक शिशु से दूसरे शिशु में तेजी से फैलती है।

 

शिशुओं में ब्रोंकियोलाइटिस से बचाव के उपाय (Measures to prevent bronchiolitis in infants)

 

  • हाथ धोने की आदत

  • बीमार व्यक्ति से दूरी

  • धूम्रपान और धुएं से बचाव

  • शिशु को भीड़भाड़ वाली जगह न ले जाएं

  • समय पर टीकाकरण

  • घर को हवादार रखें


अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: +91 9667064100


निष्कर्ष (Conclusion)

सर्दियों में शिशुओं में ब्रोंकियोलाइटिस एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है। समय पर पहचान, सही देखभाल और डॉक्टर की सलाह से शिशु पूरी तरह स्वस्थ होता है। सांस की परेशानी को कभी नजरअंदाज न करें नोएडा में शिशुओं के फेफड़ों के विशेषज्ञ से संपर्क कर समय रहते इलाज कराएं। इलाज में देरी से नुकसान होता है।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


प्रश्न 1: क्या ब्रोंकियोलाइटिस नवजात में हो सकता है?
उत्तर: हां, खासकर 6 महीने से कम उम्र के शिशुओं में हो सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर इलाज कराएं।


प्रश्न 2: क्या ब्रोंकियोलाइटिस जानलेवा है?
उत्तर: समय पर इलाज न हो तो गंभीर होता है। लेकिन सही इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाता है। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।


प्रश्न 3: क्या यह अस्थमा बन सकता है?
उत्तर: कुछ बच्चों में आगे चलकर सांस की समस्या हो सकती है। इसलिए फॉलो-अप जरूरी है। डॉक्टर की सलाह पर इलाज कराते रहें।


प्रश्न 4: क्या एंटीबायोटिक जरूरी है?
उत्तर: नहीं, क्योंकि यह वायरल संक्रमण है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज कराना चाहिए।


प्रश्न 5: ब्रोंकियोलाइटिस कितने दिन में ठीक होता है?
उत्तर: आमतौर पर 7–14 दिनों में ठीक होता है। मगर अगर समस्या गंभीर हो तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।