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बवासीर (Piles) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। जिसमें मलद्वार की नसें सूजती हैं। यह कब्ज, मसालेदार भोजन, असंतुलित आहार, मोटापा और लंबे समय तक बैठने की आदत से बढ़ती है। खानपान का बवासीर की स्थिति पर असर पड़ता है। हालांकि सही डाइट अपनाकर कब्ज से राहत, मल को नरम और बवासीर की सूजन को कम किया जा सकता है। नोएडा में बवासीर की सर्जरी (Piles surgery in Noida) उपलब्ध है। वहीं गंभीर मामलों में लेप्रोस्कोपी जैसे आधुनिक इलाज की जरूरत होती है।
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सही आहार से कब्ज, गैस, पेट फूलना और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाव होता है। यह दिल, हड्डियों और इम्यूनिटी के लिए भी फायदेमंद है।
गेहूं, जौ, ओट्स, ब्राउन राइस, मक्का आदि में भरपूर फाइबर होता है। यह धीरे-धीरे पचते हैं। जिससे लंबे समय तक पेट भरता है। यह वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं। कोलेस्ट्रॉल कम (Lower cholesterol) करने और दिल को स्वस्थ रखने में भी सहायक होते हैं।
अरहर, मूंग, मसूर, चना, राजमा, लोबिया आदि में घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार का फाइबर होता है। पेट साफ रखने और ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित करने में मददगार। प्रोटीन भी भरपूर होने से मांसपेशियों की मजबूती के लिए भी लाभकारी है।
पालक, मेथी, बथुआ, सरसों का साग, चौलाई जैसी सब्जियों में फाइबर और आयरन प्रचुर मात्रा में। खून की कमी से बचाव करती हैं। पेट के पाचन तंत्र को मजबूत करती हैं। कब्ज की समस्या (Constipation problem) कम करती हैं।
सेब, अमरूद, पपीता, अंजीर, नाशपाती और मौसमी फल फाइबर से भरपूर। केले मल त्याग को आसान बनाते हैं। पाचन सुधारते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं।
दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी पिएं। नारियल पानी, छाछ, सूप और हर्बल चाय शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। पर्याप्त तरल लेने से मल सॉफ्ट रहता है। कब्ज की समस्या (Constipation problem) दूर होती है।
किशमिश, अंजीर, बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स फाइबर व ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर। पाचन को बेहतर बनाते हैं और आंतों की सफाई में मदद करते हैं। हृदय रोग और मोटापे के खतरे को कम करते हैं।
बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले पेट की जलन, एसिडिटी और सूजन को बढ़ा देते है। मसालेदार भोजन आंतों की परत को उत्तेजित करता है। जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित होती है। अधिक तेल से बने पकवान पचने में समय लेते हैं। गैस व कब्ज की समस्या बढ़ाते हैं।
पकौड़ी, समोसा, कचौड़ी, पराठे, पूरी जैसी चीजें भारी और कठिन पचने वाली होती हैं। ज्यादा तलने से इनका पोषण कम होता है। सिर्फ वसा की मात्रा बढ़ती है। यह पेट में भारीपन, अपच और कब्ज (constipation) को बढ़ाती हैं।
पिज्जा, बर्गर, पैकेट वाले स्नैक्स, नूडल्स और रेड मीट (जैसे मटन, बीफ) में फाइबर बहुत कम और वसा ज्यादा होता है। प्रोसेस्ड फूड में प्रिजर्वेटिव्स और ट्रांस फैट होते हैं, जो पाचन को कमजोर करते हैं। लगातार सेवन से मोटापा, डायबिटीज (Diabetes) और कब्ज का खतरा बढ़ता है।
ज्यादा चाय, कॉफी या शराब लेने से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है डिहाइड्रेशन की वजह से मल सूख जाता है और कब्ज की समस्या बढ़ती है। शराब और कैफीन आंतों की मांसपेशियों की गति को धीमा कर देते हैं। जिससे पाचन गड़बड़ होता है।
केक, पेस्ट्री, डोनट्स, चॉकलेट, बिस्किट जैसी चीजों में रिफाइंड शुगर और मैदा होता है। यह आंतों की गति धीमी करते हैं। जिससे कब्ज की समस्या बढ़ती है। मीठे स्नैक्स वजन बढ़ाने और ब्लड शुगर लेवल असंतुलित करने में जिम्मेदार हैं।
सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुना पानी पीना पाचन के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें नींबू मिलाने से टॉक्सिन बाहर निकलते हैं। इम्यूनिटी मजबूत होती है। शहद मिलाने से एनर्जी लेवल बढ़ता है और वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
रातभर पानी में भिगोए हुए अंजीर या किशमिश सुबह खाने से कब्ज दूर होती है और पेट साफ रहता है। इनमें फाइबर, आयरन और मिनरल्स भरपूर होते हैं, जो खून की कमी और थकान से बचाते हैं। यह आंतों की सफाई करके पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं।
ओट्स, दलिया या पोहा जैसे हल्के नाश्ते में जब ताजे फल मिलाए जाते हैं, तो यह फाइबर और विटामिन्स से भरपूर कॉम्बिनेशन बन जाता है। यह दिनभर के लिए शरीर को एनर्जी और तृप्ति देता है। फाइबर युक्त नाश्ता खाने से ब्लड शुगर (blood sugar) और कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित रहता है।
सुबह हल्की सैर करने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। शरीर सक्रिय रहता है। सैर के बाद ताजे फलों का जूस या छाछ पीने से शरीर को तुरंत हाइड्रेशन और विटामिन मिलते हैं। छाछ पाचन को दुरुस्त करती है। गैस या भारीपन से राहत देती है।
फल:
अमरूद में घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार का फाइबर होता है, जो मल को मुलायम बनाकर आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है। पपीता में पपेन नामक एंज़ाइम से भरपूर जो पाचन सुधारता है। कब्ज दूर करता है। सेब में पेक्टिन नामक फाइबर होता है जो आंतों की गति को तेज करता है। नाशपाती में भरपूर पानी और फाइबर होता है जिससे मल सॉफ्ट रहता है और पेट साफ होता है। अनार में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी होते हैं। जो सूजन कम करते हैं। खून की कमी रोकते हैं। अंजीर में फाइबर और मिनरल्स से भरपूर, कब्ज से राहत देता है। पाइल्स में होने वाली जलन व दर्द को कम करता है।
सब्जियां:
पालक में आयरन और फाइबर से भरपूर, खून की कमी को पूरा करता है और पाचन में मदद करता है। तोरई हल्की और पचने में आसान सब्जी, पेट साफ करने में सहायक है। लौकी पानी और फाइबर से भरपूर, पाचन को दुरुस्त करती है। आंतों पर दबाव कम करती है। परवल कब्ज और एसिडिटी में राहत देने वाली हल्की सब्जी है। गाजर में बीटा-कैरोटीन और फाइबर होता है।जो पाचन सुधारने और सूजन कम करने में मदद करता है। चुकंदर खून बढ़ाने और मल को मुलायम करने में बेहद फायदेमंद। आंतों की सफाई करता है।
दूध: अगर दूध से कब्ज होता है तो परहेज करें। दही, छाछ या लैक्टोज-फ्री दूध बेहतर विकल्प है।
केला: पका हुआ केला फाइबर से भरपूर है, यह कब्ज कम करता है। कच्चा केला कब्ज बढ़ाता है।
मसाले (लाल मिर्च, गरम मसाले) मलद्वार की नसों को उत्तेजित करते हैं। इससे जलन, खुजली और सूजन बढ़ती है। इसलिए मसालेदार खाना सीमित मात्रा में या बिल्कुल न लें।
बार-बार तेज ब्लीडिंग होना:
जब मल त्याग के समय लगातार और ज्यादा मात्रा में खून आता है, जिससे कमजोरी और एनीमिया (anemia) (खून की कमी) होने लगे पर।
थ्रोम्बोस्ड पाइल्स:
जब गुदा के पास पाइल्स (Piles) में खून का थक्का जम जाए और तेज दर्द, सूजन या जलन हो।
बहुत बड़े आकार का बवासीर:
जब पाइल्स इतना बढ़ जाए कि बैठना, चलना या मल त्याग करना बहुत मुश्किल हो जाए।
दवाओं और घरेलू उपाय से आराम न मिलना:
जब लगातार दवा, मलहम और फाइबर युक्त डाइट लेने के बाद भी आराम न मिले।
आधुनिक सर्जरी के फायदे:
छोटे-छोटे चीरे से कैमरा और उपकरण डाले जाते हैं। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में ब्लीडिंग कम होती है। टांके भी कम लगाने पड़ते हैं। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ बवासीर अस्पताल (Best piles hospital in Noida) उपलब्ध है। जहां रिकवरी तेज होती है, मरीज कुछ ही दिनों में सामान्य काम कर सकता है। संक्रमण का खतरा कम रहता है क्योंकि कट बड़ा नहीं होता। अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम होती है।
गुनगुना पानी नहाएं यानी दिन में 2–3 बार गुनगुने पानी में बैठने से दर्द और सूजन कम होती है।
एंटीबायोटिक दवाएं नियमित रूप से लें ताकि संक्रमण न हो और घाव जल्दी भर सके।
हल्का, फाइबर युक्त भोजन और पर्याप्त पानी पिए। कब्ज से बचने के लिए ज्यादा फाइबर वाले फल, सब्जियां और दालें खाएं।
मल त्याग के दौरान जोर न लगाए। मल को प्राकृतिक रूप से निकलने दें, जोर लगाने से घाव दोबारा खुल सकता है।
अत्यधिक मसालेदार और तैलीय भोजन से परहेज करें। ताकि पेट पर दबाव न पड़े और पाचन हल्का बना रहे।
हल्की-फुल्की गतिविधियां करें। आराम जरूरी है, लेकिन ज्यादा देर लेटे रहने की बजाय हल्की सैर करें ताकि ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहे।
बवासीर में खानपान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही डाइट कब्ज को रोकती है और बवासीर की सूजन और दर्द को कम करती है। अगर आहार और दवा से आराम न मिलेतो लेप्रोस्कोपिक इलाज (Laparoscopic Treatment) सुरक्षित और असरदार विकल्प है। समय पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। तैलीय, मसालेदार भोजन, शराब और कब्ज बढ़ाने वाले भोजन से परहेज करें। यह सेहत खराब करते हैं। इसलिए इनसे दूरी बनाए।
प्रश्न 1: बवासीर में कौन सा फल सबसे अच्छा है?
उत्तर: पपीता, अमरूद और अंजीर सबसे अच्छे हैं, क्योंकि यह मल को मुलायम करते हैं। इसलिए इसका सेवन करना चाहिए।
प्रश्न 2: क्या बवासीर में चाय या कॉफी पी सकते हैं?
उत्तर: ज्यादा कैफीन कब्ज बढ़ाता है, इसलिए सीमित मात्रा में ही लें। यह सेहत के लिए नुकसानदेह है।
प्रश्न 3: क्या सिर्फ डाइट से बवासीर ठीक हो सकता है?
उत्तर: शुरुआती और हल्के मामलों में हां। लेकिन गंभीर मामलों में सर्जरी की जरूरत पड़ती है। लेकिन डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
प्रश्न 4: क्या लेप्रोस्कोपी बवासीर में सुरक्षित है?
उत्तर: हां यह आधुनिक और सुरक्षित तकनीक है। ब्लीडिंग कम होती है और रिकवरी जल्दी होती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर सर्जरी करानी चाहिए।
प्रश्न 5: सर्जरी के बाद किन चीजों से परहेज करना चाहिए?
उत्तर: तैलीय, मसालेदार भोजन, शराब और कब्ज बढ़ाने वाले भोजन से परहेज करें। यह सेहत खराब करते हैं।