Your Health, Our Priority

Request Call Back

Request an Appointment

CAPTCHA
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.
* By clicking on the above button you agree to receive updates on WhatsApp

गर्भावस्था में बाह्य बवासीर: सावधानियां और इलाज (लेप्रोस्कोपिक)

गर्भावस्था के दौरान बवासीर आम समस्या है। गर्भ के बढ़ते आकार, हार्मोनल बदलाव और कब्ज जैसी वजहों से मलद्वार की नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे बवासीर बढ़ता है। बाह्य बवासीर (external piles) मलद्वार के बाहरी हिस्से में त्वचा के नीचे सूजन या गांठ के रूप में होती है। इसमें दर्द, जलन, खुजली और कभी-कभी खून का थक्का (थ्रोम्बोसिस) बनने पर दर्द होता है। गर्भावस्था में बाह्य बवासीर आम है,लेकिन समय पर सावधानी से इसे नियंत्रित कर सकते हैं।


अगर आप इस बीमारी की जांच या इलाज के लिए भरोसेमंद चिकित्सा सुविधा की तलाश कर रहे हैं, तो नोएडा में सर्वश्रेष्ठ लेप्रोस्कोपिक हॉस्पिटल का चयन करना बेहद जरूरी है, जहां अनुभवी जनरल सर्जन और अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से मरीज को बेहतर देखभाल मिल सके।



अभी अपॉइंटमेंट शेड्यूल करें – कॉल करें: +91 9667064100.


TABLE OF CONTENT-

 

 

गर्भावस्था में बवासीर की समस्या Piles problem during pregnancy

गर्भावस्था के दौरान बवासीर बेहद आम है। अनुमान है कि करीब 25 से 35 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं बवासीर से प्रभावित होती हैं। खासकर तीसरे ट्राइमेस्टर में पीरियड के दौरान। इसकी वजह बढ़ता हुआ गर्भाशय, हार्मोनल बदलाव और कब्ज है,जिससे मलद्वार के आसपास की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है बाह्य बवासीर मलद्वार के ठीक बाहर की त्वचा के नीचे उभरी हुई गांठें होती हैं। इनमें सूजन आने पर तेज दर्द, जलन और खुजली होती है,चलने, बैठने या मल त्याग के समय इन पर सीधा दबाव पड़ता है, जिससे असुविधा बढ़ती है। इनमें खून का थक्का बन जाए, तो दर्द अचानक पीड़ा होती है। लंबे समय तक अनुपचारित रहने पर बाह्य बवासीर में थ्रोम्बोसिस होता है। लगातार खून निकलने से खून की कमी बढ़ती है। यह मां और बच्चे के लिए जोखिम भरा है,प्रसव के दौरान भी ये बवासीर बिगड़ती हैं,जिससे प्रसव के बाद रिकवरी मुश्किल होती है।

 

गर्भावस्था में बाह्य बवासीर के कारण (Causes of external hemorrhoids in pregnancy)


बढ़ा हुआ पेट का दबावः

जैसे-जैसे गर्भ में शिशु बढ़ता है। पेट के अंदरूनी अंगों और मलद्वार की नसों पर दबाव बढ़ता है। यह दबाव नसों को फैलाता है,जिससे बाह्य बवासीर की गांठें बनती हैं। यह पहले से मौजूद समस्या बढ़ती है।


हार्मोनल बदलावः

गर्भावस्था में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ता है। यह शरीर की मांसपेशियों को ढीला करता है, इससे आंतों की गति धीमी होने से कब्ज की समस्या होती है, नसों की दीवारें भी कमजोर होती हैं। जिससे बवासीर की संभावना बढ़ती है।


कब्ज:

गर्भवती महिलाओं में कब्ज (Constipation) आम है। जो मल त्याग के समय ज्यादा जोर लगवाता है। जोर लगाने से मलद्वार की बाहरी नसों में खिंचाव होता है,जिससे बाह्य बवासीर दर्दनाक होती है।


रक्त संचार में बदलावः

गर्भावस्था में शरीर का कुल रक्त प्रवाह बढ़ता है। गर्भाशय के बढ़ने से पेल्विक क्षेत्र की नसों  और निचले शरीर की नसों पर दबाव पड़ता है, जिससे वहां की नसें फैलकर बवासीर में बदलती हैं।

 

गर्भावस्था में बाह्य बवासीर के मुख्य लक्षण (Main symptoms of external hemorrhoids in pregnancy)

 

  • मलद्वार के आसपास अंगूर के आकार की नरम या कठोर गांठें महसूस होती हैं। जिससे बैठने या चलने पर दर्द होता हैं।

  • मल त्याग के समय या लंबे समय तक बैठने पर दर्द और जलन महसूस होती है। यह कभी-कभी असहनीय होती है।

  • गांठों और सूजन की वजह से लगातार खुजली और भारीपन की शिकायत होती है जिस कारण रोजमर्रा के कामों में परेशानी होती है।

  • कभी-कभी बवासीर में खून का थक्का बनने या गांठ फटने पर हल्का या तेज रक्तस्राव होता है।


घरेलू और जीवनशैली से जुड़ी सावधानियां (Household and lifestyle precautions)

 

  • रोजाना खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, सलाद और साबुत अनाज का सेवन करें। फाइबर से कब्ज की समस्या कम होती है,मल नरम रहता है, जिससे बाह्य बवासीर पर दबाव नहीं पड़ता है।

  • दिनभर में कम से कम 8–10 गिलास पानी पिएं। पानी फाइबर के साथ मिलकर मल को सॉफ्ट रखता है, मल त्याग आसान बनाता है।

  • लंबे समय तक कुर्सी या टॉयलेट सीट पर बैठने से बचें। हर 30–40 मिनट में थोड़ा टहलें व करवट बदलें,जिससे नसों पर दबाव कम हो।

  • गर्भावस्था के दौरान हल्की सैर या सुरक्षित योगासन करें। इससे रक्त संचार सुधरता है, बवासीर की परेशानी कम होती है।

  • मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाने से नसों में खिंचाव बढ़ता है, जिससे बवासीर बिगड़ती है। आराम से और बिना हड़बड़ी के मल त्याग करें। अगर बार-बार कब्ज हो तो डॉक्टर से सलाह लें।


मेडिकल देखभाल कब जरूरी है ? (When is medical care necessary)

 

  • अगर बवासीर में लगातार तेज दर्द है। बार-बार खून आ रहा है, तो इसे हल्के में न लें। तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें,जिससे जांच के बाद सही इलाज तय हो सके। खून की कमी (एनीमिया) जैसी जटिलताएं नहीं हों।

  • अगर गांठ अचानक बड़ी हो जाए। उसमें अचानक बहुत दर्द होने लगे तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें। जल्दी इलाज से संक्रमण और दूसरी जटिलता को रोक सकते हैं।

  • अगर दर्द या सूजन इतनी बढ़ जाए कि बैठना, चलना या सोना भी मुश्किल होने लगे, तो स्थिति गंभीर होती है। ऐसे में डॉक्टर से समय पर इलाज कराना जरूरी है,जिससे मां और बच्चे दोनों सुरक्षित रहें।


लेप्रोस्कोपिक इलाज की गाइडलाइन (Treatment of Laparoscopic  guidelines)

लेप्रोस्कोपिक सिर्फ बहुत गंभीर और जटिल मामलों में होती है। थ्रोम्बोस्ड बाह्य बवासीर, बहुत बड़ा या फैलता हुआ बवासीर होता, बार-बार तेज ब्लीडिंग के मामले में होती है। सामान्य या हल्के मामलों में आमतौर पर दवा दी जाती है। जीवनशैली सुधार और मिनिमली इनवेसिव पद्धतियों जैसे बैंडिंग, स्क्लेरोथेरपी से इलाज होता है। जरूरत पड़ने पर दूसरे ट्राइमेस्टर 13–28 हफ्ते को सबसे सुरक्षित समय माना जाता है। इस दौरान भ्रूण के अंग विकसित हो चुके होते हैं। प्री-टर्म लेबर का जोखिम भी कम होता है। पहले या तीसरे ट्राइमेस्टर में सर्जरी, अगर बहुत ज़रूरी हो तभी की जाती है, विशेषज्ञ की पूरी टीम की निगरानी में।


कब विचार किया जाता है?

थ्रोम्बोस्ड पाइल्स यानी खून के थक्के वाली, अत्यधिक दर्द देने वाली बवासीर होने पर की जाती है। बार-बार या बहुत अधिक ब्लीडिंग, जिससे खून की कमी या संक्रमण का खतरा बढ़ने पर की जाती है। बहुत बड़ा या तेजी से बढ़ रहा बाह्य बवासीर, जिससे चलना-फिरना और प्रसव भी कठिन होता है तो सर्जरी पर विचार करना चाहिए।


प्रक्रिया का सारांश (Summary of the Process)

इस पद्धति में बड़े कट की बजाय छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं। जिनसे सर्जिकल उपकरण अंदर पहुंचते हैं। इससे घाव छोटा रहता है,दर्द कम होता है। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में ब्लीडिंग कम होती है। घाव छोटा होने से इन्फेक्शन का घटता है। मरीज जल्दी सामान्य दिनचर्या में लौटता है। कोलोरेक्टल सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट की देखरेख में की जाती है। आमतौर पर सेकंड ट्राइमेस्टर पर और सही इंडिकेशन पर की जाए तो मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए यह अपेक्षाकृत सुरक्षित है।

 

सर्जरी के बाद की देखभालः

सर्जरी के बाद घाव को साफ व सूखा रखना जरूरी है। डॉक्टर के बताए गए एंटीबायोटिक, एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल समय पर करें। जिससे संक्रमण का खतरा कम हो सके।


मल को सॉफ्ट रखने के लिए दवाः

डॉक्टर आमतौर पर हल्के स्टूल सॉफ्टनर या फाइबर सप्लीमेंट देते हैं। जिससे मल त्याग के समय ज्यादा जोर न लगे। फाइबर युक्त आहार और पर्याप्त पानी पीना जारी रखें।


आरामदायक सिट्ज़ बाथः

गुनगुने पानी में दिन में 2–3 बार कुछ मिनट बैठने से दर्द व सूजन कम होती है। घाव जल्दी भरता है। आराम मिलता है। यह तरीका आसान, सुरक्षित व असरदार है।

 

बवासीर होने पर कब डॉक्टर से मिलें ? (When Should you see a Doctor if you have Piles?)

बवासीर को नजरअंदाज करना भविष्य में और गंभीर जटिलताएं पैदा करता है। समय रहते इसकी पहचान और सही इलाज बेहद जरूरी है। इस रोग की पहचान और इलाज में जनरल सर्जन या कोलोरेक्टल सर्जन की अहम भूमिका होती है। वह जांच, एंडोस्कोपी, अल्ट्रासाउंड या अन्य टेस्ट के ज़रिए रोग की स्थिति को समझते हैं और उसके हिसाब से दवा, लाइफस्टाइल सुधार या सर्जरी जैसी उपयुक्त चिकित्सा का निर्णय लेते हैं।


नोएडा में अच्छा सर्जन या कोलोरेक्टल स्पेशलिस्ट (best piles surgeon in noida) चुनना इस प्रक्रिया का पहला और सबसे जरूरी कदम है, ताकि सही समय पर इलाज शुरू हो सके और रोग की प्रगति को रोका जा सके।


अभी अपॉइंटमेंट शेड्यूल करें – कॉल करें: +91 9667064100.

 

निष्कर्ष (Conclusion)

गर्भावस्था में बाह्य बवासीर नियंत्रित की जाने वाली समस्या है। थोड़ी सी सावधानी, सही खानपान और लाइफस्टाइल बदलाव से इसे काबू में रखा जाता है। समय रहते डॉक्टर से सलाह। नियमित देखभाल और जरूरत पड़ने पर सही इलाज से दर्द कम होता है, इलाज जटिलता से भी बचाता है। गर्भावस्था में हर महिला की स्थिति अलग होती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह को मानें। किसी भी तरह के स्वयं इलाज से बचें।

नोएडा में बवासीर के इलाज (piles treatment) की कीमत रोग की अवस्था, जरूरी जांच (जैसे प्रोकोटोसकोपी, अल्ट्रासाउंड, या अन्य लैब टेस्ट) और चुनी गई उपचार पद्धति पर निर्भर करती है। आमतौर पर शुरुआती जांच और दवाओं की लागत कुछ हदार रुपये से शुरू होती है, जबकि लेजर, स्टेपल्ड या लेप्रोस्कोपिक सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ यह लागत अधिक हो सकती है। सटीक जानकारी के लिए किसी अनुभवी जनरल सर्जन, कोलोरेक्टल स्पेशलिस्ट या नोएडा के विश्वसनीय अस्पताल से संपर्क करें, ताकि आपकी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त और प्रभावी इलाज का अनुमान लिया जा सके।

 


गर्भावस्था में बाह्य बवासीर सावधानियां और इलाज को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर (Frequently asked questions and answers about external hemorrhoids precautions and treatment during pregnancy)


प्रश्नः 1 क्या गर्भावस्था में बवासीर होना सामान्य है?
उत्तर: हर चार में से लगभग 1–2 गर्भवती महिलाओं को बवासीर की समस्या होती है। खासकर आखिरी महीनों में। इसका मुख्य कारण हैं बढ़ा हुआ पेट का दबाव, हार्मोनल बदलाव और कब्ज होता है।

 

प्रश्नः 2 क्या बाह्य बवासीर गर्भवती महिला और बच्चे के लिए खतरनाक है?
उत्तर: यह जानलेवा नहीं होती। लेकिन बार–बार या ज्यादा ब्लीडिंग से खून की कमी होती है. दर्द और सूजन बढ़ने से प्रसव में दिक्कत होती है। इसलिए इसे हल्के में नहीं लें।

 

प्रश्नः 3 क्या गर्भावस्था में बवासीर का लेप्रोस्कोपिक इलाज हो सकता है?
उत्तर: सिर्फ बहुत गंभीर और जटिल मामलों में यानी थ्रोम्बोस्ड पाइल्स, बार–बार ज्यादा ब्लीडिंग या बहुत बड़ा बवासीर होने पर सर्जरी होती है।

 

प्रश्नः 4 सर्जरी के बाद क्या विशेष सावधानियां रखनी चाहिए?
उत्तर: संक्रमण से बचाव के लिए घाव को साफ रखना चाहिए। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और निर्देशों का पालन करना चाहिए।

 

प्रश्नः 5  क्या सिर्फ घरेलू नुस्खों से ठीक हो सकता है?
उत्तर: हल्के मामलों में लाइफस्टाइल सुधार और डॉक्टर की बताई कुछ दवाओं से काफी राहत मिलती है। तेज दर्द, ब्लीडिंग या तेजी से बढ़ती गांठ पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।