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लिवर शरीर का सबसे बड़ा आंतरिक अंग है। जो भोजन को ऊर्जा में बदलने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, हार्मोन संतुलन बनाए रखने और पाचन क्रिया को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन लिवर की बीमारी अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है। इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट नोएडा (Gastroenterologist in Noida) में उपलब्ध है। यदि समय रहते जांच और उपचार शुरू किया जाए तो गंभीर स्थितियों जैसे सिरोसिस या हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से बचाव संभव है।
जब लिवर ठीक से विषैले पदार्थ बाहर नहीं निकाल पाता, तो शरीर में टॉक्सिन जमा होते हैं। जिससे अत्यधिक थकान, सुस्ती और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है।
त्वचा या आंखों की सफेदी पीली दिखे तो यह बिलीरुबिन (Bilirubin) बढ़ने का संकेत होता है। यह लक्षण वायरल संक्रमण या पित्त रुकावट में दिखता है।
दाईं तरफ ऊपरी पेट में भारीपन, सूजन या हल्का दर्द लिवर में सूजन या फैटी लिवर का संकेत होता है।
अगर पेशाब का रंग गहरा भूरा या पीला हो और मल का रंग फीका दिखे, तो यह लिवर की कार्यक्षमता में कमी का संकेत होता है।
लिवर कमजोर होने पर पाचन क्रिया प्रभावित होती है। इससे भूख कम लगना और वजन घटना शुरू होता है।
पित्त लवण जमा होने से त्वचा में बिना कारण खुजली या लाल धब्बे दिखाई देते हैं।
अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के लगातार मतली या उल्टी हो रही है, तो लिवर की जांच जरूरी है।
लिवर शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है जो भोजन को पचाने, विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने, ऊर्जा को संग्रहित करने और कई आवश्यक प्रोटीन बनाने का काम करता है। अक्सर लिवर की बीमारी शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देती, इसलिए कई बार इसका पता देर से चलता है। सही समय पर जांच और लक्षणों की पहचान करके लिवर की बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षणों को ध्यान से देखते और पूछताछ करते हैं। लिवर की बीमारी में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
लगातार थकान और कमजोरी
भूख कम लगना
पेट के दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन
त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
पेट में सूजन या पानी भरना
उल्टी, जी मिचलाना
पेशाब का गहरा रंग और मल का हल्का रंग
त्वचा में खुजली
लिवर की स्थिति जानने के लिए खून की जांच बहुत महत्वपूर्ण होती है। इसमें मुख्य रूप से लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) किया जाता है। इससे पता चलता है कि लिवर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं। इस जांच में कई एंजाइम और प्रोटीन की मात्रा मापी जाती है, जैसे:
एएलटी (एलानिन एमिनोट्रांस्फरेज)
एएसटी (एस्पार्टेट एमिनोट्रांस्फरेज)
बिलीरुबिन
एल्ब्यूमिन
अल्ट्रासाउंड एक सामान्य और सुरक्षित जांच है। जिसमें ध्वनि तरंगों की मदद से लिवर की तस्वीर ली जाती है। इससे लिवर का आकार, सूजन, फैटी लिवर, गांठ (ट्यूमर) या अन्य असामान्यताओं का पता लगाया जाता है।
अगर अल्ट्रासाउंड में कोई गंभीर समस्या का संदेह होता है, तो डॉक्टर सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह दे सकते हैं। इन जांचों से लिवर की अंदरूनी संरचना की अधिक स्पष्ट और विस्तृत जानकारी मिलती है। इससे ट्यूमर, सिरोसिस या अन्य जटिल बीमारियों की पहचान आसान हो जाती है।
कुछ मामलों में लिवर की बीमारी की सही पुष्टि के लिए लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) होती है। इसमें लिवर के ऊतक (टिश्यू) का छोटा सा नमूना लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। इससे बीमारी का प्रकार और उसकी गंभीरता का पता चलता है।
जिन लोगों के परिवार में लिवर रोग का इतिहास हो, जो अधिक शराब का सेवन करते हों, लंबे समय तक दवाइयों का इस्तेमाल करते हों, या जिन्हें फैटी लिवर, मोटापा, डायबिटीज जैसी समस्याएं हों, उन्हें नियमित रूप से लिवर की जांच कराते रहना चाहिए।
अक्सर लिवर की बीमारी शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देती, इसलिए कई बार इसका पता देर से चलता है। सही समय पर जांच और लक्षणों की पहचान करके लिवर की बीमारी का पता लगाया जा सकता है। लिवर चेकअप हॉस्पिटल नोएडा (Liver Check-up Hospital in Noida) में उपलब्ध है। निम्न स्थितियों में तुरंत जांच कराएं:
लगातार थकान
त्वचा/आंखों का पीलापन
पेट दर्द या सूजन
गहरे रंग का पेशाब
अचानक वजन घटना
लंबे समय से शराब सेवन
यह सबसे सामान्य जांच है। जिसमें एसजीपीटी, एसजीओटी, बिलीरुबिन, एल्ब्यूमिन आदि की जांच होती है।
लिवर के आकार और सूजन का पता चलता है।
लिवर की कठोरता और स्कारिंग की जांच के लिए होता है।
हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी संक्रमण की जांच के लिए होता है।
गंभीर मामलों में विस्तृत जांच के लिए होती है।
विशेषकर दाईं तरफ ऊपरी पेट में दर्द या दबाव महसूस होना लिवर में सूजन, संक्रमण या फैटी बदलाव का संकेत हो सकता है।
संतुलित आहार लें
शराब से पूर्ण परहेज करें
रोज 30 मिनट व्यायाम करें
धूम्रपान और जंक फूड से बचें
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें
लिवर की बीमारी का समय पर पता चलना बहुत जरूरी है। अगर शुरुआती चरण में ही जांच और इलाज शुरू हो जाए, तो कई गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। इसलिए अगर ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें। तो डॉक्टर से परामर्श लेकर तुरंत जांच कराना चाहिए। लिवर की खराबी के शुरुआती संकेत अक्सर हल्के होते हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। थकान, पीलापन, पेट दर्द, उल्टी या गहरे रंग का पेशाब दिखे तो तुरंत जांच कराएं। समय पर पहचान से गंभीर स्थितियों जैसे सिरोसिस से बचाव संभव है।
उत्तरः हां, अत्यधिक जंक फूड खाने से लिवर में वसा जमा होती है। जिससे फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है।
उत्तरः कभी-कभी सीमित मात्रा में जंक फूड खाना आमतौर पर सुरक्षित होता है, लेकिन नियमित सेवन नुकसानदायक होता है।
उत्तरः हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और हेल्दी फैट लिवर के लिए अच्छे माने जाते हैं।
उत्तरः हां, नियमित व्यायाम और वजन कम करने से लिवर में जमा वसा कम होती है।
उत्तरः नहीं, कई बार शुरुआती स्टेज में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए समय-समय पर जांच जरूरी है।