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लिवर कैंसर (Liver Cancer) आज तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या है। खासकर उन लोगों में जिनके लिवर में पहले से कोई रोग जैसे फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या सिरोसिस मौजूद हो। शुरुआती जांच और समय पर इलाज से लिवर कैंसर (Liver cancer in hindi) को नियंत्रित किया जा सकता है। मरीज की जीवन प्रत्याशा में सुधार किया जा सकता है। नोएडा में ऑन्कोलॉजी हॉस्पिटल (Oncology Hospital in Noida) और अनुभवी कैंसर स्पेशलिस्ट डॉक्टर उपलब्ध हैं। जो नवीनतम उपचार तकनीकों से मरीजों को राहत दे रहे हैं।
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लिवर कैंसर तब होता है जब लिवर की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ती हैं। एक ट्यूमर बना देती हैं। यह दो प्रकार का होता है। प्राथमिक में कैंसर सीधे लिवर की कोशिकाओं में शुरू होता है। इसका सबसे आम रूप हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (एचसीसी) है। वहीं द्वितीयक शरीर के किसी अन्य हिस्से (जैसे फेफड़े, स्तन या कोलन) से कैंसर लिवर में फैलता है।
ऑन्कोलॉजी गाइडलाइन के अनुसार, लिवर कैंसर अक्सर लंबे समय से चल रहे लिवर रोगों से विकसित होता है।
लिवर की कोशिकाओं में लगातार सूजन और क्षति होती रहती है। जिससे कैंसर का जोखिम बढ़ता है।
यह लिवर में स्थायी स्कारिंग की स्थिति है। जो शराब, वायरल संक्रमण या फैटी लिवर के कारण होती है। सिरोसिस (Cirrhosis) वाले मरीजों में लिवर कैंसर की संभावना अधिक होती है।
मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल वाले मरीजों में हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा (एचसीसी) कैंसर का कारण बनती है।
लम्बे समय तक शराब पीने से लिवर कोशिकाओं को नुकसान होता है। जिससे कैंसर का खतरा बढ़ता है।
दूषित अनाज, मूंगफली या तेलों में पाया जाने वाला अफ्लाटॉक्सिन नामक टॉक्सिन लिवर कैंसर से जुड़ा हुआ है।
विल्सन डिजीज (Wilson's Disease) या हेमोक्रोमैटोसिस जैसी आनुवंशिक बीमारियां लिवर में आयरन या कॉपर के अत्यधिक जमाव से कैंसर को बढ़ावा देती हैं।
लिवर कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लिवर रोग जैसे लगते हैं। लेकिन कुछ संकेत गंभीर होते हैं।
लगातार थकान और कमजोरी
भूख में कमी और वजन घटना
त्वचा व आंखों का पीला होना (जॉन्डिस)
दाईं तरफ ऊपरी पेट में दर्द या सूजन
गहरे रंग का पेशाब और हल्का मल
बार-बार उल्टी या जी मिचलाना
पेट में गांठ या भारीपन का एहसास
त्वचा पर खुजली या जलन
ऑन्कोलॉजी गाइडलाइन के अनुसार लिवर कैंसर की पुष्टि के लिए निम्न जांच होती हैं।
लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी): लिवर एंजाइम्स और बिलीरुबिन स्तर की जानकारी देता है।
अल्फा-फीटोप्रोटीन (एएफटी) टेस्ट: यह ब्लड टेस्ट कैंसर कोशिकाओं की पहचान में मदद करता है।
अल्ट्रासाउंड / सीटी/एमआरआई: लिवर के आकार, गांठ, ट्यूमर या स्कारिंग की सटीक जानकारी मिलती है।
लिवर बायोप्सी: माइक्रोस्कोपिक जांच के लिए लिवर ऊतक का नमूना लिया जाता है।
फाइब्रोस्कैन: लिवर की कठोरता और सिरोसिस की गंभीरता मापने में सहायक होती है।
लिवर कैंसर एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारी है। बशर्ते इसका निदान सही समय पर हो जाए। उपचार का तरीका मरीज की आयु, कैंसर के स्टेज, ट्यूमर के आकार, लिवर की कार्यक्षमता और समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। नोएडा में अब एडवांस्ड ऑन्कोलॉजी सेंटर्स और लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant) यूनिट्स उपलब्ध हैं। जहां कैंसर का इलाज अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जा रहा है।
शुरुआती अवस्था में जब कैंसर केवल लिवर के एक हिस्से तक सीमित होता है, तब ट्यूमर को ऑपरेशन से निकाल दिया जाता है। सर्जन लिवर के संक्रमित हिस्से को काटकर हटा देता है, जबकि बाकी स्वस्थ भाग सामान्य रूप से कार्य करता रहता है। जब लिवर का बाकी हिस्सा स्वस्थ हो और कैंसर अन्य अंगों में नहीं फैला हो तो इलााज होता है। इससे मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना अधिक रहती है।
जब कैंसर से पूरा लिवर क्षतिग्रस्त हो जाए या सर्जरी संभव न हो, तो नए स्वस्थ डोनर लिवर (Donor Liver) को प्रत्यारोपित किया जाता है। मरीज का पूरा लिवर हटाकर डोनर का लिवर लगाया जाता है। आमतौर परलिवर डोनर (परिवार का सदस्य) या शव दाता का उपयोग किया जाता है। लिवर कैंसर के साथ-साथ सिरोसिस जैसी बीमारियों का भी इलाज संभव होता है। मरीज की जीवन प्रत्याशा कई गुना बढ़ती है।
जब सर्जरी संभव नहीं होती, तब कैंसर कोशिकाओं को ऊर्जा तरंगों से नष्ट किया जाता है। रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) कैंसर कोशिकाओं को गर्म कर जलाया जाता है। माइक्रोवेव एब्लेशन (MWA) माइक्रोवेव ऊर्जा से कैंसर ऊतक को नष्ट किया जाता है। इथेनॉल इंजेक्शन ट्यूमर में सीधे अल्कोहल इंजेक्ट कर उसे नष्ट किया जाता है।
ऐसी दवाएं दी जाती हैं जो कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकती हैं या उन्हें नष्ट करती हैं। अंतः शिरा (IV) इंजेक्शन द्वारा या मौखिक दवा (टैबलेट) के रूप में। आमतौर पर उपयोग की जाने वाली दवाएं। डॉक्सोरूबिसिन, सिस्प्लैटिन, फ्लूरोयूरेसिल (5-FU), और जेमसाइटैबिन दवाएं दी जाती है। साथ ही साइड इफेक्ट्स थकान, बाल झड़ना, भूख कम लगना, परंतु यह अस्थायी होते हैं। सहायक थेरेपीे के रूप में साथ में इम्यूनो-पोषण और सहायक चिकित्सा दी जाती है।
यह नई पद्धति केवल कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती है और स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करने वाले सिग्नल को ब्लॉक करती हैं। इससे ट्यूमर का आकार घटता है और फैलाव रुकता है।
यह थेरेपी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है ताकि वह कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर खुद नष्ट कर सके। यह शरीर की उन कोशिकाओं को सक्रिय करती है जो कैंसर से लड़ने में सक्षम होती हैं। कई मरीजों में यह थेरेपी लंबी अवधि तक रोग को नियंत्रित रखती है।
कैंसर ट्यूमर पर उच्च-ऊर्जा किरणें केंद्रित की जाती हैं, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतक सुरक्षित रहते हैं। यह इम्यूनो-पोषण और सहायक चिकित्सा पद्धति है।
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शराब और धूम्रपान से परहेज करें
हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण करवाएं
संतुलित आहार और वजन नियंत्रण रखें
डायबिटीज़ और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें
लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां न लें
6 महीने में लिवर टेस्ट करवाएं, खासकर जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए
लिवर कैंसर एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है, बशर्ते इसे समय रहते पहचान लिया जाए। ऑन्कोलॉजी गाइडलाइन के अनुसार, नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेकर इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। नोएडा में उपलब्ध आधुनिक उपचार और अनुभवी कैंसर विशेषज्ञ (Cancer specialists in Noida) अब लिवर कैंसर के मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरे हैं। इसलिए समय रहते इलाज कराना चाहिए। इलाज में देरी से नुकसान हो सकता है।
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प्रश्न 1: क्या लिवर कैंसर शुरुआती स्टेज में ठीक होता है?
उत्तर: हां अगर समय पर निदान और उपचार हो तो शुरुआती स्टेज में सर्जरी या ट्रांसप्लांट से ठीक किया जाता है।
प्रश्न 2: क्या हेपेटाइटिस बी या सी लिवर कैंसर का कारण बनता है?
उत्तर: जी हां लंबे समय तक संक्रमण रहने से कैंसर का खतरा बढ़ता है। इलाज में देरी से नुकसान होता है।
प्रश्न 3: क्या लिवर कैंसर में दर्द होता है?
उत्तर: प्रारंभिक अवस्था में नहीं, लेकिन बाद में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, सूजन या भारीपन महसूस होता है। लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
प्रश्न 4: क्या लिवर कैंसर का इलाज नोएडा में संभव है?
उत्तर: हां नोएडा में अब अत्याधुनिक कैंसर सर्जरी, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड और इम्यूनोथेरेपी की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसलिए समय रहते इलाज कराएं।
प्रश्न 5: क्या लिवर कैंसर को रोका जा सकता है?
उत्तर: हां, हेपेटाइटिस बी वैक्सीन, शराब से परहेज, संतुलित आहार और नियमित जांच से जोखिम कम किया जाता है।