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पेट दर्द और फूलना: नोएडा में विशेषज्ञ निदान

आज कल पेट दर्द, पेट फूलना, दस्त और लगातार पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं। यह साधारण कारणों से भी होती हैं। कभी-कभी गंभीर पाचन विकार का संकेत भी देती हैं। नोएडा में बेस्ट गैस्ट्रो हॉस्पिटल नोएडा उपलब्ध हैं। जहां सही निदान (Diagnosis) और आधुनिक उपचार से इन समस्याओं को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

 

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पेट दर्द और फूलना क्यों होता है? (Why do stomach pain and bloating occur)

पेट दर्द और ब्लोटिंग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट की सामान्य गड़बड़ियों के कारण होते हैं। इसके मुख्य कारणों में आंतों में गैस बढ़ना, अपच, अत्यधिक मसालेदार या तेलयुक्त भोजन का सेवन, संक्रमण, आंतों में सूजन और पाचन तंत्र की गति का धीमा होना शामिल है। यदि यह लक्षण कई सप्ताह तक लगातार बने रहें, तो यह किसी गंभीर पाचन विकार का संकेत होता है।


दीर्घकालिक दस्त क्या है? (What is chronic diarrhea)

यदि दस्त 4 सप्ताह से अधिक समय तक लगातार बना रहे या बीच-बीच में दोबारा होता रहे, तो इसे दीर्घकालिक दस्त कहा जाता है। यह आंतों में संक्रमण, सूजन, आईबीएस,आईबीडी, थायरॉइड असंतुलन या किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है, इसलिए समय पर जांच कराना बेहद आवश्यक है।
 

तीव्र बनाम दीर्घकालिक दस्त में अंतर (The difference between acute and chronic diarrhea)

दस्त को उसकी अवधि और कारणों के आधार पर तीन प्रकारों में बांटा जाता है। तीव्र दस्त आमतौर पर 1 से 7 दिन तक रहता है। इसका मुख्य कारण दूषित पानी या भोजन तथा वायरल संक्रमण होता है। यह सामान्यतः हल्का होता है और जल्दी ठीक हो जाता है। उप-तीव्र दस्त 2 से 4 सप्ताह तक बना रहता है। प्रायः परजीवी या बैक्टीरियल संक्रमण के कारण होता है। जिसकी गंभीरता मध्यम होती है। वहीं, दीर्घकालिक दस्त 4 सप्ताह से अधिक समय तक जारी रहता है। आईबीएस,आईबीडी, आंतों की सूजन या मालएब्जॉर्प्शन जैसी स्थितियों की ओर संकेत करता है, जो अधिक गंभीर होती है और तुरंत जांच की आवश्यकता होती है।

 

दस्त, पेट दर्द और फूलने के मुख्य कारण (Main causes of diarrhea, stomach pain, and bloating)

दस्त, पेट दर्द और पेट फूलने के पीछे कई पाचन संबंधी कारण होते हैं। इनमें सबसे आम कारण संक्रमण हैं। जिनमें वायरल (जैसे नोरोवायरस, रोटावायरस), बैक्टीरियल (जैसे ई.कोलाई, साल्मोनेला) और परजीवी संक्रमण (जैसे जिआर्डिया) शामिल हैं। इसके अलावा आईबीएस – इरिटेबल बाउल सिंड्रोम भी एक प्रमुख कारण है। जिसमें पेट दर्द, गैस, कब्ज या दस्त का बार-बार होना शामिल है और यह तनाव के बढ़ने पर अधिक गंभीर हो जाता है। वहीं आईबीडी - इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज, जैसे अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोहन डिजीज में खून वाला दस्त और वजन घटना जैसी गंभीर समस्याएं देखी जाती हैं।

 

लैक्टोज इनटॉलरेंस भी एक आम कारण है, जिसमें दूध या डेयरी लेने के बाद पेट फूलना, गैस और दस्त होने लगते हैं। इसी तरह सीलिएक डिजीज में शरीर गेहूं, ग्लूटेन को सहन नहीं कर पाता और आंतें पोषण अवशोषित नहीं कर पातीं। पैंक्रियाटिक इंफिशिएंसी के कारण पाचन एंजाइम कम बनते हैं जिससे भोजन सही से पच नहीं पाता। थायरॉइड असंतुलन, विशेषकर हाइपरथायरॉइडिज्म में तेज मेटाबॉलिज्म के कारण दस्त बढ़ जाते हैं। अंत में, लंबे समय तक दवाइयों का सेवन जैसे एंटीबायोटिक्स या मैग्नीशियम बेस्ड एंटासिड भी दस्त, गैस और पेट फूलने की समस्या का कारण बन सकते हैं।

 

खतरनाक लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें (Dangerous symptoms you shouldn't ignore)

 

  1. खून वाला दस्त

  2. तेज बुखार के साथ दस्त

  3. लगातार पेट दर्द

  4. शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)

  5. पेशाब कम होना

  6. वजन का तेजी से कम होना

  7. दस्त 4 सप्ताह से अधिक चलना


निदान कैसे किया जाता है? (How is it diagnosed)

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट दस्त, पेट दर्द और पेट फूलने के कारणों की पहचान करने के लिए कई तरह की विस्तृत जांचें करते हैं।


स्टूल टेस्टः

 

  • दस्त के कारणों की पहचान के लिए मल की जांच की जाती है। इसमें संक्रमण, कीड़े, परजीवी, बैक्टीरिया या म्यूकस की उपस्थिति का पता चलता है।


ब्लड टेस्ट (सीबीसी, सीआरपी, थायराइड, इलेक्ट्रोलाइट्स):

 

  • खून की जांच से शरीर में सूजन, संक्रमण, एनीमिया, थायरॉइड असंतुलन और इलेक्ट्रोलाइट गड़बड़ी का पता लगाया जाता है।


अल्ट्रासाउंड /सीटी पेट:

 

  • पेट के अंदरूनी अंगों—जैसे आंत, पैंक्रियास, गॉलब्लैडर—की संरचनात्मक समस्याओं को देखने के लिए किया जाता है।


एंडोस्कोपी / कोलोनोस्कोपी:

 

  • ऊपरी और निचली आंत की वास्तविक स्थिति देखने के लिए कैमरे वाली ट्यूब से जांच की जाती है। अल्सर, सूजन और IBD का पता लगाने में उपयोगी है।


हाइड्रोजन सांस परीक्षण (एचबीटी):

 

  • लैक्टोज इनटॉलरेंस, एसआईबीओ और कार्बोहाइड्रेट पाचन की गड़बड़ी का परीक्षण करने के लिए किया जाता है।


फेकल कैल्प्रोटेक्टिन - आईबीडी के लिएः

 

  • स्टूल में मौजूद सूजन मार्कर IBD (अल्सरेटिव कोलाइटिस/क्रोहन डिज़ीज़) की पहचान करता है।


अग्नाशय परीक्षणः

  • पैंक्रियास द्वारा पर्याप्त पाचन एंजाइम बन रहे हैं या नहीं, यह जांचने के लिए किया जाता है।


उपचार (Treatment)


आहारः

 

  • हल्का और फाइबर युक्त भोजनः दलिया, खिचड़ी, उबली सब्ज़ियाँ, ओट्स और फलों से पाचन बेहतर होता है और दस्त में राहत मिलती है।

  • तला-भुना भोजन, पैक्ड फूड, सोडा से दूरीः ऐसे खाद्य पदार्थ आंतों में जलन, गैस और दस्त को बढ़ाते हैं।

  • दही, छाछ, नारियल पानीः इलेक्ट्रोलाइट्स और प्रीबायोटिक्स से शरीर की कमजोरी कम होती है और आंतों का माइक्रोफ्लोरा सुधरता है।

  • लो-एफओडीएमएपी डाइट (आईबीएस में उपयोगी): यह डाइट गैस, पेट फूलना, क्रैम्प और IBS से जुड़े दस्त में अत्यधिक लाभ देती है।

 

दवाइयां (केवल डॉक्टर की सलाह पर):

 

  • ओआरएस (निर्जलीकरण रोकने के लिए):  पानी और नमक की कमी को तुरंत पूरा करता है।

  • एंटीस्पास्मोडिक्स:  पेट में ऐंठन और मरोड़ कम करते हैं।

  • प्रोबायोटिक्स: आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए डायरिया या एंटीबायोटिक सेवन के बाद आंतों का संतुलन बहाल करते हैं।

  • एंटीबायोटिक दवाओं:  यदि बैक्टीरियल संक्रमण हो तो केवल संक्रमण की पुष्टि पर ही दी जाती हैं।

  • दस्त रोधी दवाएंः डॉक्टर गंभीर दस्त को कंट्रोल करने के लिए देते हैं। इन्हें स्वयं नहीं लेना चाहिए।

  • अग्नाशयी एंजाइमः पैंक्रियास की कमजोरी होने पर खुराक भोजन के साथ दी जाती है ताकि पाचन सुधरे।

  • स्टेरॉयड/इम्यूनोसप्रेसेंट्सः आईबीडी के गंभीर मामलों में अल्सरेटिव कोलाइटिस या क्रोहन डिज़ीज़ की सूजन नियंत्रित करने के लिए।

 

गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्तीः

 

  • आईवी तरल पदार्थः तेज निर्जलीकरण होने पर शरीर में सीधे तरल पदार्थ दिए जाते हैं।

  • इलेक्ट्रोलाइट सुधारः लो सोडियम, पोटैशियम या बाइकार्बोनेट के स्तर को सुधारा जाता है।

  • तेज बुखार या गंभीर डिहाइड्रेशन का प्रबंधनः लगातार उल्टी, बुखार, पेशाब कम होना, कमजोरी जैसी स्थितियों में तुरंत उपचार। पेट दर्द विशेषज्ञ डॉक्टर इन नोएडा  में उपलब्ध है। नोएडा में गैस्ट्रो विशेषज्ञ से अभी संपर्क करें – कॉल करें: +91 9667064100

 

दस्त और निर्जलीकरण में प्राथमिक चिकित्सा (First aid for diarrhea and dehydration)


यदि दस्त हो जाए तो:

 

  • ओआरएस का सेवन करें

  • पानी, नारियल पानी भरपूर मात्रा में लें

  • कैफीन, दूध, कोल्ड ड्रिंक्स से बचें

  • केले, खिचड़ी, दही, मूंग दाल जैसी BRAT डाइट लें

  • बिना डॉक्टर के एंटीबायोटिक न लें


निष्कर्ष (Conclusion)

पेट दर्द, गैस, फूलना और बार-बार दस्त को हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि लक्षण लगातार बने रहें या दस्त 2–4 सप्ताह से अधिक चलें, तो विशेषज्ञ जांच बेहद आवश्यक है। सही और समय पर उपचार से पाचन तंत्र की अधिकांश समस्याएं आसानी से नियंत्रित की जाती हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


प्रश्न 1: क्या बार-बार दस्त होना गंभीर बीमारी का संकेत है?
उत्तरः हां, यदि दस्त 4 सप्ताह से ज्यादा चले तो यह क्रॉनिक डिसऑर्डर का संकेत होता है, तो तुरंत जांच कराएं।


प्रश्न 2: क्या पेट फूलना आईबीएस का लक्षण है?
उत्तरः हां, आईबीएस में गैस, पेट में ऐंठन, कब्ज/दस्त आम हैं। इसलिए समय पर इलाज जरूरी है।


प्रश्न 3: क्या दूध पीते ही दस्त होना सामान्य है?
उत्तरः नहीं, यह लैक्टोज इनटॉलरेंस का संकेत होता है। डॉक्टर की सलाह पर सही डाइट प्लान बनाना चाहिए।


प्रश्न 4: क्या घर में ओआरएस पीना पर्याप्त है?
उत्तरः हल्के दस्त में पर्याप्त है, लेकिन निर्जलीकरण होने पर मेडिकल इलाज जरूरी है।


प्रश्न 5: कब डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए?
उत्तरः खून वाला दस्त, तेज बुखार, लगातार पेट दर्द, पेशाब कम होना, कमजोरी या बेहोशी होती है।