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टीबी (तपेदिक) एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह शरीर के अन्य हिस्सों में होती है। यह बीमारी माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह बैक्टीरिया हवा के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है जिसके लिए आपको समय से पास के अच्छे हॉस्पिटल (best hospital Nearby) में दिखाना आवश्यक है। इसके कारण, लक्षणों को पहचानकर और सही समय पर रोकथाम के उपाय अपनाकर हम टीबी से बच सकते हैं। जागरूकता और सतर्कता बीमारी से लड़ने की सबसे बड़ी ताकत है।
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टीबी जिसे हिन्दी में तपेदिक कहते हैं। एक संक्रामक बीमारी होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। मगर यह शरीर के अन्य अंगों जैसे किडनी, मस्तिष्क, हड्डियों को भी प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यह माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होती है। टीबी से संक्रमित व्यक्ति जब खांसता, छींकता या बात करता है, तो उसके बैक्टीरिया हवा में फैलते हैं। यही बैक्टीरियां दूसरों को संक्रमित करते हैं।
टीबी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम या फेफड़ों की अन्य बीमारियों जैसे लगते हैं। इसलिए इकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए।
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर इसे आसानी से रोके सकते हैं। यहां टीबी से बचाव के लिए महत्वपूर्ण उपाय दिए गए हैं:
टीबी का इलाज सही और पूरी अवधि तक दवाइयां लेने से ही संभव होता है।
जब टीबी के बैक्टीरिया सामान्य दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। तब मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) या एक्सटेंसिवली ड्रग रेसिस्टेंट (एक्सडीआर) टीबी होता है। इनका इलाज विशेष प्रकार की दवाइयों और लंबे समय तक किया जाता है, जिसकी देखरेख नोएडा के पल्मोनोलॉजी विशेषज्ञ (best pulmonologist in Noida) अच्छे से करते हैं। इसलिए समय पर इलाज जरूरी होता है।
टीबी एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। अगर समय पर इसके लक्षणों को पहचान निदान के साथ इलाज शुरू किया जाए तो नियंत्रित हो सकती है। टीबी से लड़ने के लिए जागरूकता और सतर्कता आवश्यक है। सही जानकारी सुरक्षित व्यवहार और अच्छी कीमत (best Cost) में नियमित जांच से इस बीमारी को समाज से खत्म कर सकते हैं। इसलिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। संदेह होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। टीबी के खिलाफ जागरूकता फैलाएं।
यदि टीबी के लक्षण दिखाई दें, तो देर न करें—सही जांच और प्रभावी इलाज के लिए नोएडा में मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर से आज ही परामर्श लें।
उत्तर: टीबी संक्रमित व्यक्ति जब खांसता, छींकता या बोलता है, तो उसके मुंह से बैक्टीरिया हवा में फैलते हैं। सांस के माध्यम से ये बैक्टीरिया स्वस्थ व्यक्ति में प्रवेश करते हैं।
उत्तर: टीबी का इलाज दवाइयों से किया जाता है। प्रारंभिक दो महीने में चार दवाएं और उसके बाद चार महीने तक दी दवाएं दी जाती हैं। दवाइयां नियमित और पूरी अवधि तक लेनी जरूरी हैं। एमडीआर-टीबी और एक्सडीआर टीबी के लिए विशेष इलाज होता है।
उत्तर: समय पर निदान और सही इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है। इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत जांच के बाद इलाज शुरू करना चाहिए।
उत्तरः संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना चाहिए। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना चाहिए। बच्चों को बीसीजी टीकाकरण कराना चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहिए।
उत्तर: कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग, बच्चे, बुजुर्ग और एचआईवी संक्रमित(HIV infected) व्यक्ति अधिक जोखिम में होते हैं। इसलिए कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाली को सावधानी बरतनी चाहिए।
उत्तर: बीसीजी वैक्सीन बच्चों में टीबी से बचाव के लिए दी जाती है। डॉक्टरों की सलाह पर बच्चों को यह वैक्सीन लगाई जा सकती है।
उत्तर: कुछ लोगों में बैक्टीरिया शरीर में छुपा रह जाता है जिसे अव्यक्त टीबी कहते हैं। जो सक्रिय टीबी में तब्दील नहीं होता अगर उनकी प्रतिरक्षा मजबूत हो।