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पेचिश के कारण, लक्षण, बचाव और घर उपाय

पेचिश (Dysentery) पाचन तंत्र का एक आम लेकिन गंभीर रोग है। इसमें बार-बार दस्त, मल में खून व म्यूकस आना, पेट दर्द और बुखार जैसे लक्षण दिखते हैं। यह मुख्य रूप से दूषित भोजन और पानी, संक्रमण या परजीवी (जैसे एंटअमीबा हिस्टोलिटिका) और बैक्टीरिया (शिगेला, ई.कोली) के कारण होता है। Piles surgery in Noida में उपलब्ध है।  अगर समय पर इलाज न किया जाए तो शरीर में पानी और खून की कमी (डिहाइड्रेशन और एनीमिया) होती है। इसलिए सावधानी और सही इलाज बेहद जरूरी है।

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पेचिश क्या है ? (what is dysentery)


पेचिश एक आंतों की बीमारी है। जिसमें बार-बार पतले दस्त होते हैं। उनमें खून या बलगम भी आता है। यह मुख्य रूप से बैक्टीरिया (जैसे शिगेला) या अमीबा के संक्रमण से होता है। लक्षण दिखने पर इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। शरीर में पानी और नमक की कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस(ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) लेना चाहिए। डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक या एंटी-अमीबिक दवा लेनी चाहिए।


पेचिश के कारण (Causes of Dysentery)

 

बैक्टीरियल संक्रमणः

शिगेला, ई.कोली, साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया पेचिश का मुख्य कारण हैं। यह बैक्टीरिया आंतों में सूजन पैदा करके बार-बार दस्त और खून/बलगम वाला मल करवाते हैं।


परजीवी संक्रमणः

एंटअमीबा हिस्टोलिटिका नामक अमीबा के कारण होता है। यह धीरे-धीरे आंत की परत को नुकसान पहुंचाता है। लंबे समय तक बीमारी बनी रहती है।


दूषित पानी और खानाः

गंदे या संक्रमित पानी से रोगाणु शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। सही से नहीं धुला या अधपका खाना संक्रमण फैलाता है। खुले में रखा खाना और सड़क किनारे फूड। धूल-मिट्टी, मक्खियों और बैक्टीरिया से दूषित खाना संक्रमण का स्रोत बनता है। गर्मियों और बरसात में सड़क किनारे का खाना जल्दी खराब हो जाता है।


बिना उबला या बिना फ़िल्टर किया पानीः

कच्चा पानी पीने से परजीवी और बैक्टीरिया आसानी से आंतों में चले जाते हैं। खासकर हैंडपंप, ट्यूबवेल और खुले स्रोत का पानी अधिक जोखिम भरा होता है।


खराब स्वच्छता

गंदगी वाले माहौल में बैक्टीरिया और परजीवी तेजी से फैलते हैं। शौचालय की साफ-सफाई न होना संक्रमण का कारण बनता है।


गंदे हाथों से खाना खाना

बिना हाथ धोए भोजन करने से जीवाणु सीधे शरीर में जाते हैं। यह बच्चों में पेचिश का सबसे सामान्य कारण है।


शौचालय उपयोग के बाद हाथ न धोनाः

मल में मौजूद रोगाणु हाथों से भोजन और पानी तक पहुँचकर पेचिश फैलाते हैं।


कमज़ोर प्रतिरोधक क्षमताः

जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। उनमें संक्रमण जल्दी फैलता है। लंबे समय से बीमार लोग, कुपोषित बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं।


अधिक जोखिम वाले समूहः

बच्चे बार-बार गंदगी से खेलने और हाथ मुंह में डालने की आदत से जल्दी संक्रमित हो जाते हैं। गर्भवती महिलाएं भी होती है। शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण अधिक संवेदनशील होती हैं। बुजुर्ग की कमजोर शरीर और कमजोर आंतों की वजह से संक्रमण जल्दी पकड़ता है।


पेचिश के लक्षण (Symptoms of Dysentery)

 

  1. बार-बार दस्त आनाः दिन में कई बार पतले दस्त होना।
  2. मल में खून और म्यूकस (बलगम) का आनाः यह पेचिश की सबसे पहचान योग्य विशेषता है।
  3. पेट में तेज ऐंठन व दर्दः खासकर निचले हिस्से में होती है।
  4. बुखारः सामान्य से तेज, कभी-कभी ठंड लगने के साथ होता है।
  5. उल्टी और जी मचलानाः पाचन तंत्र कमजोर होने के कारण होता है।
  6. भूख कम लगनाः शरीर में कमजोरी आने लगती है।
  7. डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) :  बार-बार दस्त और उल्टी से शरीर में पानी और नमक की कमी।
  8. कमजोरी और थकान: लगातार दस्त से शरीर में ऊर्जा की कमी होना।
  9. सिर दर्द और चक्कर आनाः पानी व इलेक्ट्रोलाइट की कमी से होना।
  10. मुंह और होंठ का सूखनाः शरीर में पानी की कमी का संकेत होना।
  11. त्वचा का सूखापनः निर्जलीकरण के बढ़ने पर होता है।
  12. मल त्यागने की बार-बार इच्छाः लेकिन बहुत कम मात्रा में ही मल निकलता है।
  13. शरीर में दर्द और अकड़नः खासकर लंबे समय तक समस्या रहने पर होती है।


पेचिश में क्या खाएं? (Diet during Dysentery)


तरल पदार्थः

  • ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) : शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स (नमक, शुगर) की कमी को पूरा करता है।
  • नारियल पानी: प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर, तुरंत ऊर्जा और हाइड्रेशन देता है।
  • नींबू पानी (हल्का मीठा/नमक वाला):  शरीर को तरोताजा रखता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है।
  • हल्का सूप (सब्जी या दाल का) : आसानी से पचने वाला, साथ ही पोषण भी देता है।
  • मूंग दाल का पानी: पेट पर हल्का, प्रोटीन और मिनरल्स की कमी को पूरा करता है।
  • पतली खिचड़ी का पानी: शरीर को ताकत देता है और पचाने में आसान होता है।

 

हल्का भोजन:


उबला चावल-दही: पेट को ठंडक देता है, पचने में आसान और आंत की सूजन को कम करता है।
दलिया (गेहूं/चावल का) : हल्का, पौष्टिक और ऊर्जा देने वाला होता है।
सूजी का हलवा (कम घी व हल्की शक्कर के साथ) :  जल्दी पचता है और कमजोरी दूर करता है।

 

उबली हुई सब्जियांः

 

  • लौकी:  पेट को ठंडक देती है और आसानी से पचती है।
  • तोरई :  हल्की और फाइबर युक्त, आंत की सफाई में मदद करती है।
  • गाजर:  उबालकर खाने से दस्त कम करने में मदद मिलती है।

 

पचने में आसान फल

 

  • पका हुआ केला:  दस्त रोकने में बेहद कारगर, पोटैशियम से भरपूर होता है।
  • सेब :  पेट को आराम देता है, फाइबर दस्त को नियंत्रित करता है।
  • अनार के दाने :  खून बढ़ाने में मददगार और दस्त रोकने में उपयोगी होते हैं।
  • चीकू या अमरूद का गूदा :  हल्की मिठास के साथ ऊर्जा देता है और पेट को बांधता है।

 

पेचिश में क्या न खाएं ? (Food to Avoid in Dysentery)


तैलीय और मसालेदार खानाः

 पेट पर अतिरिक्त दबाव डालता है। आंतों की सूजन और जलन को बढ़ाता है।


दूध और भारी डेयरी उत्पाद (दही को छोड़कर) : 

दूध पचने में भारी होता है। जिससे गैस और दस्त बढ़ते हैं। मक्खन, चीज़ और मलाईदार चीचें भी नुकसान करती हैं।


कच्ची सब्जियां और सलाद:

इनमें बैक्टीरिया और परजीवी होने की संभावना रहती है। पचने में कठिनाई होती है और पेट दर्द/दस्त को बढ़ा सकती हैं।


सड़क का खाना और फास्ट फूड:

इनमें तेल ज्यादा और स्वच्छता कम होती है। संक्रमण की संभावना बढ़ती है।


कैफीन और उत्तेजक पेय:

कॉफी, चाय, शराब और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स शरीर को डिहाइड्रेट करते हैं। दस्त और कमजोरी को और ज्यादा बढ़ाते हैं।


ज्यादा मीठी चीजें:

अधिक शक्कर से आंतों में पानी खिंचता है। दस्त और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है।

 

घरेलू और जीवनशैली सावधानियां (Home & Lifestyle Precautions)

 

बार-बार हाथ धोएंः

शौचालय जाने के बाद, खाना खाने से पहले और बच्चों को छूने से पहले। साबुन और साफ पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना चाहिए। यदि पानी उपलब्ध न हो तो हैंड सैनिटाइज़र का इस्तेमाल करें।

 

सिर्फ साफ और सुरक्षित पानी पिएंः

उबला हुआ, फिल्टर किया हुआ या पैक्ड पानी ही इस्तेमाल करें। खुले में रखे पानी को न पिएं, क्योंकि उसमें बैक्टीरिया या परजीवी हो सकते हैं। पानी की बोतलें और गिलास हमेशा ढककर रखें।

 

घर का ताज़ा और हल्का भोजन करेंः

तैलीय और मसालेदार भोजन से बचें। ज्यादा देर तक रखा हुआ खाना न खाएं। खाने को ढककर रखें ताकि मक्खियाँ और धूल उस पर न बैठें। बाहर का और अस्वच्छ खाना न खाएं  सड़क का खाना, कटे हुए फल, और अस्वच्छ जगह का बना भोजन पेचिश फैला सकता है। जंक फूड, तली-भुनी और मसालेदार चीजें पचने में भारी होती हैं, इन्हें अवॉइड करें।

 

बच्चों की विशेष देखभाल करेंः

बच्चों को खुले में रखा हुआ खाना या पानी बिल्कुल न दें। उनके खाने-पीने के बर्तन अलग और साफ रखें। बच्चों को बाहर का चाट-पकौड़ी, आइसक्रीम, गोलगप्पे जैसी चीजें न खाने दें। व्यक्तिगत और घरेलू स्वच्छता का ध्यान रखें शौचालय को नियमित रूप से साफ करें। कचरा समय पर फेंकें और घर के आस-पास गंदगी जमा न होने दें। बर्तनों और खाने के बर्तनों को गर्म पानी से धोएं।


मेडिकल देखभाल कब जरूरी है ? (When Medical Care is Necessary)

यदि मल में बार-बार खून और म्यूकस (बलगम) दिख रहा होता है। यह आंतों में गंभीर संक्रमण या अल्सर का संकेत हो सकता है।

 

  • 101°F (38°C) से ज्यादा बुखार होना और बार-बार ठंड लगती है। शरीर सुस्त हो जाना और चलने-फिरने की ताकत कम होती है।
  • 24 घंटे से अधिक समय तक उल्टी होना। होंठ और जीभ का सूखना, आंखें धंसना, पेशाब कम आना। चक्कर आना, दिल की धड़कन तेज होना।
  • बच्चों और बुजुर्गों में बार-बार दस्त हो तो  इनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कम होती है। बार-बार दस्त से शरीर जल्दी कमजोर और डिहाइड्रेट हो सकता है।


सामान्य हल्के उपाय (ओआरएस, हल्का खाना) लेने के बाद भी राहत न मिले। पेट दर्द और दस्त लगातार बने रहें। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता हो सकती है।

 

इंटरनल मेडिसिन गाइडलाइन (Internal Medicine Guidelines for Dysentery)

 

मल की जांचः

मल में खून, म्यूकस और परजीवी (जैसे एंटअमीबा हिस्टोलिटिका) की पहचान के लिए। यह बैक्टीरियल या अमीबिक पेचिश की पुष्टि करता है।

 

रक्त जांचः

शरीर में डिहाइड्रेशन की स्थिति, संक्रमण या एनीमिया (खून की कमी) की जांच। इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन पता लगाने में मदद करता है।

 

अल्ट्रासाउंडः

यदि आंतों में सूजन या लिवर एब्सेस (अम्बिक लिवर फोड़ा) का संदेह हो। अन्य जटिलताओं को समझने के लिए।


पेचिश का इलाज (Treatment)

 

हाइड्रेशनः 

 

  • पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करना। ओआरएस (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) बार-बार पिएं।
     
  • गंभीर डिहाइड्रेशन में अस्पताल में आईवी प्लूड्स(सलाइन) चढ़ाया जाता है।

 

एंटीबायोटिक दवाएंः


डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक दवाएं ले। अमीबिक पेचिश में मेट्रोनिडाजोल जैसी दवाएं। बैक्टीरियल पेचिश में उचित एंटीबायोटिक ले। Best Piles Surgery Doctors In Noida में उपलब्ध है।  बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना खतरनाक होता है।

 

प्रोबायोटिक्सः 

अच्छे बैक्टीरिया वाली दवाएं/कैप्सूल ले। आंत की सेहत सुधारने और दस्त की अवधि कम करने में मदद करते हैं। शरीर में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखते हैं।

 

ऐंठनरोधी/दर्दनाशकः

पेट दर्द कम करने की दवाएं ले। पेट की ऐंठन और दर्द कम करने के लिए ले। केवल डॉक्टर की सलाह से ही लें।


निष्कर्ष (Conclusion)


पेचिश एक सामान्य लेकिन गंभीर बीमारी है। जो दूषित पानी, खाना और संक्रमण से फैलती है। सही खानपान, पर्याप्त तरल और स्वच्छता अपनाने से इसे रोका जा सकता है। हल्के मामलों में घरेलू उपाय और ओआरएस से राहत मिलती है। लेकिन खून वाले दस्त या गंभीर डिहाइड्रेशन होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।  बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार के कोई दवा लेना नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत दवाएं लेनी चाहिए। 


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs on Dysentery)


प्रश्न 1: क्या पेचिश और दस्त एक ही चीज है ?
उत्तर: नहीं, दस्त में पानी जैसी मल आता है। जबकि पेचिश में मल के साथ खून और म्यूकस भी आता है। इसलिए सावधानी बरतें। 


प्रश्न 2: क्या पेचिश में केला खा सकते हैं ?
उत्तर: हां, पका हुआ केला आसानी से पचता है और दस्त रोकने में मदद करता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर केले का सेवन करना चाहिए। 


प्रश्न 3: क्या दही पेचिश में फायदेमंद है ?
उत्तर: हां, दही में प्रोबायोटिक बैक्टीरिया होते हैं जो आंतों को स्वस्थ रखते हैं। लेकिन अन्य डेयरी प्रोडक्ट का सेवन करने के दौरान सावधानी बरतनी चाहिए। 


प्रश्न 4: पेचिश का इलाज कितने दिन में होता है ?
उत्तर: हल्के मामलों में 3–5 दिन में आराम मिलता है, लेकिन बैक्टीरियल/अमीबिक पेचिश में एंटीबायोटिक से 7–10 दिन लगते हैं। अगर इससे ज्यादा समय लगे तो डॉक्टर से पुनः मिले। 


प्रश्न 5: पेचिश से बचाव कैसे करें ?
उत्तर: साफ पानी पिएं, बाहर का खाना न खाएं, हाथों की स्वच्छता रखें और घर का हल्का, ताजा भोजन करें। खराब और बांसी भोजन सेहत के लिए नुकसानदेह होता है।