डायबिटीज और किडनी का गहरा संबंध है। अगर समय रहते ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित न किया जाए, तो किडनी खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। सही आहार, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है।  इस ब्लॉग में हम डायबिटीज के मरीजों में किडनी की होने वाली समस्या और उपचार के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा करेंगे। साथ ही, अगर आपको आप में या आपके परिवार में किसी को लक्षण दिखाई दे रहे है तो आज ही अपने आसपास के अच्छे हॉस्पिटल्स से( the best hospital nearby) सलाह व उपचार प्राप्त करें।

 

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डायबिटीज और किडनी स्वास्थ्य के बीच संबंध (The relationship between diabetes and kidney health)


डायबिटीज (मधुमेह) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। लंबे समय तक उच्च रक्त शर्करा का स्तर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यह स्थिति डायबेटिक नेफ्रोपैथी के रूप में जानी जाती है। जब रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, तो किडनी को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है, जिससे उनकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है डायबिटीज वाले मरीजों में उच्च रक्तचाप का खतरा अधिक होता है, जो किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। किडनी में फ़िल्टर की कार्यक्षमता कमजोर होने से प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) मूत्र में जाने लगता है, जो किडनी की समस्या का संकेत है। इस समय में जितना जल्दी हो सके अच्छे डॉक्टर की सलाह (the best doctor in noida) लेना काफी आवश्यक हो जाता है।

 

क्यों डायबिटीज के मरीजों को किडनी रोग का अधिक खतरा होता है ?


डायबिटीज दुनिया भर में किडनी फेल होने (Kidney Failure) का सबसे बड़ा कारण है।


लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर: जब ब्लड शुगर स्तर लगातार बढ़ा रहता है, तो यह किडनी की रक्त वाहिकाओं को क्षतिग्रस्त कर सकता है।


हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप): डायबिटीज से ग्रस्त लोगों में हाई ब्लड प्रेशर आम समस्या है, जो किडनी के फ़िल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है।


अनियमित जीवनशैली: अस्वस्थ खान-पान, धूम्रपान, शराब का सेवन और व्यायाम की कमी भी किडनी रोग के जोखिम को बढ़ा सकती है।


पर्याप्त पानी न पीना: किडनी को सही तरीके से कार्य करने के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत होती है, और डायबिटीज के मरीजों को बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है, जिससे डिहाइड्रेशन हो सकता है।

 

डायबिटीज और किडनी पर इसका प्रभाव (Diabetes and its effect on the kidneys)


डायबिटीज का सबसे ज्यादा असर शरीर की रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) पर पड़ता है और चूंकि किडनी रक्त को फ़िल्टर करने का काम करती है। इसलिए यह डायबिटीज से अत्यधिक प्रभावित होती है। अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है, तो यह किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है।

 

हाई ब्लड शुगर के कारण किडनी पर दबाव


जब किसी व्यक्ति को डायबिटीज होती है, तो उसका शरीर ब्लड शुगर को नियंत्रित नहीं कर पाता। इस स्थिति में:


अधिक रक्त फ़िल्ट्रेशन :

हाई ब्लड शुगर के कारण किडनी को सामान्य से अधिक रक्त को फ़िल्टर करना पड़ता है। यह अतिरिक्त कार्यभार किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं (Glomeruli) पर दबाव डालता है।

 

सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को नुकसान :

लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रहने से किडनी के फ़िल्टरिंग यूनिट (Nephrons) की सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे किडनी की क्षमता धीरे-धीरे घटती जाती है।

 

यूरिन में प्रोटीन का रिसाव:
जब किडनी के फ़िल्टर ठीक से काम नहीं करते, तो यूरिन में प्रोटीन (एल्ब्यूमिन) का रिसाव होने लगता है। यह डायबेटिक नेफ्रोपैथी का शुरुआती संकेत हो सकता है।

 

किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट कैसे शुरू होती है ?


प्रारंभिक चरण:
शुरुआत में किडनी अधिक मेहनत करके रक्त को फ़िल्टर करने लगती है, जिससे यह थोड़ी बड़ी हो जाती है। इस दौरान कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन किडनी पर दबाव बढ़ने लगता है।

 

मध्यम चरण:
किडनी धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है और एल्ब्यूमिन यूरिया नामक स्थिति उत्पन्न होती है, जिसमें मूत्र में प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है। रक्तचाप भी बढ़ सकता है, जिससे किडनी की समस्या और गंभीर हो सकती है।

 

गंभीर चरण:
जब किडनी की फ़िल्टरिंग क्षमता 60% से कम हो जाती है, तो शरीर में विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। लक्षणों में थकान, पैरों में सूजन, भूख न लगना और बार-बार पेशाब आना शामिल हो सकते हैं।

 

अंतिम चरण :
किडनी की कार्यक्षमता 10-15% से कम रह जाती है। इस अवस्था में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है।


डायबेटिक नेफ्रोपैथी: एक गंभीर जटिलता


डायबेटिक नेफ्रोपैथी वह स्थिति होती है जब डायबिटीज के कारण किडनी धीरे-धीरे खराब होने लगती है। यह दुनिया भर में किडनी फेलियर का सबसे बड़ा कारण है।


डायबेटिक नेफ्रोपैथी के प्रमुख लक्षण:
 

  • मूत्र में झाग – प्रोटीन के रिसाव के कारण
     
  • पैरों, टखनों और आंखों के आसपास सूजन
     
  • रक्तचाप में वृद्धि
     
  • थकान और कमजोरी
     
  • भूख कम लगना और मतली आना


नेफ्रोपैथी से बचाव के उपाय:
 

  • ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें – HbA1c का स्तर 7% से कम रखना महत्वपूर्ण है।
     
  • ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण – 130/80 mmHg से अधिक न हो।
     
  • नमक और प्रोटीन की मात्रा सीमित करें – सोडियम और हाई-प्रोटीन डायट को मॉडरेट करें।
     
  • धूम्रपान और शराब से बचें – ये किडनी की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।
     
  • नियमित यूरिन और ब्लड टेस्ट कराएं – एल्ब्यूमिन और क्रिएटिनिन के स्तर पर नज़र रखें।

 

किडनी रोग के लक्षण डायबिटीज मरीजों में (Symptoms of kidney disease in diabetes patients)


डायबिटीज के मरीजों में किडनी धीरे-धीरे प्रभावित होती है, और शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते। लेकिन जैसे-जैसे किडनी की कार्यक्षमता कम होती जाती है, कई लक्षण सामने आने लगते हैं। समय पर इन लक्षणों को पहचानकर उचित इलाज करना जरूरी है, ताकि किडनी फेल होने से बचा जा सके।
 

  • अगर पेशाब में झाग दिखता है, तो यह प्रोटीन यूरिया का संकेत हो सकता है।
    पैरों, टखनों, हाथों और यहां तक कि आंखों के आसपास सूजन आ सकती है।
     
  • बिना किसी भारी काम के भी कमजोरी और थकान महसूस होना। बहुत अधिक सोने या फिर नींद न आने की समस्या।
     
  • सिरदर्द, चक्कर आना और आंखों के सामने धुंधलापन आना। ब्लड प्रेशर 130/80 mmHg से अधिक होना।
     
  • खाने का मन नहीं करना, खासकर प्रोटीन युक्त भोजन से परहेज। मतली आना और कभी-कभी उल्टी भी हो सकती है। मुंह का स्वाद कड़वा या धातु जैसा महसूस होना।

 

डायबिटीज मरीजों के लिए किडनी को स्वस्थ रखने के उपाय (Tips to keep kidneys healthy for diabetes patients)


डायबिटीज के मरीजों में किडनी रोग का खतरा अधिक होता है, लेकिन कुछ सावधानियां और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर का नियंत्रण, संतुलित आहार, हाइड्रेशन और नियमित व्यायाम किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

ब्लड शुगर नियंत्रण: सही आहार और जीवनशैली

ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है, क्योंकि हाई ब्लड शुगर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। रोज़ाना ब्लड शुगर मॉनिटर करें और इसे HbA1c 7% से कम रखने का प्रयास करें। साबुत अनाज, फाइबर युक्त भोजन, हरी सब्जियां, और कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ खाएं। प्रोसेस्ड फूड और मीठे खाद्य पदार्थों से बचें। हर दिन 30-45 मिनट हल्का व्यायाम (योग, पैदल चलना, साइक्लिंग) करें।

 

नियमित ब्लड प्रेशर चेकअप: हाइपरटेंशन का प्रभाव कम करना

डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) किडनी की क्षति को तेजी से बढ़ा सकता है। ब्लड प्रेशर को 130/80 mmHg से कम बनाए रखें। अत्यधिक नमक और प्रोसेस्ड फूड से बचें।

 

संतुलित आहार: प्रोटीन, सोडियम और पोटैशियम का संतुलन

संतुलित आहार किडनी की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद करता है। कम सोडियम वाला भोजन खाएं (अत्यधिक नमक किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है)।

 

पर्याप्त पानी पीना: किडनी को हेल्दी रखने के लिए

पानी की सही मात्रा किडनी से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। हर दिन 2-3 लीटर पानी पिएं (लेकिन डॉक्टर की सलाह के अनुसार, खासकर यदि किडनी की समस्या पहले से हो)।

 

धूम्रपान और शराब से परहेज

धूम्रपान और शराब दोनों ही किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किडनी रोग का खतरा बढ़ जाता है। सिगरेट और तंबाकू का पूरी तरह से त्याग करें। शराब से बचें।

 

नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली

नियमित व्यायाम और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर किडनी की समस्याओं से बचा जा सकता है। हर दिन कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी करें।

 

डायबिटीज के मरीजों में किडनी की जांच के महत्वपूर्ण टेस्ट (Important tests to check kidney function in diabetic patients)


डायबिटीज के मरीजों को किडनी की कार्यक्षमता पर नजर रखने के लिए नियमित जांच करानी चाहिए। समय पर किए गए टेस्ट किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत दे सकते हैं, जिससे उपचार जल्द शुरू किया जा सकता है। नीचे सबसे महत्वपूर्ण किडनी फंक्शन टेस्ट दिए गए हैं जो डायबिटीज मरीजों को समय-समय पर करवाने चाहिए, लेकिन जाँच करवाने से पहले नोएडा में किडनी अस्पताल (Nephrology Hospital in Noida) से संपर्क कर सलाह अवश्य लें।


यूरिन टेस्ट (माइक्रोअल्बुमिन टेस्ट)

यह टेस्ट पेशाब में माइक्रोअल्बुमिन (एक प्रकार का प्रोटीन) की मात्रा को मापता है। सामान्य रूप से किडनी प्रोटीन को छानकर शरीर में बनाए रखती है, लेकिन अगर किडनी कमजोर हो रही है, तो प्रोटीन यूरिन में लीक होने लगता है।

 

ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन टेस्ट

यूरिया और क्रिएटिनिन शरीर में बनने वाले अपशिष्ट (Waste) पदार्थ हैं, जो किडनी द्वारा फिल्टर किए जाते हैं। अगर किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही, तो रक्त में यूरिया और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ जाता है।

 

जीएफआर (ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट) टेस्ट

ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट यह बताता है कि किडनी कितनी कुशलता से रक्त को फिल्टर कर रही है। यह टेस्ट किडनी फंक्शन को स्टेज-वाइज मॉनिटर करने में मदद करता है। डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीजों में कम जीएफआर किडनी फेलियर का संकेत हो सकता है।

 

अन्य महत्वपूर्ण किडनी टेस्ट:


सोडियम, पोटैशियम और इलेक्ट्रोलाइट टेस्ट:

किडनी का असंतुलित कार्य शरीर में खनिजों (Electrolytes) का असंतुलन पैदा कर सकता है।


किडनी अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन:
अगर डॉक्टर को किडनी स्टोन, सूजन या अन्य संरचनात्मक समस्या का संदेह हो, तो यह टेस्ट किया जाता है।

 

किडनी की समस्याओं का इलाज और चिकित्सा विकल्प (Treatment and medical options for kidney problems)


डायबिटीज से प्रभावित किडनी की समस्याओं का इलाज इस पर निर्भर करता है कि बीमारी किस स्टेज पर है। शुरुआती चरण में जीवनशैली में बदलाव और दवा से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि गंभीर मामलों में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता हो सकती है।
 

  • शुरुआती चरण में सही आहार, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रण, दवा और व्यायाम से किडनी को बचाया जा सकता है।
     
  • अगर किडनी फेलियर उन्नत स्तर पर पहुंच जाए, तो डायलिसिस या ट्रांसप्लांट ही अंतिम समाधान होते हैं।
     
  • समय पर किडनी फंक्शन टेस्ट और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, ताकि समस्या गंभीर होने से पहले इसका प्रबंधन किया जा सके।
     
  • डायबिटीज मरीजों के लिए किडनी की देखभाल जरूरी है! सही जीवनशैली अपनाकर और समय पर जांच करवाकर किडनी फेलियर से बचा जा सकता है।


अगर आप भी डायबिटीज और किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो आज ही नोएडा में सर्वश्रेष्ठ डायबिटीज अस्पताल से संपर्क करें और समय पर सही इलाज लें।

 

किडनी और डायबिटीज: फेलिक्स हॉस्पिटल में सर्वश्रेष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट से सही इलाज पाएं (Get the right treatment from the best Nephrologist at Felix Hospital)


फेलिक्स हॉस्पिटल का अनुभवी नेफ्रोलॉजी विभाग डायबिटीज से जुड़ी किडनी समस्याओं का समर्पित उपचार प्रदान करता है। डायबेटिक नेफ्रोपैथी और किडनी इंफेक्शन से पीड़ित मरीजों के लिए हमारे विशेषज्ञ कस्टमाइज्ड उपचार योजना बनाते हैं, जिससे उनकी किडनी हेल्थ को बनाए रखा जा सके और दीर्घकालिक जटिलताओं से बचाव किया जा सके।
 

  • डॉ. समीर तवाकले – डायबेटिक किडनी डिजीज और क्रॉनिक किडनी फेल्योर के विशेषज्ञ, डॉ. तवाकले ब्लड शुगर नियंत्रण और किडनी कार्यक्षमता सुधारने में मदद करते हैं।
     
  • डॉ. उदित गुप्ता – किडनी ट्रांसप्लांट और किडनी की बड़ी बीमारियों के इलाज में डॉ. उदित माहिर है साथ ही वो गंभीर किडनी मरीजों का काफी अच्छे से इलाज करते है ताकि उनकी सेहत बेहतर हो सके।


फेलिक्स हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रण के माध्यम से किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने में आपकी मदद कर सकते हैं।


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निष्कर्ष (conclusion)

डायबिटीज के मरीजों के लिए किडनी की सेहत बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि हाई ब्लड शुगर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, नियमित जांच, सही जीवनशैली और सावधानी बरतकर किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है। समय पर जांच और सावधानी बरतकर किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रखना सबसे महत्वपूर्ण है। जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके और डॉक्टर से नियमित परामर्श लेकर किडनी फेलियर के जोखिम को कम किया जा सकता है। सही देखभाल और सतर्कता से आप डायबिटीज के बावजूद भी अपनी किडनी को स्वस्थ रख सकते हैं।

 

डायबिटीज के मरीजों में किडनी की समस्या को लेकर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर (Frequently asked questions and answers about kidney problems in diabetes patients)


प्रश्न 1. डायबिटीज से किडनी को नुकसान कैसे होता है ?
उत्तरः हाई ब्लड शुगर किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं (नेफ्रॉन्स) को नुकसान पहुंचाता है, जिससे किडनी का फ़िल्टरिंग सिस्टम कमजोर हो जाता है। इससे प्रोटीन लीक होने लगता है और धीरे-धीरे किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

 

प्रश्न  2. डायबिटीज मरीजों को किडनी टेस्ट कितनी बार कराना चाहिए ?
उत्तरः टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को डायग्नोसिस के 5 साल बाद और उसके बाद हर साल किडनी टेस्ट कराना चाहिए। टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को डायग्नोसिस के तुरंत बाद और फिर हर साल टेस्ट करवाने चाहिए।

 

प्रश्न 3. डायबिटीज में किडनी डैमेज के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं ?
उत्तरः  शुरुआती चरण में कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन धीरे-धीरे ये लक्षण नजर आ सकते हैं। जैसे  पेशाब में झाग आना (प्रोटीन लीक होने का संकेत), पैरों टखनों और चेहरे पर सूजन,  कमजोरी और थकान, भूख में कमी और मतली, हाई ब्लड प्रेशर का बढ़ना है।

 

प्रश्न 4. क्या डायबिटीज के मरीज किडनी की समस्या को रोक सकते हैं ?
उत्तरः  हां, कुछ सावधानियां बरतकर किडनी की समस्या से बचा जा सकता है। ब्लड शुगर नियंत्रण में रखें। ब्लड प्रेशर 130/80 mmHg से कम रखें। संतुलित आहार लें (कम नमक, कम प्रोटीन, और हाई फाइबर फूड)। धूम्रपान और शराब से बचें। नियमित व्यायाम करें

 

प्रश्न 5. अगर किडनी खराब हो रही हो तो इलाज क्या है ?
उत्तरः  शुरुआती स्टेज में जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। जब किडनी 85-90% काम करना बंद कर दे तो डायलिसिस कराएं। अंतिम स्टेज किडनी फेलियर में किडनी ट्रांसप्लांट किया जाता है।

 

प्रश्न 6. क्या डायबिटीज के मरीजों के लिए कोई खास आहार है जो किडनी को बचाने में मदद कर सकता है ?
उत्तरः हां, डायबिटिक-नेफ्रोपैथी डाइट अपनानी चाहिए। कम नमक और सोडियम अचार, प्रोसेस्ड फूड से बचें। संतुलित प्रोटीन (अधिक प्रोटीन खाने से किडनी पर लोड बढ़ सकता है। अधिक पोटैशियम और फॉस्फोरस वाले फूड से बचें। जैसे केला, टमाटर, नट्स। पर्याप्त पानी पिएं लेकिन जरूरत से ज्यादा नहीं।

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