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ल्यूकोप्लाकिया (Leukoplakia) मुंह के अंदर बनने वाले सफेद धब्बों या पैच की एक स्थिति है। जो आसानी से खुरचने पर हटती नहीं है। यह आमतौर पर जीभ, गाल के अंदरूनी हिस्से, मसूड़ों या मुंह के तल पर दिखाई देती है। अधिकांश मामलों में यह दर्दरहित होती है। लेकिन लंबे समय तक बनी रहने पर यह प्री-कैंसरस (Pre-cancerous) स्थिति बन सकती है। ल्यूकोप्लाकिया विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध है। इसलिए समय रहते जांच और उपचार बेहद जरूरी है। अगर मुंह में सफेद धब्बे 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत किसी अनुभवी ईएनटी विशेषज्ञ या ओरल सर्जन से परामर्श लें।
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ल्यूकोप्लाकिया मुंह की श्लेष्मा झिल्ली पर बनने वाला सफेद या धूसर रंग का पैच होता है। जो रगड़ने या खुरचने से नहीं हटता। यह अक्सर तंबाकू सेवन करने वाले लोगों में अधिक देखा जाता है। कुछ मामलों में यह धीरे-धीरे कैंसर में परिवर्तित होता है। विशेषकर यदि उसमें कोशिकीय बदलाव हो।
अगर धब्बे के साथ लाल भाग भी दिखे, तो तुरंत जांच जरूरी है क्योंकि कैंसर का जोखिम अधिक हो सकता है। कुछ प्रमुख लक्षण निम्न है…
मुंह में सफेद या धूसर रंग के धब्बे
जीभ, मसूड़े या गाल के अंदर मोटी परत जैसा पैच
खुरचने पर न हटना
प्रभावित स्थान पर खुरदरापन
कभी-कभी हल्की जलन या असुविधा
लंबे समय तक रहने पर घाव या अल्सर बनना
सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, पान मसाला का सेवन
स्मोकलेस टोबैको (चबाने वाला तंबाकू) का सेवन
शराब और तंबाकू का संयुक्त उपयोग जोखिम कई गुना बढ़ाता है।
दांत की नुकीली सतह
खराब फिटिंग डेंचर
बार-बार गाल काटना
कुछ मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) से जुड़ा हो सकता है।
कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों में जोखिम अधिक होता है।
हर सफेद धब्बा ल्यूकोप्लाकिया नहीं होता। सटीक निदान के लिए डॉक्टर की जांच जरूरी है।
ओरल कैंडिडायसिस (फंगल इंफेक्शन)
लिचेन प्लानस
केमिकल जलन
विटामिन की कमी
सबसे पहले ईएनटी विशेषज्ञ या डेंटल सर्जन मुंह की पूरी तरह से जांच करते हैं। डॉक्टर जीभ, मसूड़ों, गालों के अंदरूनी हिस्से और तालू पर बने सफेद या लाल पैच की बनावट, रंग, आकार और स्थान को ध्यान से देखते हैं। इसके साथ ही यह भी जांचा जाता है कि पैच कठोर है या मुलायम, उसे खुरचने पर निकलता है या नहीं, और आसपास के ऊतकों में कोई सूजन या घाव तो नहीं है। कई बार डॉक्टर मरीज से तंबाकू, गुटखा, धूम्रपान या शराब के सेवन की आदतों के बारे में भी पूछते हैं, क्योंकि ये आदतें मुंह के रोगों और प्री-कैंसर स्थितियों का प्रमुख कारण बन सकती हैं।
यदि डॉक्टर को मुंह के अंदर बना पैच या घाव संदिग्ध लगता है, तो बायोप्सी की सलाह दी जाती है। इस प्रक्रिया में प्रभावित जगह से बहुत छोटा सा टिश्यू सैंपल लिया जाता है और उसे माइक्रोस्कोप से जांचने के लिए लैब में भेजा जाता है। बायोप्सी के माध्यम से यह स्पष्ट किया जाता है कि पैच सामान्य है, किसी संक्रमण के कारण बना है, या उसमें प्री-कैंसर अथवा कैंसर से जुड़े बदलाव मौजूद हैं। यह जांच बीमारी की सही पहचान और समय पर इलाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कुछ मामलों में डॉक्टर अतिरिक्त लैब जांच भी करवाने की सलाह देते हैं। इनमें खून की जांच, फंगल या बैक्टीरियल संक्रमण की जांच, और अन्य मेडिकल टेस्ट शामिल हो सकते हैं। इन जांचों का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि मुंह के पैच किसी संक्रमण, पोषण की कमी, इम्यून सिस्टम की कमजोरी या किसी अन्य बीमारी के कारण तो नहीं बने हैं। सही कारण की पहचान होने पर उपचार भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
ल्यूकोप्लाकिया का उपचार मुख्य रूप से उसके कारण, पैच के आकार, स्थान और बायोप्सी की रिपोर्ट पर निर्भर करता है। कई मामलों में शुरुआती चरण में ही सही उपचार और जीवनशैली में बदलाव करने से बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। डॉक्टर आमतौर पर पहले कारण को खत्म करने और फिर आवश्यक चिकित्सा उपचार की सलाह देते हैं।
ल्यूकोप्लाकिया के अधिकांश मामलों में तंबाकू, गुटखा, पान मसाला, धूम्रपान और शराब प्रमुख कारण होते हैं। इसलिए इलाज का सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम इन आदतों को पूरी तरह बंद करना है। कई मरीजों में सिर्फ तंबाकू और शराब छोड़ देने से ही मुंह के सफेद धब्बे धीरे-धीरे कम होने लगते हैं या पूरी तरह समाप्त हो सकते हैं। डॉक्टर अच्छी मौखिक स्वच्छता (ओरल हाइजीन) बनाए रखने और नियमित दंत जांच की सलाह भी देते हैं।
कुछ मामलों में डॉक्टर दवाओं के माध्यम से भी उपचार करते हैं। इन दवाओं का उद्देश्य सूजन को कम करना, संक्रमण को खत्म करना और मुंह के ऊतकों को स्वस्थ बनाना होता है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं: ये दवाएं मुंह के अंदर की सूजन और जलन को कम करने में मदद करती हैं।
विटामिन सप्लीमेंट: विटामिन ए, सी, ई और बी-कॉम्प्लेक्स जैसे पोषक तत्व मुंह की कोशिकाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं।
एंटीफंगल दवाएं: यदि जांच में फंगल संक्रमण पाया जाता है, तो डॉक्टर एंटीफंगल दवाएं देते हैं ताकि संक्रमण को खत्म किया जा सके।
अगर बायोप्सी रिपोर्ट में प्री-कैंसर (कैंसर से पहले की स्थिति) के संकेत मिलते हैं या पैच लंबे समय तक बने रहते हैं, तो डॉक्टर उन्हें सर्जरी के जरिए हटाने की सलाह दे सकते हैं। आधुनिक चिकित्सा में कई सुरक्षित और प्रभावी तकनीकें उपलब्ध हैं, जैसे—
लेजर की मदद से प्रभावित ऊतक को सटीक तरीके से हटाया जाता है, जिससे आसपास के स्वस्थ ऊतक को कम नुकसान होता है।
इस तकनीक में प्रभावित हिस्से को बहुत ठंडे तापमान से फ्रीज करके नष्ट किया जाता है।
इसमें सर्जरी के माध्यम से पैच को पूरी तरह काटकर निकाल दिया जाता है ताकि आगे कैंसर बनने का खतरा कम हो सके।
ल्यूकोप्लाकिया के उपचार के बाद भी मरीज को समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराते रहना चाहिए। ऐसा इसलिए जरूरी है क्योंकि कुछ मामलों में यह समस्या दोबारा भी हो सकती है या नए पैच बन सकते हैं। नियमित फॉलो-अप से किसी भी संभावित समस्या का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है और समय पर इलाज किया जा सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को मुंह में लंबे समय तक सफेद या मोटे पैच दिखाई देते हैं, दर्द, जलन या घाव ठीक नहीं हो रहा है, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ या डेंटल सर्जन से परामर्श लेना चाहिए। नोएडा में ईएनटी अस्पताल उपलब्ध है। जहां बायोप्सी, लेजर उपचार और अन्य उन्नत जांच व उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं। समय पर जांच और इलाज कराने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
तंबाकू और पान मसाला से पूरी तरह दूरी रखें
शराब का सेवन सीमित करें
नियमित दंत जांच कराएं
मुंह की साफ-सफाई रखें
संतुलित आहार और विटामिन युक्त भोजन लें
मुंह में लंबे समय तक बने किसी भी सफेद धब्बे को नजरअंदाज न करें
ल्यूकोप्लाकिया एक गंभीर लेकिन प्रारंभिक अवस्था में पहचानी जा सकने वाली स्थिति है। समय पर जांच और उचित उपचार से इसके कैंसर में बदलने के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ उपलब्ध है। यदि मुंह में सफेद धब्बे 2 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लें। इलाज में देरी से नुकसान होता है।
उत्तर: नहीं, यह स्वयं कैंसर नहीं है। लेकिन कुछ मामलों में कैंसर में बदलता है।
उत्तर: सामान्यतः दर्द नहीं होता, लेकिन कभी-कभी जलन या असुविधा होती है।
उत्तर: शुरुआती मामलों में तंबाकू छोड़ने से धब्बे कम या समाप्त हो सकते हैं।
उत्तर: यह बच्चों में दुर्लभ है, लेकिन संभव है। अधिकतर वयस्कों में देखा जाता है। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
उत्तर: हां, यदि जोखिम कारक (जैसे तंबाकू) जारी रहें तो पुनः हो सकता है। मगर समय रहते हैं इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।