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एसजीपीटी का लेवल कम कैसे करें ?

एसजीपीटी का लेवल लीवर डैमेज का संकेत होता है। जो लोग अस्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं। अधिक शराब का सेवन करते हैं। उनमें लीवर संबंधी समस्याएं अधिक होती हैं। ऐसे मामलों में सही टेस्ट और इलाज कराना बेहद जरूरी होता है। Fatty liver SGPT treatment in Noida में उपलब्ध है। अगर आपको अपने लीवर हेल्थ को लेकर कोई चिंता है। तो अभी फेलिक्स हॉस्पिटल से संपर्क करें और हमारे गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों से परामर्श लें।

 

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एसजीपीटी टेस्ट क्या है ? (What is SGPT Test in Hindi)

एसजीपीटी (सीरम ग्लूटामेट पाइरूवेट ट्रांसएमिनेस) जिसे एएलटी (एलानिन एमिनोट्रांस्फरेज) भी कहते हैं। एक महत्वपूर्ण एंजाइम है जो मुख्य रूप से लीवर में पाया जाता है। शरीर के ऊर्जा उत्पादन और मेटाबोलिज्म की प्रक्रियाओं में सहायक भूमिका निभाता है। यह एंजाइम प्रोटीन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया में हिस्सा लेता है। सामान्य परिस्थितियों में खून में इसकी मात्रा बहुत कम होती है। जब लीवर को किसी प्रकार का नुकसान होता है। जैसे हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, शराब का अधिक सेवन, दवाओं के दुष्प्रभाव या किसी अन्य कारण से लीवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं। तो यह एंजाइम खून में रिसता है। इसकी मात्रा बढ़ती है। 

 

एसजीपीटी की जांच लीवर की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य की स्थिति समझने के लिए कराई जाती है। चिकित्सक रोगी की जांच रिपोर्ट में एसजीपीटी का स्तर देखकर लीवर से संबंधित संभावित समस्या का अनुमान लगाते हैं। सामान्यतः एसजीपीटी का स्तर 7 से 56 यूनिट प्रति लीटर खून के बीच होना चाहिए। अगर इसका स्तर इस सीमा से अधिक है, तो यह लीवर में किसी तरह की गड़बड़ी का संकेत है ।

 

एसजीपीटी बढ़ने के कारण (Causes of High SGPT Level in Hindi)


हेपेटाइटिसः

यह एक वायरल संक्रमण है जो लीवर में सूजन पैदा करता है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी जैसे वायरस लीवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर एसजीपीटी का स्तर बढ़ाते हैं। समय रहते इलाज न करने पर यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

 

अत्यधिक शराब का सेवनः

लंबे समय तक शराब पीने से लीवर पर ज्यादा दबाव पड़ता है। इससे लीवर की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं। धीरे-धीरे सिरोसिस या लिवर फेलियर तक की स्थिति आती है।


मोटापा और फैटी लिवरः

अधिक वजन या असंतुलित आहार लेने से लीवर में वसा जमा होता है। इसे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ कहते है। जो एसजीपीटी स्तर को बढ़ाने का कारण है।


दवाइयों का असरः

कुछ दवाएं जैसे पेन किलर्स, एंटीबायोटिक्स , स्टैटिन  औरर एंटी-टीबी ड्रग्स लीवर पर असर डालती है। लंबे समय तक इनका सेवन लीवर एंजाइम्स को बढ़ाता है।


डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल

डायबिटीज रोगियों में मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाने से लीवर पर दबाव बढ़ता है। हाई कोलेस्ट्रॉल होने पर भी लीवर में फैट जमा होता है, जिससे एसजीपीटी बढ़ता है।


हार्ट अटैक या मांसपेशियों की क्षतिः

केवल लीवर ही नहीं, बल्कि हार्ट या मांसपेशियों में चोट या क्षति होने पर भी एसजीपीटी स्तर में वृद्धि देखती है। यह स्थिति डॉक्टर को रोगी की समग्र जांच करने का संकेत देती है।


एसजीपीटी बढ़ने के लक्षण (Symptoms of High SGPT in Hindi)


थकान और कमजोरीः

लीवर के सही से काम न करने पर शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती है। इससे व्यक्ति को सामान्य काम करने में भी थकान महसूस होती है और मांसपेशियां कमजोर लगती हैं।


उल्टी और मतलीः

एसजीपीटी लेवल बढ़ने पर पाचन तंत्र प्रभावित होता है। अक्सर मरीज को बार-बार उल्टी आने, पेट भारी लगने और भूख कम होने की समस्या होती है।


पीलियाः

लीवर की कार्यक्षमता बिगड़ने पर बिलीरुबिन शरीर में जमा होता है। इससे त्वचा और आंखों की सफेदी पीली हो जाती है, जो लीवर रोग का संकेत है।


पैरों और पेट में सूजनः

लीवर की बीमारी बढ़ने पर शरीर में तरल (Fluid) जमा होता है। सबसे पहले पैरों और टखनों में सूजन आती है। धीरे-धीरे पेट फूलता है।


सांस लेने में तकलीफः

पेट में पानी भरने या लीवर की कमजोरी की वजह से फेफड़ों पर दबाव पड़ता है। इससे रोगी को ठीक से सांस लेने में परेशानी होती है।


बार-बार चोट लगना और रक्तस्राव-

लीवर खून जमाने वाले प्रोटीन बनाता है। लीवर खराब होने पर यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे हल्की चोट पर भी ज्यादा खून बहने लगता है।


वजन घटनाः

लगातार भूख न लगना, उल्टी-मतली और पाचन खराब होने से शरीर कमजोर होता है। धीरे-धीरे वजन तेजी से कम होने लगता है, जो गंभीर लीवर रोग का संकेत होता है।

 

एसजीपीटी का लेवल कम कैसे करें ? (How to Reduce SGPT Level in Hindi)

 

शराब और धूम्रपान छोड़ेंः

लंबे समय तक शराब पीने से लीवर की कोशिकाएं नष्ट होती हैं। सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी होती है। धूम्रपान से शरीर में हानिकारक टॉक्सिन्स बढ़ते हैं। जिससे लीवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। पूरी तरह नशा छोड़ना लीवर को स्वस्थ रखने की सबसे पहली और जरूरी शर्त है।


फैटी फूड्स से बचेंः

ज्यादा तले-भुने, ऑयली और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, पैकेज्ड स्नैक्स और सोडा ड्रिंक्स लीवर में वसा जमाने का काम करते हैं। इसके स्थान पर हल्का, संतुलित और पौष्टिक आहार लें।


हेल्दी डाइट लेंः

अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल (जैसे सेब, संतरा, पपीता), होल ग्रेन्स, दालें और ओट्स शामिल करना चाहिए। विटामिन डी से भरपूर चीजें (जैसे दूध, अंडा, मशरूम) खाएं और सुबह की धूप लेना चाहिए। एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन लीवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।


हाइड्रेटेड रहेंः

शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। दिनभर कम से कम 8–10 गिलास पानी पिएं। नारियल पानी, नींबू पानी और हर्बल टी भी लीवर को हेल्दी बनाए रखते हैं।


एक्सरसाइज करेंः

रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या हल्की कसरत करें। एक्सरसाइज से शरीर का ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है। फैटी लिवर की समस्या कम होती है। नियमित व्यायाम से शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और इम्युनिटी भी मजबूत होती है।


वजन कंट्रोल करेंः

मोटापा लीवर में वसा जमाने का सबसे बड़ा कारण है, जिससे एसजीपीटी लेवल तेजी से बढ़ता है। संतुलित डाइट, इंटरमिटेंट फास्टिंग और नियमित व्यायाम से वजन घटाकर लिवर की सेहत सुधारी जाती है। स्वस्थ वजन बनाए रखना लिवर को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है।


दवाइयों का सेवन डॉक्टर की सलाह से करेंः


बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक पेन किलर्स, एंटीबायोटिक्स या स्टैटिन जैसी दवाओं का सेवन न करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा बताए गए एंटीवायरल दवाएं, हेपेटाइटिस ट्रीटमेंट या अन्य थेरेपी लें। कभी भी सेल्फ-मेडिकेशन न करें, क्योंकि यह लीवर को और ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।


एसजीपीटी लेवल कम करने के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट (Medical Treatment)

 

लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) से नियमित जांचः

लिवर की स्थिति को समझने और एसजीपीटी सहित अन्य एंजाइम्स की मात्रा को मॉनिटर करने के लिए नियमित ब्लड टेस्ट जरूरी है। एलएफटी  से लीवर की कार्यक्षमता, सूजन, बिलीरुबिन स्तर और प्रोटीन निर्माण की क्षमता का पता चलता है। Gastroenterologist in Noida में उपलब्ध है।  डॉक्टर के निर्देशानुसार समय-समय पर टेस्ट कराते रहने से बीमारी का जल्दी पता चलता है और सही इलाज शुरू किया जा सकता है।


जरुरत होने पर लिवर बायोप्सीः

जब ब्लड टेस्ट और अन्य जांचों से पर्याप्त जानकारी न मिले, तो लिवर बायोप्सी होती है। इसमें लीवर की छोटी सी टिश्यू सैंपल लेकर माइक्रोस्कोप से जांच होती है। यह फैटी लिवर, सिरोसिस, हेपेटाइटिस या किसी ट्यूमर जैसी गंभीर स्थितियों का सही निदान करने में मदद करता है।


गंभीर मामलों में लिवर ट्रांसप्लांटः

अगर लीवर की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है। अन्य इलाज असर नहीं कर रहे, तो लिवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम उपाय होता है। इसमें रोगी का खराब लीवर निकालकर स्वस्थ डोनर का लीवर प्रत्यारोपित किया जाता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन समय पर की जाने वाली ट्रांसप्लांट से मरीज की जान बचाई जा सकती है और जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है।

 

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निष्कर्ष (Conclusion)


एसजीपीटी का बढ़ा हुआ स्तर सिर्फ लीवर की बीमारियों का संकेत नहीं है। बल्कि यह कई अन्य जटिलताओं की ओर भी इशारा करता है। सही समय पर टेस्ट, स्वस्थ जीवनशैली, सही डाइट और मेडिकल ट्रीटमेंट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। अगर आपका एसजीपीटी लेवल बढ़ा हुआ है, तो लापरवाही न करें। इलाज में देरी नुकसानदेह होती है। इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत ही डॉक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर देना चाहिए। 


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ on SGPT in Hindi)


प्रश्न 1- क्या सिर्फ लीवर डैमेज से ही एसजीपीटी बढ़ता है ?

उत्तरः नहीं, मांसपेशियों की चोट, हार्ट अटैक और कुछ दवाइयों से भी एसजीपीटी बढ़ता है।  इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत ही डॉक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर देना चाहिए। 


प्रश्न 2- एसजीपीटी का नॉर्मल स्तर कितना होता है ?

उत्तरः 7 से 56 यूनिट/लीटर ब्लड के बीच।  अगर लेवल आसामान्य  है तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह पर उपचार शुरू कर देना चाहिए। 


प्रश्न 3- क्या फैटी लिवर में एसजीपीटी बढ़ सकता है ?

उत्तरः हां, फैटी लिवर एसजीपीटी लेवल बढ़ाने का प्रमुख कारण है।  इसलिए लक्षण दिखने पर तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लें। 


प्रश्न 4- क्या डाइट से एसजीपीटी लेवल कम हो सकता है ?

उत्तरः हां, हेल्दी डाइट, पानी, विटामिन डी और फैटी फूड्स से परहेज करके इसे कंट्रोल किया जा सकता है। शराब और धूम्रपान के सेवन से दूर रहना चाहिए। 


प्रश्न 5- एसजीपीटी टेस्ट कब कराना चाहिए ?

उत्तरः अगर आपको थकान, पीलिया, पेट दर्द, या अल्कोहल का सेवन करने की आदत है तो डॉक्टर टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं।  इलाज में देरी नुकसानदायक होती है।