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फैरिंजाइटिस (गले में दर्द) क्या है, इसके लक्षण और उपचार

फैरिंजाइटिस (Pharyngitis) यानी गले में सूजन या संक्रमण सर्दी-जुकाम और मौसम के बदलाव से होने वाली समस्या है। यह गले में दर्द, खराश, निगलने में कठिनाई और आवाज बैठने जैसी परेशानियां पैदा करता है। यह संक्रमण वायरस या बैक्टीरिया से होता है। अक्सर बच्चों व युवाओं में अधिक दिखता है। अगर गले में लगातार दर्द, जलन या सूजन बनी रहे, तो यह साधारण इंफेक्शन नहीं बल्कि फैरिंजाइटिस का संकेत है। Pharyngitis Treatment in Noida में उपलब्ध है। अगर लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो नोएडा के किसी अनुभवी ईएनटी डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें।

 

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फैरिंजाइटिस क्या है? (What is Pharyngitis)

फैरिंजाइटिस गले के पिछले हिस्से फैरिंक्स (Pharynx) की सूजन को कहते हैं। यह सूजन वायरस, बैक्टीरिया या एलर्जिक प्रतिक्रियाओं से होती है। अगर संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाए, तो उसे एक्यूट फैरिंजाइटिस कहते हैं। जबकि लक्षण कई सप्ताह या बार-बार लौटते रहें, तो यह क्रॉनिक फैरिंजाइटिस (Chronic pharyngitis) कहलाता है। आमतौर पर यह सर्दी-जुकाम, प्रदूषण या बैक्टीरियल संक्रमण (जैसे स्ट्रेप्टोकोकस पायोजेनेस) से होता है। बच्चों और कमजोर इम्यून सिस्टम (Weak immune system) वाले लोगों में यह जल्दी फैलता है।

 

फैरिंजाइटिस के लक्षण (Symptoms of Pharyngitis)


गले में दर्द और खराश: (Gale Mein Dard Aur Kharash in hindi)

निगलने में दर्द या जलन, विशेषकर ठोस भोजन या गर्म/ठंडी चीजें खाने पर। गला सूखा और खुरदरा महसूस होना। कभी-कभी गले में खराश (sore throat) इतनी बढ़ती है कि बोलने में भी तकलीफ होती है।


आवाज में भारीपन या बैठना: (Awaaz Mein BhariPan Ya Baithna in Hindi)

वोकल कॉर्ड में सूजन या जलन के कारण आवाज धीमी, कर्कश या फीकी होती है। लगातार खांसी या गले में संक्रमण की वजह से लंबी अवधि तक आवाज में बदलाव होता है। बच्चों या पेशेवर गायकों में आवाज का जल्दी थकना आम है।


बुखार और थकान: (Bukhar aur Thakan in Hindi)

हल्का से तेज बुखार, शरीर में दर्द, और थकान महसूस होना। संक्रमण के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता सक्रिय हो जाती है, जिससे सामान्य कमजोरी और सुस्ती बनी रहती है। कभी-कभी सिरदर्द और पसीना भी साथ में होता है।



खांसी या गले में कफ जमा होना: (Khansi ya gale mein kaf jamna hona in Hindi)

पोस्ट-नज़ल ड्रिप के कारण गले में म्यूकस (कफ) जमा होना। गले में जलन और बार-बार गले को साफ करने की आवश्यकता महसूस होना। रात में खांसी बढ़ सकती है, जिससे नींद प्रभावित होती है।


गले में सूजन या लालिमा: (Gale mein soojan ya laalima in Hindi)

डॉक्टर के निरीक्षण में गले की दीवारें लाल और सूजी हुई दिखती हैं। टॉन्सिल्स (tonsils) बढ़े हुए या सफेद/पीले धब्बे दिखते हैं। कभी-कभी गर्दन में लिम्फ नोड्स (गांठ) सूजते हैं।


निगलने में कठिनाई: (Nigalne mein kathinai in Hindi)

भोजन या पानी निगलते समय दर्द या जलन महसूस होना। ठोस भोजन निगलना कठिन हो सकता है। गंभीर मामलों में थूक निगलने में भी परेशानी होती है। लंबे समय तक होने पर वजन में कमी और भोजन की इच्छा कम होना आम है।

 

Chronic pharyngitis


फैरिंजाइटिस के कारण (Causes of Pharyngitis)


वायरल संक्रमण:

लगभग 70–80% गले की सूजन के मामले वायरस के कारण होते हैं। आम वायरस में राइनोवायरस, इन्फ्लुएंजा, एडेनोवायरस और कोरोनावायरस शामिल हैं। वायरल संक्रमण में अक्सर हल्का बुखार, खांसी, नाक बहना, गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह आमतौर पर स्वयं ही ठीक हो जाता है, लेकिन पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेने की सलाह होती है।


बैक्टीरियल संक्रमण (Bacterial Infection):

प्रमुख कारण स्टेप्टोकोकस बैक्टीरिया है। बिना समय पर इलाज के यह टॉन्सिलाइटिस, रुमेटिक फीवर या किडनी की समस्या भी पैदा करता है। लक्षणों में तेज बुखार, गले में बहुत दर्द, सफेद या पीले धब्बे, और लिम्फ नोड्स की सूजन शामिल होती है। डॉक्टर द्वारा एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता होती है।


एलर्जी या प्रदूषण:

धूल, धुआं, परागकण, रासायनिक धुएँ और अन्य एलर्जन गले की झिल्ली को सूजाते और जलन पैदा करते हैं। इससे अक्सर खराश, कफ, बार-बार गले साफ करने की इच्छा होती है। एलर्जी के कारण होने वाले गले के संक्रमण में सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण नहीं हमेशा दिखाई देते।


धूम्रपान और शराब सेवन:

तंबाकू, सिगरेट और शराब गले की लाइनिंग को लगातार उत्तेजित और नुकसान पहुंचाते हैं। इससे गले में क्रॉनिक फैरिंजाइटिस, खांसी, आवाज का बदलाव और जलन जैसी समस्या होती है। लंबे समय तक सेवन से गले के कैंसर का जोखिम भी बढ़ता है।

 

सूखी हवा या मुंह से सांस लेनाः

सर्दियों या एयरकंडीशंड कमरे में हवा बहुत सूखी होती है। सूखी हवा गले की स्लाइम मेम्ब्रेन को सूखा देती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। मुंह से लगातार सांस लेने पर गला और वोकल कॉर्ड्स पर अधिक दबाव और जलन होती है।


कमजोर इम्यून सिस्टम:

थकान, तनाव, नींद की कमी और पोषण की कमी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटाती है। कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण साधारण वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण भी जल्दी फैलता है। जीवनशैली सुधारने, पर्याप्त नींद और पौष्टिक आहार से इम्यूनिटी मजबूत की जाती है।

 

फैरिंजाइटिस की जांच (Diagnosis of Pharyngitis)


क्लिनिकल जांचः
ईएनटी डॉक्टर गले, टॉन्सिल्स, यूवुला और गले की दीवारों का निरीक्षण करते हैं। गले की लालिमा, सूजन, म्यूकस या सफेद/पीले धब्बों की स्थिति दिखती है। Pharyngitis Treatment Hospital in noida  में उपलब्ध है। डॉक्टर गले की नाजुकता और दर्द की तीव्रता को भी महसूस करके लक्षणों का मूल्यांकन करते हैं। कभी-कभी गले और गर्दन के लिम्फ नोड्स की सूजन की जांच भी की जाती है।


थ्रोट स्वाब टेस्ट:
गले से स्वाब लेकर लैब में जांच की जाती है। यह पता लगाया जाता है कि संक्रमण वायरल है या बैक्टीरियल। बैक्टीरियल संक्रमण होने पर सटीक एंटीबायोटिक निर्धारित किया जा सकता है। टेस्ट में स्टेप्टोकोकस जैसे बैक्टीरिया की पहचान की जाती है।


ब्लड टेस्ट (Blood Test):
गंभीर, लगातार या लंबे समय तक रहने वाले संक्रमण में किया जाता है। सीबीसी (पूर्ण रक्त गणना) से शरीर में संक्रमण और सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या (white blood cell count) का पता चलता है। ईएसआर (एरिथ्रोसाइट अवसादन दर) या सीआरपी से शरीर में सूजन का स्तर मापा जाता है। यह जांच विशेषकर तब जरूरी होती है जब डॉक्टर को सिस्टमिक संक्रमण या जटिलता का खतरा लगे।


एलर्जी टेस्ट (Allergy Test):
बार-बार गले में जलन, खांसी या म्यूकस जमा होने पर किया जाता है। धूल, परागकण, धुआँ, या रासायनिक पदार्थों के कारण एलर्जी की संभावना की पुष्टि की जाती है। त्वचा या ब्लड टेस्ट द्वारा एलर्जन की पहचान की जाती है। एलर्जी का पता लगने पर उपचार और बचाव उपाय निर्धारित किए जाते हैं।

 

फैरिंजाइटिस का इलाज (Treatment as per ENT Guidelines)


दवाइयां:

 

वायरल फैरिंजाइटिस:
आमतौर पर आराम, पर्याप्त हाइड्रेशन और भाप लेने से 5–7 दिनों में ठीक हो है। घर पर गर्म तरल पदार्थ, सूप, शहद और हर्बल चाय मदद करते हैं।


बैक्टीरियल फैरिंजाइटिस:
डॉक्टर एंटीबायोटिक्स (जैसे एमोक्सिसिलिन, अजिथ्रोमाइसिन) निर्धारित करते हैं। पूरी कोर्स लेना जरूरी है ताकि संक्रमण पूरी तरह खत्म हो और जटिलताएं न हों।


दर्द और बुखार:
पैरासिटामोल या आइबुप्रोफेन से गले का दर्द और बुखार कम होता है। दर्द कम होने से भोजन निगलने में आसानी होती है।


गरारे और भापः
गर्म नमक वाले पानी से दिन में 2–3 बार गरारे करने से गले की सूजन और जलन कम होती है। भाप लेने से गले की सूखापन, जलन और म्यूकस जमा होना कम होता है। बच्चों के लिए हल्की भाप या स्टीम इनहेलेशन सुरक्षित तरीका है।


सलाइन गार्गल / स्प्रे:
सलाइन गार्गल गले को नम रखता है और संक्रमण के अंशों को साफ करता है। एंटीसेप्टिक या माइल्ड माउथस्प्रे भी अस्थायी राहत देते हैं। दिन में 2–4 बार उपयोग करना लाभदायक होता है।


एलर्जी मैनेजमेंट:
यदि फैरिंजाइटिस एलर्जी के कारण है तो एंटीहिस्टामिन या एंटीएलर्जिक स्प्रे उपयोगी हैं। एलर्जी से होने वाली खराश, खांसी और म्यूकस जमा होना कम करने में मदद करता है। घर में धूल और परागकण कम करने के उपाय भी जरूरी हैं।


क्रॉनिक मामलों मेंः
लंबे समय तक संक्रमण या बार-बार होने पर ईएनटी डॉक्टर एंडोस्कोपिक जांच (Endoscopy investigation) करते हैं। इससे संरचनात्मक समस्याएं जैसे टॉन्सिल हाइपरट्रॉफी, रिफ्लक्स या पोलिप्स की पहचान होती है। कभी-कभी सर्जिकल उपचार (जैसे टॉन्सिलेक्टॉमी) की सलाह दी जाती है।


फैरिंजाइटिस से बचाव के उपाय (Prevention & Home Care)


धूल, धुआं और ठंडी हवा से बचें:
धूल, परागकण, प्रदूषण और रासायनिक धुएं गले की झिल्ली को जलन और सूजन देते हैं। घर में हवा फिल्टर या एयर प्यूरीफायर का उपयोग लाभदायक होता है। सर्दियों या ठंडी हवा में सर्विंग स्कार्फ या मफलर से गले को ढकें।


गर्म पानी से गरारे करें और पर्याप्त पानी पिएं:
दिन में 2–3 बार गर्म नमक वाले पानी से गरारे करने से गले की सूजन और म्यूकस जमा कम होता है। पर्याप्त तरल पदार्थ (पानी, सूप, हर्बल चाय) लेने से गले की नमी बनी रहती है और संक्रमण का खतरा कम होता है।


भीड़भाड़ वाले स्थानों में मास्क पहनें:
भीड़ वाले स्थानों में मास्क पहनने से वायरल और बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव होता है। सार्वजनिक परिवहन, अस्पताल या बाजार में मास्क उपयोगी है।


धूम्रपान और सेकेंड हैंड स्मोक से दूरी बनाएं:
तंबाकू और धूम्रपान गले की लाइनिंग को नुकसान पहुंचाते हैं। सेकेंड हैंड स्मोक (पास-पड़ोस या ऑफिस में धूम्रपान) भी गले में जलन और खांसी बढ़ाता है।


ठंडे पेय, बर्फीली चीजें और तले-भुने खाद्य पदार्थों से परहेज करें:
अत्यधिक ठंडी या मसालेदार चीजें गले की झिल्ली को उत्तेजित करती हैं। तले-भुने और भारी खाद्य पदार्थ गले में जलन और भारीपन पैदा करते हैं।


नींद पूरी लें और तनाव कम रखें:
पर्याप्त नींद और आराम से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है। तनाव और थकान इम्यून सिस्टम कमजोर करते हैं, जिससे संक्रमण जल्दी फैलता है। नियमित योग, मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज इम्यूनिटी बढ़ाने में मददगार हैं।


अन्य सावधानियां:
हाथों को नियमित धोएं, खासकर भोजन से पहले। निजी सामान जैसे गिलास, तौलिया, और बर्तन साझा न करें। गले में जलन या खराश शुरू होते ही अत्यधिक बोलने या चिल्लाने से बचें।


निष्कर्ष (Conclusion)

फैरिंजाइटिस साधारण सर्दी-जुकाम से शुरू होकर गंभीर गले के संक्रमण में बदलता है। गले में लगातार दर्द, खराश या निगलने में कठिनाई को नजरअंदाज न करें। ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेकर समय पर इलाज करें। सही दवा, आराम और घरेलू देखभाल से यह समस्या पूरी तरह ठीक होती है। इलाज में देरी लापरवाही साबित हो सकती है।

 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


प्रश्न 1: क्या फैरिंजाइटिस अपने आप ठीक होता है?
उत्तर: वायरल मामलों में 5–7 दिन में आराम मिलता है। लेकिन बैक्टीरियल संक्रमण में एंटीबायोटिक जरूरी है।


प्रश्न 2: फैरिंजाइटिस और टॉन्सिलाइटिस में क्या अंतर है?
उत्तर: फैरिंजाइटिस गले की पीछे की झिल्ली की सूजन है। जबकि टॉन्सिलाइटिस टॉन्सिल्स का संक्रमण होता है।


प्रश्न 3: क्या फैरिंजाइटिस बार-बार हो सकता है?
उत्तर: हां, एलर्जी, धूल या कमजोर इम्यूनिटी होने पर यह दोबारा हो सकता है। इसलिए इलाज जरूरी होती है। 


प्रश्न 4: क्या बच्चों में फैरिंजाइटिस गंभीर होता है?
उत्तर: बच्चों में यह सामान्य है। लेकिन लगातार बुखार या दर्द होने पर तुरंत ईएनटी डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।


प्रश्न 5: क्या गरारे करने से फैरिंजाइटिस में आराम मिलता है?
उत्तर: हां, गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करने से गले की सूजन और दर्द में तुरंत राहत मिलती है। इसलिए गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए।