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फंगल इन्फेक्शन पुरुषों में एक स्वास्थ्य समस्या है। जिसे मेडिकल भाषा में डर्माटोफाइटोसिस या टिनिया इंफेक्शन (Tinea infection) भी कहते हैं। यह मुख्य रूप से त्वचा, नाखून और जननांग में होता है। गर्मी, पसीना, गंदगी और कमजोर इम्यूनिटी इसकी प्रमुख वजहें हैं। समय पर इलाज न होने पर यह तेजी से फैलता है। यह लगातार खुजली, जलन, बदबू और त्वचा पर दाने जैसी समस्या करता है। फंगल इन्फेक्शन का इलाज नोएडा में उपलब्ध है।
अगर आप फंगल इन्फेक्शन की जांच या इलाज के लिए भरोसेमंद चिकित्सा सुविधा की तलाश कर रहे हैं, तो नोएडा में अनुभवी इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट और अत्याधुनिक तकनीक वाले अस्पताल का चयन करना बेहद जरूरी है।
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पुरुषों में फंगल खासकर जांघों, कमर, पैरों की उंगलियों, बगल और प्राइवेट पार्ट्स के पास देखने को मिलता है। यह संक्रमण आमतौर पर उन्हीं जगहों पर फैलता है, जहां त्वचा पर ज्यादा नमी और गर्माहट रहती है। पसीने से तर रहने, लंबे समय तक गीले कपड़ों को न बदलने, तंग कपड़े पहनने या व्यक्तिगत साफ-सफाई की कमी होने पर यह तेजी से फैल सकता है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह बड़े हिस्से में फैलता है। फफोले, छाले या त्वचा के छिलने जैसी दिक्कतें भी पैदा कर सकता है। अगर संक्रमण बार-बार होता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करें।
शरीर के हिस्सों जैसे जांघ, बगल, कमर और पैरों की उंगलियों में लंबे समय तक नमी रहने से फंगस पनपता है। पसीना सुखाए बिना कपड़े पहनने से यह तेजी से फैलता है।
देर तक नहीं नहाना, गंदे या गीले कपड़े पहनना और रोजाना अंडरगारमेंट्स न बदलना फंगल इंफेक्शन का कारण बनता है। यह आदत फंगस के लिए अनुकूल वातावरण देती हैं।
बहुत टाइट या नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़े पहनने से त्वचा तक हवा नहीं पहुंचती। नतीजा यह होता है कि नमी बनी रहती है। फंगस बहुत तेजी से पनपता है।
जिन लोगों को डायबिटीज (Diabetes), एनीमिया (Anemia), एचआईवी या लंबे समय तक अन्य बीमारियां होती हैं। उनमें प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। ऐसे लोगों में फंगल इंफेक्शन जल्दी होता है। बार-बार होता है।
तौलिया, रेजर, कपड़े, जूते या बिस्तर किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ साझा करने से संक्रमण सीधा फैलता है। यह सबसे आम कारणों में से एक है।
स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक दवाओं का ज्यादा प्रयोग शरीर के नेचुरल बैक्टीरिया और फंगस के बैलेंस को बिगाड़ता है। इससे फंगस को बढ़ने का मौका मिलता है।
प्रभावित हिस्से पर लगातार खुजली होती है। कभी-कभी खुजलाने पर लालपन और जलन बढ़ती है। जिससे नींद और रोजमर्रा की गतिविधियों पर असर पड़ता है।
संक्रमण वाले क्षेत्र में गोलाकार या आधे चांद जैसे उभरे हुए लाल चकत्ते बनते हैं। इनके किनारे ज्यादा लाल और बीच का हिस्सा हल्का दिखता है।
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है। त्वचा पर सफेद या हल्की भूरी पपड़ी बनती है। प्रभावित जगह से बदबू आती है। त्वचा छिलने लगती है। जिससे जलन और असहजता बढ़ती है।
इस हिस्से में बार-बार खुजली और जलन होती है। जिसे जॉक इच कहते हैं। गर्म और पसीने वाली जगह होने के कारण यह संक्रमण यहां तेजी से फैलता है। लंबे समय तक बना रहता है।
जब फंगस नाखूनों तक पहुंचता है तो वह मोटे, भुरभुरे और कमजोर होते हैं। नाखूनों का रंग सफेद, पीला या भूरा पड़ता है। धीरे-धीरे उनका आकार बिगड़ता है।
रोजाना नहाएंः
खासकर जांघ, बगल और गुप्तांग क्षेत्र को धोकर अच्छे से सुखाएं। नमी फंगस का बड़ा कारण है। इसलिए स्नान के बाद टैल्कम या एंटीफंगल पाउडर का प्रयोग करें।
ढीले कपड़े पहनेंः
कॉटन के कपड़े पसीना सोखते हैं। त्वचा को सांस लेने का मौका देते हैं। बहुत टाइट या सिंथेटिक कपड़ों से बचना चाहिए। इनमें नमी और गर्मी बनी रहती है।
व्यक्तिगत सामान साझा न करेंः
तौलिया, अंडरगार्मेंट्स (Undergarments), रेजर, मोजे या बिस्तर किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। संक्रमित व्यक्ति से संपर्क फंगल इंफेक्शन तेजी से फैलता है।
खुजली पर नाखून न चलाएंः
खुजलाने से संक्रमण और गहरा होता है। शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैलता है। खुजली होने पर डॉक्टर द्वारा सुझाई गई एंटीफंगल क्रीम या लोशन लगाएं।
दवा पूरी करें, बीच में न छोड़ेंः
अक्सर लोग आराम मिलने पर दवा लेना छोड़ देते हैं। ऐसा करने से फंगस दोबारा सक्रिय होता है। पूरा कोर्स करना जरूरी है। जिससे संक्रमण जड़ से खत्म हो जाएं।
खानपान पर नियंत्रण रखेंः
बहुत मीठा और तैलीय भोजन फंगस की ग्रोथ को तेज करता है। संतुलित आहार लें। हरी सब्जियां और विटामिन-सी युक्त फल शामिल करें। जिससे इम्यूनिटी मजबूत रहे।
अगर खुजली और जलन बहुत ज्यादा हो।
संक्रमण लगातार फैल रहा हो।
बार-बार फंगल इन्फेक्शन हो रहा हो।
नाखून, सिर या जननांग क्षेत्र में संक्रमण गंभीर हो।
दवाओं से राहत न मिल रही हो।
टॉपिकल एंटीफंगल क्रीम/लोशनः
हल्के संक्रमण पर डॉक्टर क्लोट्रिजोलमे, टेरबिनाफाइन, केटोकोनाजोल क्रीम या लोशन लिखते हैं। पुरुषों के लिए बेस्ट डॉक्टर फंगल इन्फेक्शन नोएडा में उपलब्ध है। इन्हें प्रभावित हिस्से पर नियमित रूप से लगाने से इंफेक्शन खत्म होता है।
ओरल एंटीफंगल दवाएंः
गंभीर संक्रमण पर डॉक्टर में इट्राकोनाजोल, फ्लुकोनाजोल जैसी टैबलेट्स देते हैं। ये दवाएं शरीर के अंदर से फंगस को खत्म करती हैं।
एंटीहिस्टामिन दवाएंः
खुजली और एलर्जी कम करने के लिए सेटीरिजिन या लेवोसेटिरिजिन जैसी दवाएं दी जाती हैं। इससे मरीज को राहत मिलती है।
डायबिटीज और इम्यूनिटी की जांचः
जिन मरीजों को बार-बार फंगल इंफेक्शन होता है। उन्हें ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन और इम्यून सिस्टम की जांच करानी चाहिए। कमजोर इम्यूनिटी में समस्या बढ़ाती है।
लंबे कोर्स की गाइडलाइनः
फंगल इंफेक्शन में डॉक्टर अक्सर 2–6 हफ्ते का इलाज देते हैं। दवा अधूरी छोड़ने से संक्रमण वापस लौटता है। इसलिए पूरा कोर्स करें।
सही निदान के लिए ब्लड टेस्ट और स्किन स्क्रैपिंग टेस्ट (त्वचा से सैंपल लेकर जांच) होती है।
हल्के मामलों में केवल क्रीम, एंटीफंगल पाउडर और व्यक्तिगत स्वच्छता से आराम मिलता है।
गंभीर संक्रमण में ओरल मेडिकेशन और लंबे समय तक दवा जरूरी है।
हर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और मौजूदा स्थिति देखकर डॉक्टर उचित दवा देते हैं।
दवा पूरी करेंः
लक्षण कम होने पर भी दवा बीच में नहीं छोड़ें। वरना इंफेक्शन फिर से हो जाता है।
स्वच्छता का ध्यान रखेंः
अंडरगार्मेंट्स रोजाना बदलें। हमेशा धूप में सुखाएं। जिससे बैक्टीरिया व फंगस नष्ट हो जाएं।
त्वचा को सूखा रखेंः
नहाने के बाद नमी न रहने दें। एंटीफंगल पाउडर का प्रयोग करना फायदेमंद है।
नियमित फॉलोअपः
अगर संक्रमण बार-बार है तो इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ से नियमित जांच कराएं।
पुरुषों में फंगल इंफेक्शन परेशान करने वाली समस्या है। यह संक्रमण जानलेवा तो नहीं होता, लेकिन बार-बार होने पर जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। गर्म और उमस भरे मौसम, लंबे समय तक पसीने में रहने, तंग कपड़े पहनने या व्यक्तिगत साफ-सफाई की कमी से यह समस्या बढ़ती है। इसलिए फंगल इंफेक्शन को गंभीरता से लेना चाहिए। हल्के मामलों में एंटीफंगल क्रीम, पाउडर और व्यक्तिगत स्वच्छता से आराम मिलता है, जबकि गंभीर या बार-बार होने वाले मामलों में इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ओरल एंटीफंगल दवाएं लेनी चाहिए।
नोएडा में फंगल इंफेक्शन के इलाज और इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ से परामर्श के लिए कॉल करें: +91 9667064100.
प्रश्न 1: क्या फंगल इन्फेक्शन खुद ठीक होता है?
उत्तर: हल्के मामलों में थोड़ी राहत मिलती है। लेकिन दवा के बिना यह पूरी तरह ठीक नहीं होता। इसलिए डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
प्रश्न 2: क्या यह यौन संबंध से फैलता है?
उत्तर: हां, अगर जननांग क्षेत्र प्रभावित हो तो यह पार्टनर तक पहुंचता है। इसलिए संक्रमण होने पर यौन संपर्क बनाने के दौरान सावधानी जरूरी है।
प्रश्न 3: क्या घरेलू उपाय कारगर हैं?
उत्तर: स्वच्छता, नीम का पानी, नारियल तेल कुछ हद तक आराम देते हैं। लेकिन यह मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं हैं। डॉक्टर की सलाह लेकर ही खानपान के साथ इलाज कराना चाहिए।
प्रश्न 4: कितने समय में ठीक होता है?
उत्तर: हल्के मामलों में 2–4 हफ्ते और गंभीर मामलों में 6–8 हफ्ते या उससे ज्यादा समय लग सकता है। संक्रमम ठीक नहीं होने पर डॉक्टर से सपर्क करें।
प्रश्न 5: क्या यह बार-बार हो सकता है?
उत्तर: हां, अगर दवा अधूरी छोड़ दी जाए या साफ-सफाई न रखी जाए तो दोबारा होने की संभावना रहती है। इसलिए लक्षण दिखने पर सावधान हो जाए।