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हरपीज (Herpes) त्वचा और श्लैष्मिक झिल्ली (Mucous Membrane) को प्रभावित करने वाला एक संक्रामक वायरल संक्रमण है। यह हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) के कारण होता है। हरपीज आमतौर पर होंठों (कोल्ड सोर), मुंह के आसपास, जननांगों और त्वचा पर छोटे-छोटे छाले या घाव के रूप में दिखाई देता है। यह संक्रमण बार-बार होता है। क्योंकि वायरस शरीर में निष्क्रिय अवस्था में रहकर समय-समय पर सक्रिय होता है। इसलिए सही जानकारी और समय पर इलाज जरूरी है। हरपीज का इलाज नोएडा (Herpes Treatment Noida) में उपलब्ध है।
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हरपीज एक आम लेकिन गंभीर वायरल संक्रमण है, जो हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस (एचएसवी) के कारण होता है। यह वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद सीधे हमारी नसों (तंत्रिका कोशिकाएं) में छिपता है और लंबे समय तक निष्क्रिय अवस्था में रहता है। लेकिन जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। तो यह दोबारा सक्रिय होकर संक्रमण पैदा करता है। यही कारण है कि हरपीज बार-बार उभरने वाली बीमारी मानी जाती है। हरपीज से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति से नजदीकी संपर्क से बचना, सुरक्षित यौन संबंध बनाना और अपनी व्यक्तिगत वस्तुओं (जैसे रेजर, तौलिया, लिप बाम) को साझा न करना सबसे प्रभावी उपाय है।
दोनों ही प्रकार (एचएसवी-1 और एचएसवी-2) के संक्रमण के बाद वायरस पूरी तरह खत्म नहीं होता, बल्कि जीवनभर शरीर में रहता है। समय-समय पर इसकी रिकरेंस रहती है। यानी बार-बार छाले उभर सकते हैं।
यह प्रकार मुख्य रूप से होंठ, मुंह और चेहरे पर छोटे-छोटे फफोले या छाले बनाता है। इन छालों को आमतौर पर कोल्ड सोर या बुखार (Fever) में फफोला कहते हैं। संक्रमण अक्सर किस (चुम्बन), संक्रमित व्यक्ति के बर्तनों, गिलास, चम्मच, लिप बाम या अन्य निजी वस्तुएं साझा करने से होता है। छाले फटने पर उनमें से पानी जैसा तरल निकलता है। जिससे दर्द और जलन बढ़ती है। पहली बार संक्रमण होने पर बुखार, गले में खराश और थकान जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। यह वायरस एक बार शरीर में प्रवेश करने के बाद नसों में छिपा रहता है। समय-समय पर दोबारा सक्रिय होकर छाले पैदा करता है।
यह प्रकार मुख्य रूप से जननांगों और गुप्तांगों के आसपास दर्दनाक फफोले या छाले पैदा करता है। यह संक्रमण यौन संबंध (असुरक्षित यौन संबंध) के जरिए होता है। इसलिए इसे यौन संचारित रोग (एसटीडी) कहते हैं। संक्रमित व्यक्ति से नजदीकी शारीरिक संपर्क, खासकर त्वचा से त्वचा का संपर्क, संक्रमण का मुख्य कारण है। गंभीर मामलों में पेशाब करने में जलन, जननांगों में खुजली और लालिमा और तेज बुखार जैसे लक्षण होते हैं। महिलाओं में यह गर्भावस्था (Pregnancy) और डिलीवरी के दौरान बच्चे तक फैलता है। जिससे नवजात के लिए खतरा बढ़ता है। एचएसवी-2 भी शरीर में जीवनभर रहता है। जब-जब इम्यूनिटी कम होती है। यह फिर से सक्रिय होता है।
यह संक्रमण सबसे तेजी से सीधे संपर्क में आता है। चुंबन, असुरक्षित यौन संबंध (Sexual relations) या संक्रमित त्वचा को छूने से वायरस फैल सकता है। यहां तक कि अगर छाले दिखाई न भी दें। तब भी वायरस फैलने का खतरा रहता है।
हरपीज वायरस लंबे समय तक सतह पर जीवित नहीं रहता है। लेकिन कुछ समय तक यह शेविंग रेजर, तौलिए, बर्तन, गिलास या लिप बाम जैसी चीजों पर मौजूद रहता है। इन वस्तुओं को साझा करने से संक्रमण दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है।
जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। उनमें यह वायरस बार-बार सक्रिय होकर संक्रमण करता है। एचआईवी/एड्स से पीड़ित मरीजों या जिन लोगों को गंभीर बीमारियां हैं। उनमें हरपीज का असर ज्यादा गंभीर होता है।
लगातार मानसिक तनाव, शारीरिक थकान और पर्याप्त नींद न मिलना भी वायरस को फिर से सक्रिय करता है। ऐसे में छाले दोबारा उभर आते हैं और दर्द व जलन बढ़ जाती है।
कई बार बुखार या सर्दी-जुकाम के दौरान एचएसवी-1 सक्रिय होता है। इस कारण होंठों पर छोटे-छोटे छाले या कोल्ड सोर उभर आते हैं। जिन्हें आम भाषा में फीवर ब्लिस्टर भी कहा जाता है।

प्राथमिक संक्रमणः
एचएसवी-1 वायरस सबसे पहले होंठों और मुंह के आसपास की त्वचा को प्रभावित करता है। इस दौरान छोटे-छोटे छाले या फफोले बनते हैं, जो दर्द और जलन पैदा करते हैं।
नर्व सेल्स में निष्क्रिय अवस्थाः
एक बार संक्रमण होने के बाद वायरस नर्व सेल्स (तंत्रिका कोशिकाओं) में छिपकर निष्क्रिय अवस्था में चला जाता है। जब तक इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है। यह वायरस शांत रहता है।
दोबारा सक्रिय होनाः
शरीर के कमजोर होते ही यह वायरस फिर से सक्रिय होता है। सक्रिय होने पर यह वापस त्वचा की सतह पर आकर होंठों पर छोटे-छोटे छाले बना देता है।
ट्रिगर कारकः
तेज धूप में ज्यादा समय बिताने से। सर्दी-जुकाम (Cold and cough) या बुखार होने पर। तनाव और मानसिक दबाव की स्थिति में। हार्मोनल बदलाव (जैसे महिलाओं में पीरियड्स के दौरान) होना। थकान और नींद की कमी से होना।
छोटे-छोटे जलनदार छालेः
होंठों, मुंह या जननांगों पर छोटे पारदर्शी पानी से भरे छाले उभर आते हैं। यह छाले अक्सर समूह में दिखाई देते हैं और काफी दर्दनाक होते हैं।
छालों का फूटना और पपड़ी बननाः
कुछ दिनों बाद छाले फूट जाते हैं और वहां पर घाव जैसा निशान रह जाता है। धीरे-धीरे उस पर पपड़ी बनती है, जो ठीक होने पर झड़ती है।
खुजली, जलन और दर्दः
प्रभावित जगह पर लगातार खुजली, जलन और चुभन जैसा दर्द महसूस होता है। छाले ठीक होने तक असुविधा बनी रहती है
शरीर में बुखार, बेचैनी, थकान और सिर दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पहली बार संक्रमण में ये लक्षण ज्यादा गंभीर होते हैं।
पेशाब करने में जलन और दर्द
जननांगों के आसपास लालिमा और सूजन।
लसीका ग्रंथियों की सूजन, खासकर जांघों के पास।
एंटीवायरल दवाइयां
डॉक्टर आमतौर पर एसाइक्लोविर, वैलासाइक्लोविर, फैम्सिक्लोविर जैसी दवाइयां लिखते हैं। यह दवाएं वायरस को पूरी तरह खत्म तो नहीं करतीं, लेकिन संक्रमण की तीव्रता और अवधि को कम कर देती हैं। हरपीज के लिए डॉक्टर नोएडा में उपलब्ध है। शुरुआती चरण में दवा लेने से छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं और नए छाले बनने से रोका जा सकता है।
दर्द और जलन से राहतः
डॉक्टर की सलाह से पेन रिलीवर दवाएं जैसे पैरासिटामोल या इबुप्रोफेन ली जा सकती हैं। प्रभावित जगह पर ठंडी सिकाई करने से दर्द, सूजन और जलन में राहत मिलती है। आरामदायक और ढीले कपड़े पहनने से भी त्वचा पर घर्षण कम होता है।
गंभीर और बार-बार होने वाले संक्रमणः
जिन लोगों को हरपीज बार-बार होता है। उनके लिए डॉक्टर लॉन्ग-टर्म एंटीवायरल थेरेपी सुझाते हैं। इससे संक्रमण दोबारा होने की संभावना काफी हद तक कम होती है। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए हेल्दी डाइट, पर्याप्त नींद और तनाव कम करना जरूरी है।
महत्वपूर्ण सावधानीः
अभी तक हरपीज का स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। लेकिन नियमित दवाइयों और सही देखभाल से इसे कंट्रोल किया जा सकता है और मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से बचेंः
हरपीज से पीड़ित व्यक्ति के छालों, फफोलों या घाव को सीधे छूने से बचें। संक्रमित त्वचा के संपर्क में आने से वायरस आसानी से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है।
सुरक्षित यौन संबंधः
जननांग हरपीज (एचएसवी-2) मुख्य रूप से यौन संबंधों से फैलता है। इसलिए हमेशा कंडोम का प्रयोग करें। हालांकि यह संक्रमण के खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं करता, लेकिन काफी हद तक कम कर देता है। अगर साथी को हरपीज है और छाले सक्रिय हैं तो यौन संबंध बनाने से बचना चाहिए।
निजी सामान साझा न करें।
तौलिया, रेजर, लिप बाम, बर्तन, गिलास या टूथब्रश जैसी व्यक्तिगत वस्तुएं कभी भी साझा न करें। ये चीजें संक्रमण का माध्यम बन सकती हैं।
तनाव कम करें और पर्याप्त नींद लेंः
तनाव, थकान और नींद की कमी वायरस को सक्रिय कर सकती है। योग, मेडिटेशन और रिलैक्सेशन तकनीक अपनाकर तनाव कम करें और प्रतिदिन 7–8 घंटे की नींद जरूर लें।
इम्यून सिस्टम मजबूत बनाएंः
हरपीज वायरस को नियंत्रित रखने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए संतुलित आहार (हरी सब्जियां, फल, प्रोटीन और विटामिन युक्त भोजन) लें। नियमित व्यायाम करें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं।
हरपीज एक आम लेकिन परेशान करने वाला वायरल संक्रमण है। होंठों और जननांगों पर छाले इसका प्रमुख लक्षण है। इसका पूरी तरह इलाज संभव नहीं है। मगर सही समय पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह, एंटीवायरल दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से संक्रमण को नियंत्रित कर सकते हैं। किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। इलाज में देरी कई बार नुकसानदेह होती है।
इलाज के लिए कॉल करें: +91 9667064100.
उत्तर: नहीं, वायरस शरीर में निष्क्रिय रहता है। लेकिन दवाओं से इसे नियंत्रित कर सकते हैं।
उत्तर: एचएसवी-1 वायरस कमजोर इम्यूनिटी, तनाव, धूप या बुखार के दौरान फिर से सक्रिय होता है।
उत्तर: हां, एचएसवी-2 मुख्य रूप से अनप्रोटेक्टेड सेक्स से फैलता है। इसलिए यौन संबंध के दौरान सावधानी जरूरी है।
उत्तर: यह जानलेवा नहीं होता है। लेकिन बार-बार संक्रमण और दर्दनाक छालों से जीवन प्रभावित होता है।
उत्तर: हां, जननांग हरपीज (एचएसवी-2) प्रेगनेंसी में बच्चे तक पहुंचता है। इसलिए डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है।