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जब दवा और एंजियोप्लास्टी से आराम नहीं मिलता तब कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) सर्जरी की जाती है। इसमें डॉक्टर शरीर की किसी अन्य स्वस्थ नस या धमनियों यानी पैर की सैफेनस वेन या छाती की एलआईएमए को लेकर उसे हृदय की अवरुद्ध धमनी के आगे और पीछे जोड़ते हैं। इस कारण रक्त का प्रवाह एक नए रास्ते से होता है। जिससे दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। अगर आपको बार-बार सीने में दर्द, थकान या सांस फूलने की समस्या है, तो समय रहते ग्रेटर नोएडा में सर्वश्रेष्ठ कार्डियोलॉजी डॉक्टर (Best Cardiology Doctor in Greater Noida) से सलाह लें।
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कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी क्या है? (What is Coronary Artery Bypass Surgery?)
रोगी और परिवार के लिए सलाह (Advice for the patient and family)
कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी (Coronary Artery Bypass Surgery) हृदय-शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है। जिसमें हृदय की अवरुद्ध धमनियों के स्थान पर एक नया मार्ग यानी बाईपास तैयार करते है। जिससे रक्त हृदय तक सही से पहुंचे। इसमें शरीर के किसी भाग में चीरा लगाकर किसी अंग, ऊतक (Tissue) या विकृति (Distortion) को हटाकर रोग का उपचार होता है। जब हृदय को रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियां कोलेस्ट्रॉल व वसा (Fat) के जमाव से ब्लॉक होती हैं। तो रक्त प्रवाह रुकता है।
इस दौरान डॉक्टर शरीर के किसी अन्य हिस्से से यानी पैर की नस या छाती व बांह की धमनी से एक स्वस्थ नस निकालते हैं। बाईपास से नस को हृदय की ब्लॉक हुई धमनी के ऊपर और नीचे जोड़कर एक नया रास्ता बनाते हैं। रक्त प्रवाह से यह नया रास्ता अवरुद्ध भाग को बायपास करते हुए हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाता है।
सिंगल बाईपास सर्जरी में केवल एक आर्टरी को बाईपास करते हैं। यह तब होती है। जब सिर्फ एक कोरोनरी आर्टरी में रुकावट आती है।
डबल बाईपास सर्जरी में दो धमनियों को बाईपास करते है। जब दो प्रमुख कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज होता तो इसे चुनते हैं।
ट्रिपल बाईपास सर्जरी तीन धमनियों की ब्लॉकेज को हटाने करते हैं। हृदय रोगियों में यह सर्जरी आमतौर पर की जाती है।
क्वाड्रुपल बायपास सर्जरी (Quadruple Bypass Surgery) एक जटिल हृदय शल्य चिकित्सा है, जिसमें हृदय की चार अवरुद्ध धमनियों को बायपास किया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) के मामलों में आवश्यक होती है।
ऑफ-पंप बाईपास सर्जरी को बीटिंग हार्ट सर्जरी भी कहते हैं। इसमें हार्ट को चलते हुए ही सर्जरी होती है। बायपास मशीन का उपयोग नहीं किया जाता है।
ऑन-पंप बाईपास सर्जरी के दौरान हार्ट को कुछ समय के लिए रोकते हैं। इसमें ब्लड फ्लो एक हार्ट-लंग मशीन द्वारा नियंत्रित होता है।
मिनिमली इनवेसिव बाईपास सर्जरी में बड़ी चीरफाड़ के बजाय छोटे चीरे के लिए विशेष उपकरणों का प्रयोग करते हैं। इससे रिकवरी जल्दी होती है। दर्द कम रहता है।
रॉबोटिक असिस्टेड बाईपास सर्जरी में सर्जन रोबोटिक आर्म्स से सर्जरी को नियंत्रित करते हैं। यह उच्च तकनीक और कम इनवेसिव प्रक्रिया है।
कोरोनरी बाईपास सर्जरी की लागत (Cost of Coronary Bypass Surgery) अस्पतालों में रोगी की स्थिति, दवाओं, स्टेंट या आईसीयू की आवश्यकता पर निर्भर होती है। इसमें अनुभवी डॉक्टर और विशेषज्ञ कार्डियक सर्जन भी शामिल हैं। निजी अस्पतालों में 2.5 लाख से 6 लाख तक खर्च होते हैं। इसमें शहर, अस्पताल की प्रतिष्ठा और सर्जन की विशेषज्ञता शामिल होता है।
| प्रारंभिक लागत | 2 लाख |
| औसत लागत | 4 लाख से 6 लाख |
| अधिकतम लागत | 8 लाख |
निजी अस्पतालों में वेटिंग कम होती है। निजी अस्पतालों में आधुनिक उपकरण, एयर-कंडीशन्ड वार्ड, निजी कमरे की सुविधा होती हैं।
निजी अस्पतालों में हेल्थ इंश्योरेंस स्वीकार होता है। जिससे राहत मिलती है।
निजी अस्पतालों में भी अनुभवी और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टर होते हैं।
मरीज को लागत, वेटिंग टाइम, सुविधाएं और उपलब्ध बीमा विकल्पों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए।
तो यहाँ हमने जाना की हार्ट बाईपास सर्जरी कितने में होती है इसके साथ अब हम बात करेंगे की सर्जरी की प्रक्रिया, सर्जरी की तकनीक और रिकवरी प्रक्रिया, के बारे में।
सर्जरी से पहले रोगी का इतिहास, लक्षणों और जोखिम कारकों की जांच होती है। इसमें डायबिटीज, हाइपरटेंशन आदि की जांच होती है।
हृदय की धमनियों की स्थिति देखने के लिए यह प्रक्रिया होती है। डाई और एक्सरे की मदद से ब्लॉकेज की स्थिति की जांच होती हैं।
बाईपास सर्जरी से पहले मरीज की शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए पहले, खून की जांच जैसे कि सीबीसी, शुगर और क्रिएटिनिन जांच होती है। जिससे संक्रमण, एनीमिया और किडनी फंक्शन से पता चलता है। यह जांचें इसलिए की जाती है कि शरीर की सर्जरी के तैयार है या नहीं।
हृदय को कुछ समय के लिए रोकते हैं। फिर हार्ट-लंग मशीन शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करती है। यह पारंपरिक व सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली विधि होती है।
हृदय को रोके बिना, धड़कते हृदय पर सर्जरी होती है। इसमें हार्ट-लंग मशीन की आवश्यकता नहीं होती है। यह तकनीक बुज़ुर्ग या हाई-रिस्क मरीजों के लिए बेहतर है।
इस प्रक्रिया में ब्रेस्ट बोन को पूरी तरह काटने के बजाय केवल एक छोटा चीरा लगाया जाता है। इससे रिकवरी तेज़ होती है, लेकिन यह तकनीक हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती।
बाईपास सर्जरी में ग्राफ्टिंग के लिए विभिन्न नसों का चयन करते हैं। यह रोगी की स्थिति, डॉक्टर की विशेषज्ञता और धमनियों की उपलब्धता पर निर्भर है।
सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली धमनी लेफ्ट इंटरनल मैमरी आर्टरी (एलआईएमए) होती है। यह सीने की दीवार में स्थित होती है। यह लंबे समय तक खुली रहने की क्षमता के कारण सबसे विश्वसनीय है। आमतौर पर इसे लेफ्ट एंटीरियर डिजेंडिंग (एलएडी) आर्टरी को बायपास करने के लिए प्रयोग करते हैं।
राइट इंटरनल मैमरी आर्टरी (आरआईएमए) जो छाती की दाहिनी ओर होता है। यह भी एलआईएमए की तरह प्रभावी होता है। मगर इसका उपयोग जटिल होता है।
ग्रेट सैफेनस वेन (जीएसवी) जो टांग की सबसे लंबी नस होती है। यह अक्सर उपयोग में लाई जाने वाली नस होती है। इसकी कार्यक्षमता 10 से 15 साल तक है। मगर जब आर्टरी विकल्प कम हैं, तब यह एक उपयोगी है।
रेडियल आर्टरी, जो हाथ की कलाई के पास होती है, मोटी और मजबूत होती है। इसका उपयोग तभी किया जाता है जब एलन टेस्ट सुरक्षित और सफल हो।
गैस्ट्रोएपिप्लॉइक आर्टरी पेट के भीतर आमाशय के पास होती है। यह कम आम प्रयोग में लाई जाती है। जब पहले से मौजूद आर्टरी या वेन ग्राफ्टिंग के लिए उपयुक्त न हों।
ग्रेटर नोएडा में सर्वश्रेष्ठ कार्डियोलॉजी अस्पतालों में रिकवरी प्रक्रिया कुछ इस प्रकार रहती है:
बाईपास सर्जरी के बाद रोगी को पहले 24 से 48 घंटे तक आईसीयू में रखते है। जहां उसकी दिल की धड़कन, रक्तचाप, ऑक्सीजन स्तर की निगरानी होती है। हालत सामान्य होने पर मरीज को सामान्य वार्ड में शिफ्ट करते हैं। अस्पताल में रहने की अवधि आमतौर पर 5 से 10 दिन होती है।
अस्पताल से छुट्टी के बाद घर पर पूरी तरह से ठीक होने में 6 से 12 सप्ताह का समय लगता है। इस दौरान मरीज को धीरे-धीरे चलना चाहिए। मगर ड्राइविंग, झुकना या भारी वजन उठाना की मनाही होती है। व्यायाम और पोषण पर ध्यान देना चाहिए।
डॉक्टर जल्द रिकवरी के लिए कार्डियक रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम की सलाह देते हैं। यह 6 से 12 सप्ताह तक चलता है। इसमें व्यायाम, आहार परामर्श, तनाव प्रबंधन और जीवनशैली में सुधार शामिल है। इस कारण दोबारा हार्ट अटैक की संभावना नहीं होती। रोगी सामान्य जीवन जाती है।
हल्का चलने की प्रक्रिया एक से दो सप्ताह में शुरू कर सकते हैं। जबकि घरेलू कार्य तीन से चार सप्ताह में शुरू करना चाहिए। वहीं ड्राइविंग छह सप्ताह बाद करनी चाहिए। ऑफिस कार्य छह से आठ सप्ताह में शुरू कर सकते हैं।
चीरे वाली जगह पर संक्रमण, सीने में दर्द, अनियमित धड़कन, थकान, नींद की गड़बड़ी या फेफड़ों में संक्रमण दोबारा न हो इसलिए समयपर लेनी चाहिए। धूम्रपान और शराब से दूर रहना चाहिए। वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना चाहिए। भारी सामान उठाने से परहेज करना चाहिए।
कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग एक सुरक्षित प्रक्रिया है। यह सर्जरी उन हृदय रोगियों के लिए जीवनदायिनी है। जिनकी कोरोनरी धमनियां गंभीर रूप से अवरुद्ध हैं। इसलिए छाती में दर्द, सांस फूलना, थकान को अनदेखा नहीं करें। समय पर एंजियोग्राफी (Angiography) और कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। समय पर सर्जरी से हृदय की पंपिंग क्षमता बढ़ने के साथ दीर्घायु जीवन की संभावना बढ़ती है। मगर फिर भी हृदय रोग का इलाज केवल दवा या सर्जरी नहीं बल्कि सही देखभाल है।
प्रश्न 1ः क्या कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी दर्दनाक है?
उत्तर: सर्जरी के दौरान जनरल एनेस्थीसिया देते हैं। जिससे मरीज को दर्द नहीं होता है। बाद में कुछ दिनों तक सीने में दर्द के अलावा जकड़न होती है। जिसे दवाओं से नियंत्रित करते हैं।
प्रश्न 2ः घर पर रिकवरी में कितना समय लग जाता है?
उत्तर: सामान्य दिनचर्या में लौटने में 6–8 सप्ताह का लगता है। ऑफिस या हल्का काम शुरू करने में लगभग 6 सप्ताह लग जाते हैं। पूरी तरह सामान्य जीवन में वापसी में 2–3 महीने का समय लगता है।
प्रश्न 3ः सर्जरी के बाद क्या जिंदगी सामान्य हो सकती है?
उत्तर: अगर दवा, डाइट, व्यायाम और तनाव कम हैं तो सामान्य जीवन संभव होता है। सैकड़ों लोग सर्जरी के बाद दशकों तक स्वस्थ रहते हैं।
प्रश्न 4ः सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: धूम्रपान और शराब से दूर रहे। दवाएं समय पर लेनी चाहिए। नियमित जांच कराते रहनी चाहिए। संतुलित आहार और हल्का व्यायाम करना चाहिए।
प्रश्न 5ः क्या बाईपास सर्जरी दोबारा हो सकती है?
उत्तर: दुर्लभ मामलों में अगर नई ग्राफ्ट्स ब्लॉक होती है री-बाईपास संभव है। मगर पहली सर्जरी के बाद जीवनशैली को सही रखना जरूरी होता है।