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आज के समय में जब हार्ट ब्लॉकेज जटिल और कठोर (कैल्सिफाइड) होते हैं। तब पारंपरिक एंजियोप्लास्टी से उन्हें खोलना संभव नहीं होता। ऐसे मामलों में रोटाब्लेशन एंजियोप्लास्टी (Rotablation Angioplasty) सबसे उन्नत और प्रभावी तकनीक मानी जाती है। यह प्रक्रिया उन मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होती है। जिनकी धमनियों में कैल्शियम की वजह से स्टेंट डालना कठिन होता है। नोएडा में अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट (Experienced cardiologists in Noida) से रोटाब्लेशन एंजियोप्लास्टी उपलब्ध है। अगर आप या आपके किसी परिजन को डॉक्टर ने कैल्सिफाइड ब्लॉकेज बताया है, तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
अपॉइंटमेंट शेड्यूल करने के लिए, कॉल करें: +91 9667064100
रोटाब्लेशन एंजियोप्लास्टी, जिसे रोटेशनल अथेरक्टॉमी भी कहा जाता है, एक उन्नत हृदय प्रक्रिया है। यह तकनीक तब इस्तेमाल की जाती है जब धमनी के अंदर कैल्शियम की मोटी परत जम जाती है, जिसे सामान्य बैलून या स्टेंट से नहीं खोला जा सकता है। इस प्रक्रिया में एक विशेष रोटाब्लेटर डिवाइस का उपयोग किया जाता है। जिसके सिरे पर हीरे जैसे महीन कणों से बनी छोटी सी ड्रिल होती है। यह उच्च गति (लगभग 1,50,000 rpm) से घूमती है और कठोर प्लाक को बारीक कणों में तोड़कर रास्ता साफ करती है। इसके बाद स्टेंट डालकर धमनी को खुला रखा जाता है, जिससे रक्त प्रवाह सामान्य रूप से बहने लगता है।
रोटाब्लेशन एक विशेष हृदय-धमनी उपचार है। जो तब किया जाता है जब धमनी के अंदर का ब्लॉकेज बहुत कठोर या कैल्सिफाइड होता है। सामान्य एंजियोप्लास्टी से उसे खोला नहीं जाता। इस तकनीक में एक रोटेटिंग डायमंड-टिप डिवाइस का उपयोग कर कठोर जमाव को बारीक कणों में तोड़ा जाता है। जिससे ब्लड फ्लो फिर से सामान्य हो सके। रोटाब्लेशन की आवश्यकता निम्न स्थितियों में पड़ती है:
जब हृदय की कोरोनरी धमनी के अंदर कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल का कठोर जमाव बन जाता है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है। यह जमाव इतना सख्त होता है कि बैलून से फैलाना संभव नहीं होता रोटाब्लेशन से यह कठोर परत पॉलिश की तरह घिसकर हटा दी जाती है, जिससे धमनी की लचीलापन और ब्लड फ्लो लौटता है।
कुछ मरीजों में धमनी इतनी संकरी और कठोर होती है कि बैलून को बार-बार फुलाने के बाद भी वह नहीं फैलती। ऐसे मामलों में रोटाब्लेशन आवश्यक हो जाता है ताकि कठोर जमाव हटाकर धमनी को खोलने में आसानी हो सके। यह तकनीक बैलून या स्टेंट लगाने से पहले की तैयारी के रूप में भी की जाती है।
कभी-कभी धमनी के अत्यधिक सख्त होने के कारण बैलून या स्टेंट पूरी तरह फैल नहीं पाता, जिससे ब्लॉकेज अधूरा रह जाता है। रोटाब्लेशन से धमनी की अंदरूनी सतह चिकनी की जाती है, जिससे स्टेंट सही तरीके से बैठ सके और फेल्योर का खतरा खत्म हो जाए।
उम्र बढ़ने के साथ धमनियों की दीवारें स्वाभाविक रूप से कठोर और कम लचीली हो जाती हैं। बुजुर्ग मरीजों में कैल्शियम का जमाव अधिक होता है, जिससे एंजियोप्लास्टी कठिन हो जाती है। ऐसे मामलों में रोटाब्लेशन धमनी को सुरक्षित रूप से खोलने का सर्वोत्तम विकल्प होता है।
कभी-कभी पहले डाले गए स्टेंट के अंदर फिर से प्लाक जम जाता है या धमनी संकरी होती है। यदि यह ब्लॉकेज कठोर कैल्सिफाइड रूप में है, तो रोटाब्लेशन करके उसे हटाया जाता है ताकि रक्त प्रवाह सामान्य हो सके। यह प्रक्रिया री-एंजियोप्लास्टी की सफलता दर को बढ़ाती है।
एनेस्थीसिया और तैयारी:
मरीज को स्थानीय एनेस्थीसिया दिया जाता है। कैथ लैब में जांघ या हाथ की धमनी से कैथेटर डाला जाता है।
रोटाब्लेटर का प्रयोग:
डॉक्टर एक पतली तार (गाइडवायर) के माध्यम से रोटाब्लेटर को ब्लॉकेज वाली जगह तक पहुंचाते हैं। यह उपकरण 1.25mm–1.75mm आकार की डायमंड टिप ड्रिल से ब्लॉकेज को धीरे-धीरे पॉलिश करता है।
बैलून और स्टेंटिंग:
कैल्शियम हटने के बाद बैलून से धमनी को फैलाया जाता है और फिर स्टेंट डालकर स्थिर किया जाता है।
रिकवरी:
पूरी प्रक्रिया 45–90 मिनट में पूरी हो जाती है और अधिकतर मरीज अगले दिन डिस्चार्ज होते हैं।
रोटाब्लेशन कोई सामान्य या प्राथमिक प्रक्रिया नहीं होती। बल्कि यह एक विशेष कार्डियक इंटरवेंशन है। जिसे तभी किया जाता है जब पारंपरिक एंजियोप्लास्टी से अपेक्षित परिणाम न मिलें।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए), अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी), यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी (ईएससी) और कार्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (सीएसआ) ने इसके लिए स्पष्ट क्लिनिकल मानदंड तय किए हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के अनुसार:
जब धमनी के अंदर कैल्शियम की परत इतनी मोटी हो कि पारंपरिक बैलून से फैलाना असंभव हो जाए। ऐसे मामलों में रोटाब्लेशन से प्लाक को पॉलिश की तरह घिसकर रास्ता खोला जाता है।
यदि पहले से डाला गया स्टेंट पूरी तरह न फैले या “अंडर-डिप्लॉयड” रह जाए, तो रोटाब्लेशन द्वारा धमनी को तैयार कर स्टेंट का पुनः विस्तार किया जाता है।
बैलून एंट्री रेसिस्टेंस:
जब बैलून या वायर कठोर ब्लॉकेज के पार नहीं जा पा रहा हो, तो रोटाब्लेशन का उपयोग धमनी की सतह को खोलने और उपकरण को प्रवेश कराने के लिए किया जाता है।
कई ब्लॉकेज में से एक अत्यधिक सख्त हो:
अगर मरीज की एक से अधिक धमनियों में ब्लॉकेज है, लेकिन किसी एक धमनी में कैल्सिफिकेशन बहुत गहरा है, तो उस विशेष धमनी में रोटाब्लेशन करना उचित माना जाता है।
यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी के अनुसार:
ईएसई गाइडलाइंस के मुताबिक, रोटाब्लेशन को “घाव तैयार करने की तकनीक” के रूप में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य जटिल और कठोर धमनी को स्टेंट डालने योग्य बनाना है। जब कोरोनरी धमनी में 360° या अधिक कैल्सिफिकेशन हो या बैलून फट जाए तब रोटाब्लेशन प्राथमिक विकल्प है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी है जिनमें लेफ्ट मेन आर्टरी या प्रॉक्सिमल LAD (लेफ्ट एंटीरियर डिसेंडिंग) जैसी प्रमुख धमनियों में कैल्सिफाइड ब्लॉकेज हो। ESC इस बात पर भी ज़ोर देता है कि रोटाब्लेशन केवल अनुभवी इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा ही की जानी चाहिए और मरीज की स्थिति का सटीक मूल्यांकन (IVUS/OCT Imaging) पहले किया जाए।
भारतीय कार्डियोलॉजी सोसाइटी के अनुसार:
गाइडलाइंस में रोटाब्लेशन को उन मरीजों के लिए “चयनात्मक लेकिन पसंदीदा उपचार” बताया गया है। जिनकी धमनियों में गंभीर कैल्सिफिकेशन या स्टेंट न फैलने की समस्या हो। भारत में जहां डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के कारण धमनियों में कठोरता अधिक पाई जाती है। वहां इसे एक व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प मानती है। रोटाब्लेशन को प्राथमिक रूप से उन केंद्रों में करने की सिफारिश की गई है। जहां कैथ लैब में आधुनिक तकनीकें जैसे OCT (ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी) या IVUS (इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड) उपलब्ध हों। साथ ही यह भी कहती है कि यदि ब्लॉकेज बहुत लंबा या टॉर्चुअस (घुमावदार) है, तो पहले फिजियोलॉजिकल मूल्यांकन कर यह तय किया जाए कि रोटाब्लेशन ही सर्वोत्तम विकल्प है या नहीं।
कैल्सिफाइड और जटिल ब्लॉकेज का भी सुरक्षित समाधान।
स्टेंट आसानी से और पूरी तरह खुलता है।
रेस्टेनोसिस (फिर से ब्लॉकेज) की संभावना कम होती है।
रिकवरी समय तेज़ और दर्द बहुत कम होता है।
हार्ट अटैक की पुनरावृत्ति का खतरा घटता है।
60 वर्ष से ऊपर के मरीजों में भी सुरक्षित परिणाम मिलते हैं।
अधिकांश मरीज 24–48 घंटे में सामान्य चलना-फिरना शुरू कर देते हैं। 7–10 दिनों में नियमित कामकाज किया जा सकता है। दवाएं ब्लड थिनर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रक दवाएं नियमित रूप से लें।
1 सप्ताह, 1 माह और 3 माह बाद कार्डियोलॉजिस्ट से परामर्श लें।
तंबाकू, शराब, तला-भुना भोजन और तनाव से दूरी रखें। हल्की एक्सरसाइज या वॉक डॉक्टर की सलाह पर शुरू करें।
हालांकि यह तकनीक अत्यंत सुरक्षित है, लेकिन कुछ संभावित जोखिम हो सकते हैं:
धमनी में मामूली चोट या ब्लीडिंग
हृदय की धड़कनों का असामान्य होना
अस्थायी छाती में जकड़न
रेस्टेनोसिस (दुर्लभ मामलों में)
नोएडा में इस प्रक्रिया की लागत अस्पताल, मरीज की स्थिति और उपयोग किए गए स्टेंट पर निर्भर करती है। इसमें रोटाब्लेटर मशीन, स्टेंट, कार्डियक मॉनिटरिंग, आईसीयू देखभाल और फॉलोअप शामिल हैं। नोएडा में रोटाब्लेशन एंजियोप्लास्टी के लिए अस्पताल (Hospitals in Noida for Rotablation Angioplasty) उपलब्ध है। आयुष्मान भारत योजना या हेल्थ इंश्योरेंस के तहत अधिकांश अस्पतालों में कैशलेस सुविधा उपलब्ध है। आम तौर पर —
एकल ब्लॉकेज: 1.8 लाख – 2.5 लाख
जटिल या मल्टी-वेसल केस: 2.5 लाख – 4.5 लाख
रोटाब्लेशन एंजियोप्लास्टी हार्ट ब्लॉकेज के इलाज में एक क्रांतिकारी तकनीक है। जो जटिल और कठोर ब्लॉकेज को भी सुरक्षित रूप से खोलती है। यह उन मरीजों के लिए वरदान है जिनकी धमनियों में कैल्शियम की मोटी परत जमा हो चुकी है। सामान्य एंजियोप्लास्टी (angioplasty) से इलाज संभव नहीं। नोएडा के उन्नत कार्डियक सेंटरों में यह तकनीक अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट की देखरेख में सुरक्षित रूप से की जाती है। इसलिए इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
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प्रश्न 1. क्या रोटाब्लेशन एंजियोप्लास्टी दर्दनाक होती है?
उत्तर: नहीं, यह प्रक्रिया एनेस्थीसिया में होती है। मरीज को बहुत हल्की असहजता महसूस होती है।
प्रश्न 2. क्या हर मरीज को रोटाब्लेशन की जरूरत पड़ती है?
उत्तर: नहीं, केवल उन मरीजों में जिनकी धमनियां कैल्सिफाइड हैं। सामान्य एंजियोप्लास्टी से नहीं खुलतीं।
प्रश्न 3. क्या स्टेंट रोटाब्लेशन के बाद अधिक समय तक टिकता है?
उत्तर: हां, क्योंकि धमनी पूरी तरह साफ हो जाती है, जिससे स्टेंट की पकड़ मजबूत होती है। रेस्टेनोसिस का खतरा घटता है।
प्रश्न 4. क्या बुजुर्ग मरीजों में यह प्रक्रिया सुरक्षित है?
उत्तर: हां, यह तकनीक मिनिमल इनवेसिव है। 70 वर्ष से ऊपर के मरीजों में भी सफल मानी गई है।
प्रश्न 5. क्या रोटाब्लेशन के बाद ब्लॉकेज दोबारा होता है?
उत्तर: संभावना बहुत कम होती है, लेकिन संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और दवाओं के पालन से इसे पूरी तरह रोका जाता है।