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पहले जहां हार्ट अटैक को उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता था। वहीं अब यह खतरनाक स्थिति युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रही है। भारत में 30 साल से कम उम्र के युवाओं में हृदयाघात (Heart Attack) के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हो रही है। खासकर नोएडा, दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी इलाकों में यह समस्या चिंताजनक रूप ले चुकी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अस्वास्थ्यकर खानपान, तनाव, नींद की कमी और फिटनेस की अनदेखी ने युवाओं के हृदय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जरूरी है कि आखिर कम उम्र में हार्ट अटैक क्यों हो रहा है। इसके प्रमुख कारण, लक्षण और नोएडा में आधुनिक कार्डियोलॉजी इलाज उपलब्ध हैं।
पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा विशेषज्ञों ने देखा है कि हार्ट अटैक अब केवल 50 या 60 की उम्र में नहीं, बल्कि 20 से 30 वर्ष के युवाओं में भी आम है। इसका सबसे बड़ा कारण जीवनशैली में बदलाव और तनावपूर्ण दिनचर्या है। आज के युवा लंबे समय तक लैपटॉप या मोबाइल पर बैठे रहते हैं। शारीरिक गतिविधि न के बराबर होती है। खानपान जंक फूड पर आधारित है। इसके साथ नींद की कमी और लगातार तनाव हृदय की मांसपेशियों पर असर डालते हैं।
अस्वास्थ्यकर आहार:
जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, तला-भुना भोजन और अत्यधिक नमक व चीनी का सेवन कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है।
धूम्रपान व शराब सेवन:
युवाओं में स्मोकिंग और अल्कोहल सेवन के कारण रक्त वाहिकाएं सख्त और संकरी हो जाती हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।
तनाव:
करियर प्रेशर, आर्थिक बोझ और नींद की कमी से हॉर्मोनल असंतुलन होता है, जो हृदय पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
जीन संबंधी कारण:
कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास से भी जोखिम बढ़ता है।
ड्रग्स या एनाबॉलिक स्टेरॉइड्स का सेवन:
जिम में उपयोग होने वाले कुछ स्टेरॉइड्स हृदय की धड़कन और रक्तचाप को असामान्य बना देते हैं।
डायबिटीज और हाइपरटेंशन का प्रारंभिक प्रकोप:
अब ये बीमारियां भी युवाओं में तेजी से पाई जा रही हैं, जो हार्ट अटैक के जोखिम को दोगुना करती हैं।
युवा अक्सर शुरुआती लक्षणों को गैस, थकान या चिंता समझकर नजरअंदाज करते हैं। जो घातक होता है। मुख्य लक्षण यह हैं।
सीने में भारीपन (heaviness in the chest), जलन या कसाव महसूस होना।
कंधे, गर्दन या जबड़े तक दर्द फैलना।
सांस फूलना या बिना कारण थकान महसूस होना।
ठंडा पसीना आना, मतली या उल्टी।
चक्कर या बेहोशी।
नोएडा में अब अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त कई कार्डियोलॉजी हॉस्पिटल्स हैं। जहां हार्ट अटैक के मामलों का त्वरित, सटीक और सुरक्षित इलाज किया जाता है। यहां विशेषज्ञ कार्डियक सर्जन, कैथ लैब, और 24x7 इमरजेंसी केयर यूनिट्स मौजूद हैं। हार्ट अटैक के उपचार में मुख्य रूप से निम्नलिखित पद्धतियां अपनाई जाती हैं।
एंजियोप्लास्टीः (Angioplasty)
यह सबसे सामान्य और प्रभावी इलाज है, जो हार्ट अटैक के पहले गोल्डन आवर यानी 90 मिनट में किया जाए तो जीवनरक्षक साबित होता है। इसमें एक बैलून कैथेटर धमनी के ब्लॉकेज तक पहुंचाया जाता है। बैलून को फुलाकर अवरुद्ध धमनी को फैलाया जाता है और स्टेंट लगाया जाता है। यह प्रक्रिया रक्त प्रवाह को तुरंत बहाल करती है और हृदय मांसपेशियों को बचाती है।
थ्रॉम्बोलाइटिक थेरेपीः (Thrombolytic therapy)
यह उपचार उन मरीजों के लिए है जिन्हें एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) तुरंत उपलब्ध नहीं होती। इसमें दवाओं के माध्यम से खून के थक्के को घोला जाता है। इससे धमनी में रक्त का प्रवाह बहाल होता है और ऑक्सीजन की आपूर्ति दोबारा शुरू होती है। समय पर दी गई यह थेरेपी हार्ट डैमेज को काफी हद तक रोक सकती है।
बायपास सर्जरीः (Bypass surgery)
यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब धमनी में ब्लॉकेज बहुत अधिक या कई जगह हो। सर्जरी में शरीर की किसी दूसरी रक्त वाहिका (आमतौर पर पैर या छाती की नस) का उपयोग करके नया बायपास मार्ग बनाया जाता है। इससे ब्लॉक हिस्से को बायपास कर रक्त का प्रवाह सुचारु रूप से हृदय तक पहुंचता है। यह लंबे समय तक टिकाऊ और प्रभावी इलाज है।
हार्ट अटैक के बाद मरीज को स्थिर करने और दोबारा अटैक से बचाने के लिए दवाएं दी जाती हैं:
ब्लड थिनर: रक्त के थक्के बनने से रोकते हैं।
बीटा-ब्लॉकर: हृदय की धड़कन और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं।
नाइट्रोग्लिसरीन: सीने के दर्द और ब्लड फ्लो सुधारने में सहायक होती है।
ACE इनहिबिटर/ARB: हृदय की मांसपेशी को मजबूत करने और हृदय फेल्योर से बचाने में मददगार होती है।
स्टैटिन्स: कोलेस्ट्रॉल लेवल कम कर भविष्य के ब्लॉकेज का खतरा घटाते हैं।
नोएडा के अस्पताल में हृदय रोगी के इलाज के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। जहां 24x7 कार्डियक इमरजेंसी यूनिटउपलब्ध है। यहां अत्याधुनिक कैथ लैब्स उपलब्ध है। यहां प्रशिक्षित इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध है। कार्डियक आईसीयू और मॉनिटरिंग सिस्टम भी उपलब्ध है। पोस्ट-ऑपरेटिव रिहैबिलिटेशन व फॉलो-अप केयर की सुविधा मिलती है।
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युवा हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं यदि वे इन बातों का पालन करें:
संतुलित और लो-फैट डाइट लें।
रोज कम से कम 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें।
धूम्रपान, शराब और ड्रग्स से पूरी तरह बचें।
तनाव और नींद की कमी से बचें, योग या मेडिटेशन अपनाएं।
हर 6 महीने में कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और बीपी की जांच कराएं।
परिवार में हृदय रोग का इतिहास हो तो नियमित कार्डियक चेकअप कराएं।
कम उम्र में हार्ट अटैक होना आज की पीढ़ी के लिए चेतावनी है। यह केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही है। बल्कि युवा जीवनशैली की भूलों का परिणाम है। सीने में दर्द, थकान या सांस फूलने जैसे संकेतों को अनदेखा न करें। समय पर जांच और सही इलाज से न केवल जान बचाई जा सकती है, बल्कि भविष्य में हार्ट अटैक के खतरे को भी काफी हद तक घटाया जा सकता है। आपात स्थिति में देर न करें। नोएडा के विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट (Specialist Cardiologists in Noida) से तुरंत संपर्क करें और सही उपचार समय पर प्राप्त करें।
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प्रश्न 1. क्या युवाओं में हार्ट अटैक आनुवंशिक होता है?
उत्तरः हां, यदि परिवार में पहले किसी को हृदय रोग रहा है तो जोखिम बढ़ता है। इसलिए समय-समय पर जांच करानी चाहिए।
प्रश्न 2. क्या तनाव और नींद की कमी से हार्ट अटैक होता है?
उत्तरः हां, लंबे समय तक तनाव और नींद की कमी हृदय पर नकारात्मक असर डालते हैं। इसलिए लक्षण दिखने पर जांच करानी चाहिए।
प्रश्न 3. क्या व्यायाम करने से हार्ट अटैक से बचाव संभव है?
उत्तरः नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय को मजबूत बनाती है। ब्लड फ्लो बेहतर रखती है। इसलिए व्यायाम और ध्यान करना चाहिए।
प्रश्न 4. क्या जिम में स्टेरॉइड लेने से खतरा बढ़ता है?
उत्तरः हां, एनाबॉलिक स्टेरॉइड्स हार्ट मसल्स और ब्लड प्रेशर को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। इसलिए स्टेरॉइड का सेवन नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 5. क्या नोएडा में 24 घंटे कार्डियक आपात सुविधा उपलब्ध है?
उत्तरः हां, नोएडा में कई अस्पताल 24x7 कार्डियक इमरजेंसी, एंजियोप्लास्टी और हार्ट केयर सुविधा प्रदान करते हैं। जहां समय पर जांच और इलाज होता है।