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पेशाब की नली में इन्फेक्शन के प्रमुख कारण और इलाज

पेशाब की नली में इन्फेक्शन (UTI) महिलाओं और पुरुषों दोनों में एक आम लेकिन परेशान करने वाली समस्या है। शुरुआत में यह साधारण जलन या बार-बार पेशाब आता है। मगर समय पर इलाज न मिलने पर यह किडनी तक संक्रमण फैलता है। Urologist in Noida  में उपलब्ध है।  इसलिए अगर आपको बार-बार पेशाब आना, जलन होना या दर्द महसूस की  समस्या है, तो इसे नजरअंदाज न करें तुरंत यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें।

 

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पेशाब की नली में इन्फेक्शन क्या है? (What is Urinary Tract Infection - UTI)

पेशाब की नली (Urinary Tract) में संक्रमण तब होता है। जब बैक्टीरिया यूरिन मार्ग, ब्लैडर  या किडनी में प्रवेश करते हैं और वहां सूजन या जलन पैदा करते हैं। अक्सर संक्रमण ब्लैडर और यूरेथ्रा में होता है। लेकिन गंभीर स्थिति में यह किडनी तक फैलता है। जिसे पायलोनेफ्राइटिस कहते हैं।

 

पेशाब की नली में इन्फेक्शन के कारण (Causes of UTI)

 

बैक्टीरिया संक्रमण: (bacterial infection)

सबसे आम कारण ई कोलाई नामक बैक्टीरिया होता है। जो बड़ी आंत से यूरेथ्रा में पहुंचता है।

 

साफ-सफाई की कमी: (lack of cleanliness)

व्यक्तिगत हाइजीन की कमी, खासकर टॉयलेट उपयोग के बाद गलत दिशा में सफाई करना (पीछे से आगे की ओर) के कारण होता है।

 

पानी कम पीना: (Drinking less water:)

कम पानी पीने से पेशाब कम बनता है और बैक्टीरिया बाहर नहीं निकल पाते हैं।

 

यूरिन रोकना: (holding urine)

लंबे समय तक पेशाब रोककर रखने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

 

सेक्सुअल गतिविधि: (Sexual activity:)

संभोग के दौरान (during intercourse) बैक्टीरिया आसानी से मूत्र नली में प्रवेश करते हैं।

 

गर्भावस्था: (pregnancy)

हार्मोनल बदलाव औ ब्लैडर पर दबाव बढ़ने से महिलाओं में संक्रमण की संभावना बढ़ती है।

 

डायबिटीज या कमजोर इम्यून सिस्टम: (Diabetes or a weakened immune system:)

इन स्थितियों में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम होती है।

 

 

पेशाब की नली में इन्फेक्शन के लक्षण (Symptoms of UTI)

 

पेशाब करते समय तेज जलन या दर्द महसूस होना:
मूत्राशय या मूत्रनली में संक्रमण के कारण (Causes of urinary tract infection) पेशाब के दौरान जलन या चुभन होती है। कई बार यह जलन पेशाब शुरू करते या खत्म करते समय अधिक महसूस होती है। संक्रमण बढ़ने पर यह दर्द स्थायी भी होता है।


बार-बार पेशाब लगना लेकिन कम मात्रा में पेशाब आना:
रोगी को बार-बार पेशाब की तीव्र इच्छा होती है, लेकिन हर बार बहुत थोड़ी मात्रा में पेशाब निकलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संक्रमित मूत्राशय पूर्ण रूप से खाली नहीं हो पाता। यह लक्षण महिलाओं में अधिक सामान्य है। विशेषकर गर्भावस्था या रजोनिवृत्ति के समय।


धुंधला या दुर्गंधयुक्त पेशाब:
सामान्य पेशाब हल्का पीला और बिना गंध का होता है। संक्रमण होने पर मूत्र में बैक्टीरिया और मवाद (pus cells) मिल जाते हैं, जिससे रंग गाढ़ा या धुंधला होता है। कई बार इसमें तेज, अप्रिय या अमोनिया जैसी बदबू भी आती है।


निचले पेट में दर्द या भारीपन महसूस होना:
संक्रमण के कारण मूत्राशय की मांसपेशियां सूज जाती हैं, जिससे पेट के निचले हिस्से में हल्का दर्द या दबाव महसूस होता है। कभी-कभी यह दर्द लगातार बना रहता है या पेशाब रोकने पर बढ़ता है।


पेशाब में खून या गुलाबी रंग दिखना:
मूत्र में खून की थोड़ी मात्रा मिलने से इसका रंग हल्का गुलाबी या लाल होता है। यह संकेत है कि संक्रमण मूत्रनली की भीतरी परत को प्रभावित कर रहा है। ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।


बुखार और ठंड लगना:
अगर संक्रमण मूत्राशय से आगे बढ़कर किडनी तक पहुंच जाए, तो शरीर में बुखार, ठंड लगना और थकावट जैसे लक्षण दिखने लगते हैं। यह पायलोनेफ्राइटिस (किडनी इंफेक्शन) की शुरुआत का संकेत होता है। जो गंभीर स्थिति है।


कमर या पीठ के साइड में दर्द:
यह दर्द किडनी के आसपास यानी पीठ के ऊपरी हिस्से या पसलियों के नीचे महसूस होता है। संक्रमण बढ़ने पर यह दर्द तेज और लगातार बना रहता है। कभी-कभी इसके साथ मतली और उल्टी भी हो सकती है।

 

 

 


जोखिम कारक (Risk Factors)


महिलाएं:
महिलाओं में मूत्रनली की लंबाई पुरुषों की तुलना में बहुत कम होती है। जिससे बैक्टीरिया को मूत्राशय तक पहुंचने में आसानी होती है। महिला शरीर की संरचना में यूरेथ्रा का मुख गुदा के पास होता है। जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ती है। गलत दिशा में सफाई करना (पीछे से आगे की ओर) भी संक्रमण का कारण बनता है। मासिक धर्म के दौरान या यौन संबंधों के बाद संक्रमण की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।


गर्भवती महिलाएं:
गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव मूत्राशय और मूत्रनली की मांसपेशियों को ढीला कर देते हैं, जिससे मूत्र पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाता है। मूत्र रुकने के कारण बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिलता है। बढ़ते गर्भाशय का दबाव मूत्राशय पर पड़ता है, जिससे पेशाब का प्रवाह धीमा हो जाता है और संक्रमण का खतरा बढ़ता है। गर्भवती महिलाओं में संक्रमण (Infections in pregnant women) होने पर यह मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक होता है।


50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष:
इस उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland in men) का आकार बढ़ता है। जिससे मूत्र का प्रवाह बाधित होता है। मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं हो पाता, और रुका हुआ मूत्र बैक्टीरिया के पनपने का कारण बनता है। उम्र के साथ प्रतिरक्षा भी कमजोर होने लगती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है।


डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग:
शुगर के रोगियों के मूत्र में ग्लूकोज़ की मात्रा अधिक होती है, जो बैक्टीरिया के लिए पोषण का कार्य करती है। डायबिटीज से ग्रसित व्यक्तियों की प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर होती है, जिससे शरीर संक्रमण से प्रभावी रूप से लड़ नहीं पाता। ऐसे लोगों में संक्रमण बार-बार लौट आता है और ठीक होने में अधिक समय लगता है।


कैथेटर (मूत्र निकासी ट्यूब) का उपयोग करने वाले मरीज:
लंबे समय तक कैथेटर लगाने से बैक्टीरिया आसानी से मूत्र मार्ग में प्रवेश करते हैं। अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों में यह संक्रमण आम है। जिसे कैथेटर-संबंधित मूत्र पथ संक्रमण (CAUTI) कहा जाता है। इसलिए कैथेटर का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर और पूरी स्वच्छता के साथ करना चाहिए।


बार-बार संक्रमण का इतिहास रखने वाले लोग:
जिन व्यक्तियों को पहले भी कई बार यूटीआई हो चुका है, उनमें भविष्य में फिर से संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है। यह अक्सर मूत्रनली या मूत्राशय की संरचना में समस्या, अधूरी दवा का कोर्स, या बैक्टीरिया के प्रति प्रतिरोध के कारण होता है। ऐसे मरीजों को समय-समय पर यूरिन टेस्ट करवाना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना दवा नहीं छोड़नी चाहिए।

 

कब डॉक्टर से मिलें? (When to See a Doctor)

अगर नीचे दिए गए लक्षण बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें:

 

  • पेशाब में खून या दुर्गंध

  • पेशाब करते समय तेज जलन

  • बुखार, उल्टी, या पीठ में दर्द

  • बार-बार संक्रमण होना

  • गर्भावस्था में पेशाब की समस्या


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निदान की प्रक्रिया (Diagnosis)

 

यूरिन टेस्ट:
यह यूटीआई की सबसे पहली और सामान्य जांच होती है। डॉक्टर पेशाब का नमूना लेकर उसमें बैक्टीरिया, श्वेत रक्त कोशिकाएं, लाल रक्त कोशिकाएं और प्रोटीन या नाइट्रेट्स की उपस्थिति जांचते हैं। पेशाब में बैक्टीरिया या  श्वेत रक्त कोशिकाएं की उपस्थिति यह संकेत देती है कि मूत्र मार्ग में संक्रमण (urinary tract infections) मौजूद है।

यूरिन कल्चर:
यह जांच संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया की पहचान करने के लिए की जाती है। पेशाब के नमूने को एक विशेष वातावरण में रखा जाता है, जिससे बैक्टीरिया बढ़ सकें और उनकी पहचान की जा सके। इसके बाद पता लगाया जाता है कि कौन-सा एंटीबायोटिक उस बैक्टीरिया पर सबसे अधिक असरदार है।


अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन:
अगर मरीज को बार-बार संक्रमण हो रहा है, या इलाज के बाद भी जलन, दर्द और बुखार कम नहीं हो रहा तो डॉक्टर इमेजिंग टेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। अल्ट्रासाउंड से किडनी, मूत्राशय या मूत्र नली में किसी रुकावट, सूजन या पथरी की पहचान की जाती है।


सिस्टोस्कोपी:
यह एक विशेष एंडोस्कोपिक जांच है, जो मूत्राशय के अंदरूनी भाग को कैमरे की मदद से देखने के लिए की जाती है। एक पतली ट्यूबनुमा कैमरा मूत्रनली के माध्यम से ब्लैडर में डाला जाता है। डॉक्टर ब्लैडर की दीवार, सूजन, पथरी, ट्यूमर या किसी संरचनात्मक गड़बड़ी को सीधे देख सकते हैं।

 


इलाज के विकल्प (Treatment Options)

 

एंटीबायोटिक उपचार:
यह यूटीआई के इलाज का मुख्य आधार है। यूरिन कल्चर रिपोर्ट से पता चलता है कि संक्रमण किस प्रकार के बैक्टीरिया से हुआ है और कौन-सी दवा उस पर प्रभावी होगी।  Kidney & Bladder Infection Specialist में उपलब्ध है। डॉक्टर उसी के अनुसार उचित एंटीबायोटिक निर्धारित करते हैं। जैसे:

 

  • नाइट्रोफ्यूरेंटोइन – सामान्य मूत्राशय संक्रमण में उपयोगी।

  • सिप्रोफ्लॉक्सासिन– जटिल या ऊपरी मूत्र मार्ग संक्रमण में प्रयोग।

  • अमोक्सिक्लेव – हल्के से मध्यम संक्रमण में असरदार होती है।

 

पानी और तरल पदार्थों का अधिक सेवन:

शरीर से बैक्टीरिया को मूत्र के माध्यम से बाहर निकालने का सबसे आसान तरीका है। अधिक मात्रा में पानी पीना। दिन में कम से कम 8–10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है। तरल पदार्थ जैसे नारियल पानी, नींबू पानी और फलों का रस भी लाभदायक होते है। कैफीन, शराब या अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों से बचना चाहिए क्योंकि ये ब्लैडर में जलन बढ़ाते हैं।


दर्द या जलन के लिए दवाएं:
संक्रमण के दौरान पेशाब करते समय दर्द या जलन सामान्य लक्षण हैं। डॉक्टर पेन रिलीवर या यूरिन अल्कलाइन दवाएं जैसे सिट्राल्का, अल्कासोल आदि देते हैं, जो मूत्र को क्षारीय बनाकर जलन कम करते हैं। कुछ मामलों में पैरासिटामॉल या इबुप्रोफेन जैसी सामान्य दर्दनिवारक दवाएं भी दी जा सकती हैं।

 

क्रोनिक यूटीआई (बार-बार संक्रमण) का उपचार:
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार संक्रमण होता है, तो डॉक्टर लंबी अवधि की एंटीबायोटिक थेरेपी या लो-डोज प्रिवेंटिव मेडिसिन की सलाह दे सकते हैं। ब्लैडर या किडनी में किसी संरचनात्मक समस्या, पथरी या अवरोध का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड / सिस्टोस्कोपी कराई जाती है। जिन मरीजों को बार-बार संक्रमण होता है, उन्हें पेशाब रोकने की आदत से बचना चाहिए और यौन संबंधों के बाद पेशाब करना चाहिए ताकि बैक्टीरिया बाहर निकल सकें।


खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है:
कई लोग बार-बार जलन या दर्द होने पर खुद ही पुरानी एंटीबायोटिक दवाएं लेते हैं। यह बहुत खतरनाक आदत है। गलत दवा या अधूरी खुराक से बैक्टीरिया “एंटीबायोटिक प्रतिरोधी” होते हैं। जिन पर सामान्य दवाएं असर नहीं करतीं। ऐसे मामलों में संक्रमण और गंभीर हो सकता है, यहाँ तक कि किडनी को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए हमेशा डॉक्टर की सलाह और जांच रिपोर्ट के अनुसार ही इलाज करवाएं।

 

जीवनशैली और बचाव (Lifestyle & Prevention)

थोड़े से बदलाव से संक्रमण से बचाव संभव है:

 

  • दिनभर 8–10 गिलास पानी पिएं।

  • पेशाब न रोकें, जब भी लगे तुरंत करें।

  • टॉयलेट के बाद पीछे से आगे की ओर साफ न करें।

  • सेक्स से पहले और बाद में पेशाब करें।

  • ढीले और सूती कपड़े पहनें।

  • बहुत अधिक कैफीन और शराब से बचें।

नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं, खासकर बार-बार संक्रमण की स्थिति में।

 


निष्कर्ष (Conclusion)

पेशाब की नली में संक्रमण भले ही आम हो, लेकिन इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित होता है। बार-बार पेशाब आना, जलन या दर्द दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर जांच और सही इलाज से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। इलाज में देरी नुकसानदेह हो सकती है।

 

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पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

 

प्रश्न 1. क्या यूटीआई केवल महिलाओं में होता है?
उत्तर: नहीं, यह पुरुषों में भी होता है। खासकर जिनकी प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ी हो या मूत्र रुकावट की समस्या होती है।

 

प्रश्न 2. क्या यूटीआई का इलाज घर पर किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा और जांच जरूरी है। घरेलू उपाय केवल सहायक होते हैं। लेकिन खुद से इलाज नहीं करना चाहिए।

 

प्रश्न 3. क्या बार-बार यूटीआई होना सामान्य है?
उत्तर: नहीं, बार-बार संक्रमण होने पर किडनी या ब्लैडर की समस्या होती है। जांच कराना आवश्यक है। बिना जांच दवा नहीं लेनी चाहिए।

 

प्रश्न 4. क्या पानी पीने से यूटीआई में राहत मिलती है?
उत्तर: हां, पर्याप्त पानी पीने से मूत्र साफ रहता है और बैक्टीरिया बाहर निकल जाते हैं। इसलिए पर्याप्त पानी पीना चाहिए।

 

प्रश्न 5. क्या यूटीआई से बुखार और दर्द भी होता है?
उत्तर: हां, अगर संक्रमण किडनी तक फैल जाए तो बुखार, ठंड और पीठ दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। लक्षण दिखने पर तुरंत ही इलाज कराएं।