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खून की उल्टी: लक्षण, कारण, टेस्ट और उपचार

खून की उल्टी (vomit blood) एक चिकित्सीय स्थिति है। इसमें उल्टी के साथ ताजा लाल खून या कॉफी के रंग जैसा गाढ़ा खून निकलता है। यह स्थिति हल्की भी होती है। इसलिए खून की उल्टी को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुरंत डॉक्टर (विशेषकर पल्मोनोलॉजिस्ट या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) से संपर्क करना चाहिए। शहर में  Gastroenterologist in Noida उपलब्ध है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि खून की उल्टी के शुरुआती लक्षण, इसके मुख्य कारण, जरूरी टेस्ट और पल्मोनोलॉजी गाइडलाइन के अनुसार उपचार।


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खून की उल्टी क्या है? (What is Vomiting Blood?)

जब किसी व्यक्ति को उल्टी होती है। उसमें खून भी दिखाई देता है, तो इसे खून की उल्टी कहते हैं। यह सिर्फ एक सामान्य उल्टी नहीं होती बल्कि यह अक्सर शरीर में किसी गंभीर समस्या का संकेत है। इसलिए इसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। उल्टी में खून का रंग बहुत कुछ बताता है।

 

अगर खून ताजा लाल रंग का है, तो इसका मतलब है कि पेट या खाने की नली में अभी-अभी रक्तस्राव हुआ है। यह सक्रिय है, ऐसे में तुरंत चिकित्सा मदद लेना जरूरी है। कभी-कभी उल्टी में खून भूरे या काले रंग के दानेदार रूप में दिखाई देता है। जिसे कॉफी ग्राउंड जैसा कहते हैं। इसका मतलब है कि खून कुछ समय पहले निकल चुका था और पेट के एसिड (stomach acids) के संपर्क में आकर इसका रंग बदल गया है। चाहे खून ताजा हो या पुराना, खून की उल्टी हमेशा गंभीर है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

खून की उल्टी के लक्षण (Symptoms of Vomiting Blood)


उल्टी के साथ ताज़ा खून या गाढ़ा भूरा खून आना:

यह सबसे स्पष्ट संकेत है कि पेट या ऊपरी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में रक्तस्राव हो रहा है। ताजा लाल खून सक्रिय रक्तस्राव का संकेत है। जबकि गाढ़ा भूरे रंग का खून पुराने खून का संकेत है।


चक्कर या बेहोशी महसूस होना:

खून बहने के कारण शरीर में ब्लड प्रेशर (blood pressure) कम हो सकता है। इसका परिणाम चक्कर आना या अचानक बेहोशी होना होता है।

तेज कमजोरी और थकान:

रक्तस्राव से शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी होती है। जिससे व्यक्ति जल्दी थकने लगता है। कमजोरी महसूस करता है।


पसीना आना और दिल की धड़कन बढ़ना:

जब शरीर में खून कम होता है तो दिल अधिक मेहनत करता है। इसके परिणामस्वरूप तेज़ धड़कन और अचानक पसीना आना आम लक्षण हैं।


सांस लेने में तकलीफ:

अगर खून फेफड़ों से आ रहा हो या अधिक रक्तस्राव हो रहा हो, तो सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है।


पेट दर्द या जलन:

खून आने से पहले या साथ में पेट में तेज दर्द, जलन या असहजता होना आम बात है। यह अक्सर अल्सर या गैस्ट्रिक इंफेक्शन के कारण होता है।


खून की कमी:

लंबे समय तक रक्तस्राव होने पर शरीर में खून की कमी होती है। इसके लक्षणों में पीली त्वचा, लगातार कमज़ोरी, चक्कर आना, थकान और कभी-कभी सिर दर्द शामिल हैं।


खून की उल्टी के कारण (Causes of Vomiting Blood)


गैस्ट्रिक अल्सरः

पेट या ड्यूओडेनम (आंत के पहले हिस्से) में अल्सर के कारण रक्तस्राव होता है। यह अधिकतर एसिडिटी और डकार के साथ जुड़ा होता है। कभी-कभी उल्टी में ताजा या काली रंग की खून जैसी चीज दिखाई देती है।


ईसोफैजियल वैरिक्सः

लीवर की गंभीर बीमारियों (जैसे सिरोसिस) में अन्ननली की नसें फूलती हैं। यह नसें फटने पर भारी मात्रा में खून उल्टी के रूप में बाहर आता है। यह जीवन के लिए गंभीर स्थिति होती है।


गैस्ट्राइटिस / एसिडिटीः

पेट की परत में सूजन या चोट लगने से हल्का रक्तस्राव होता है। अक्सर खून की मात्रा कम होती है। यह बार-बार हल्की उल्टी के साथ जुड़ा होता है।


टीबी या फेफड़ों की बीमारीः

फेफड़ों में संक्रमण या टीबी होने पर खून आता है। इसमें खांसी के साथ खून के धब्बे भी दिखाई देते हैं।


ब्रॉन्कियल इंफेक्शन / ब्रॉन्किइक्टेसिसः

फेफड़ों की नलियों की सूजन या संक्रमण के कारण खून आता है। अक्सर खांसी के साथ खून निकलता है। कभी-कभी उल्टी के रूप में भी दिखता है।

 

गंभीर कारण (Serious Causes)


फेफड़ों का कैंसरः

फेफड़ों में ट्यूमर खून की नलियों को दबा या नुकसान पहुंचाता है। शुरुआती दौर में हल्की खांसी या खून के छोटे धब्बे दिखते हैं। जैसे-जैसे ट्यूमर बढ़ता है। खून की उल्टी अधिक मात्रा में और बार-बार होती है। अन्य लक्षणों में सांस लेने में कठिनाई, वजन कम होना और लगातार थकान शामिल होते हैं।


निमोनिया या फेफड़ों का गंभीर संक्रमणः

फेफड़ों में गहन संक्रमण या सूजन के कारण खून निकलता है। खांसी के दौरान खून की तासीर या झाग वाले खून के साथ उल्टी होती है। संक्रमण के अन्य लक्षण में बुखार, सांस फूलना, सीने में दर्द, थकान है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह स्थिति जानलेवा भी होती है।


लीवर सिरोसिस और पोर्टल हाइपरटेंशनः

लीवर की गंभीर बीमारी के कारण रक्त प्रवाह बाधित होता है। इसके चलते अन्ननली में नसें फूलकर वैरिक्स बनती हैं। यह वैरिक्स फटने पर अचानक भारी मात्रा में खून उल्टी के रूप में बाहर आता है। लक्षण में उल्टी में खून का तेज बहाव, पेट में दर्द (stomach ache), सूजन, थकान और त्वचा पर पीला रंग। यह तुरंत आपातकालीन चिकित्सा की मांग करता है।


दवाओं का साइड इफेक्टः

कुछ दवाएं जैसे एनएसएआईडी (दर्द और सूजन की दवाएं), ब्लड थिनर पेट की परत को नुकसान पहुंचाती हैं। इससे हल्का रक्तस्राव या गंभीर पेट और आंत का रक्तस्राव होता है। लक्षण में पेट दर्द, भूख में कमी, बार-बार उल्टी और खून की उपस्थिति। नियमित दवा लेने वाले मरीजों को डॉक्टर की निगरानी आवश्यक है।


चोट/आंतरिक रक्तस्रावः

पेट या पेट के अंगों में चोट या गंभीर दुर्घटना के कारण खून उल्टी के रूप में बाहर आता है। खून की मात्रा अचानक अधिक होती है। यह जीवन के लिए खतरनाक होता है। अन्य संकेत: पेट में दर्द, नीली या पीली त्वचा (skin), चक्कर, और कमजोरी। तुरंत आपातकालीन उपचार की आवश्यकता होती है।


खून की उल्टी के लिए ज़रूरी टेस्ट (Diagnostic Tests for Hematemesis)

 

ब्लड टेस्टः


सीबीसी (पूर्ण रक्त गणना):
खून की मात्रा और लाल/सफेद रक्त कोशिकाओं की जांच होती है। खून की कमी या संक्रमण का पता लगाने के लिए।


एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट):
लीवर की कार्यक्षमता की जांच होती है। लीवर सिरोसिस या पोर्टल हाइपरटेंशन से जुड़ी समस्याओं का पता चलता है।


जमावट प्रोफ़ाइल:
रक्त का थक्का बनने की क्षमता (थक्का जमाने की क्षमता) जांचने के लिए होती है। ब्लड थिनर लेने वाले मरीजों में महत्वपूर्ण है।

 

एक्स-रे और एचआरसीटी छाती (एक्स-रे और छाती की उच्च-रिजॉल्यूशन सीटी)
फेफड़ों में टीबी, निमोनिया, इंफेक्शन या ट्यूमर का पता लगाने के लिए। एचआरसीटी अधिक स्पष्ट और सूक्ष्म विवरण देता है। खांसी और खून आने वाले रोगियों में फेफड़ों की स्थिति जानने के लिए आवश्यक।


एंडोस्कोपीः
अन्ननली, पेटऔर ड्यूओडेनम में रक्तस्राव का कारण देखने के लिए होता है। अल्सर (ulcer), गैस्ट्राइटिस या ईसोफैजियल वैरिक्स की पहचान की होता है। कभी-कभी चिकित्सक थैरेप्यूटिक इंटरवेंशन (जैसे वैरिक्स को बैंड करना) भी करते हैं।


ब्रॉन्कोस्कोपीः
फेफड़ों या श्वसन मार्ग से खून आने पर होता है। खून का स्रोत, ट्यूमर (tumor), संक्रमण या नलियों में चोट का पता लगाने के लिए होता है। जरूरी होने पर सैंपल लेकर लैब टेस्ट होता है।


अल्ट्रासाउंड/ सीटी पेट (अल्ट्रासाउंड / पेट का सीटी): 
लीवर, प्लीहा, पैनक्रियास और अन्य पाचन तंत्र के अंगों की स्थिति देखने के लिए होता है। लीवर सिरोसिस, पोर्टल हाइपरटेंशन या किसी आंतरिक घाव का पता लगाने में मदद होता हैै। अल्ट्रासाउंड शुरुआती जांच के लिए और सीटी विस्तृत जानकारी के लिए होती है।


स्पुटम टेस्टः

फेफड़ों के संक्रमण, विशेषकर टीबी की पहचान के लिए होती है। खांसी के साथ खून आने वाले मरीजों में बैक्टीरिया या माइकोबैक्टीरिया की जांच होती है।


खून की उल्टी का उपचार (Treatment of Hematemesis – Pulmonology Guidelines)

 

तत्काल अस्पताल में भर्तीः

मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना चाहिए। निगरानी के लिए आईसीयू या हाई-डिपेंडेंसी यूनिट में रख सकते हैं। नियमित रूप से रक्तचाप, हृदय गति और ऑक्सीजन स्तर की जांच होती है। Best hospital for bleeding in Noida उपलब्ध है। आईवी तरल पदार्थ और ब्लड ट्रांसफ्यूजन  खून की मात्रा कम होने पर आईवी फ्लुइड्स और आवश्यकता अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन देते हैं। इसका उद्देश्य शॉक और एनीमिया से बचाव करना है।

 

ऑक्सीजन सपोर्टः

अगर मरीज को साँस लेने में दिक्कत हो। फेफड़ों या हृदय से संबंधित समस्याओं में तुरंत सपोर्ट दिया जाता है।

 

दवाइयांः

प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर, पेट के अल्सर या एसिडिटी के कारण रक्तस्राव को रोकने के लिए देते हैं।


एंटीबायोटिक्सः

अगर खून आने का कारण संक्रमण (जैसे टीबी, निमोनिया) हो। संक्रमण के प्रकार के अनुसार संवेदनशील एंटीबायोटिक दवाएं।

 

हैमोस्टेटिक ड्रग्सः

रक्तस्राव को रोकने और खून जमाने में मदद।

 

एंटी-टीबी दवा (ट्यूबरकुलोसिस रोधी दवाएं):

अगर कारण ट्यूबरकुलोसिस हो। सामान्य टीबी औषधियों का मानक पाठ्यक्रम: HRZE (आइसोनियाज़िड, रिफैम्पिसिन, पायराजिनमाइड, एथमबुटोल)।

 

विशेष उपचारः

एंडोस्कोपी के माध्यम से ऊपरी जीआई एंडोस्कोपी (Endoscopy) द्वारा रक्तस्राव वाले रक्त वाहिनियों (वेसल) को रोका जाता है। इसके लिए विभिन्न तकनीकें अपनाई जाती हैं। जैसे बैंड लिगेशन जिसमें वैरिक्स को बांधा जाता है। क्लिपिंग में ब्लीडिंग पॉइंट को क्लिप किया जाता है। इंजेक्शन थेरपी में वेसल को सिकोड़ने या रक्तस्राव रोकने के लिए दवा का इंजेक्शन दिया जाता है।


अगर खून फेफड़ों या श्वसन मार्ग से आ रहा हो तो ब्रॉन्कोस्कोपी की जाती है। यह न केवल रक्तस्राव को रोकने में मदद करती है, बल्कि खून का स्रोत पहचानने में भी उपयोगी होती है। कभी-कभी इस प्रक्रिया के दौरान सैंपल लेकर संक्रमण या ट्यूमर की पुष्टि की जाती है।


अगर रक्तस्राव नियंत्रित नहीं होता है तो सर्जरी या एंजियो एम्बोलाइजेशन का सहारा लेते हैं। इसमें सर्जिकल रिपेयर करते हैं। रक्त वाहिनी को ब्लॉक करके खून रोकने का प्रयास किया जाता है।


लीवर सिरोसिस (liver cirrhosis) वाले मरीजों में वैरिक्स ब्लीडिंग के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं। इसमें दवाइयों जैसे ऑक्ट्रेओटाइड और वैसोप्रेसिन का प्रयोग होता है और प्रोसीजर के तौर पर बैंड लिगेशन या (ट्रांसजुगुलर इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टमिक शंट) का इस्तेमाल किया जाता है।

 

 

निष्कर्ष (Conclusion)

खून की उल्टी एक गंभीर स्थिति है। यह साधारण गैस्ट्राइटिस से लेकर लीवर सिरोसिस या फेफड़ों के कैंसर (lung cancer) तक का संकेत होती है। शुरुआती लक्षणों को पहचानना और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। पल्मोनोलॉजिस्ट या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट द्वारा जांच और सही उपचार से जान बचाई जा सकती है। इसलिए अगर किसी भी प्रकार के लक्षण दिखे तो डॉक्टर की सलाह लें।

 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)


प्रश्न 1: क्या खून की उल्टी हमेशा गंभीर होती है?
उत्तर: जरूरी नहीं कभी यह एसिडिटी या अल्सर के कारण भी होती है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।


प्रश्न 2: क्या खून की उल्टी टीबी में भी होती है?
उत्तर: हां, फेफड़ों की टीबी में खून की उल्टी (हेमोप्टाइसिस) आम है।


प्रश्न 3: खून की उल्टी में सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर: तुरंत मरीज को अस्पताल ले जाएं। घर पर देरी न करें। इलाज में देरी नुकसानदेह होती है।


प्रश्न 4: खून की उल्टी के लिए कौन-सा टेस्ट सबसे जरूरी है?
उत्तर: ऊपरी जीआई एंडोस्कोपी और एचआरसीटी चेस्ट सबसे अहम टेस्ट हैं।


प्रश्न 5: क्या खून की उल्टी का इलाज दवाओं से होता है?
उत्तर: हल्की स्थिति में हां लेकिन गंभीर मामलों में एंडोस्कोपी, ब्रॉन्कोस्कोपी या सर्जरी की जरूरत पड़ती है।