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पेशाब में खून आना (Hematuria) पुरुष और महिलाओं दोनों में पाया जाने वाला एक आम लेकिन गंभीर लक्षण होता है। कई बार यह समस्या सामान्य कारणों से होती है। जैसे संक्रमण या पथरी, लेकिन कई बार यह किडनी या ब्लैडर कैंसर (bladder cancer) जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत होता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पेशाब में खून आ रहा है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तो लिवर विशेषज्ञ डॉक्टर नोएडा (Liver Specialist Doctors Noida) में तुरंत से संपर्क करना चाहिए।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे पेशाब में खून आने के कारण, इसके संभावित जोखिम, सही समय पर निदान और आधुनिक इलाज की गाइडलाइन।
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पेशाब में खून (blood in urine) आना एक चिकित्सीय समस्या है। जिसे हेमाटुरिया (Hematuria) कहते हैं। इस स्थिति में यूरिन का रंग गुलाबी, लाल या कभी-कभी भूरे रंग का दिखता है। कई बार यह खून इतनी स्पष्ट मात्रा में होता है कि पेशाब का रंग बदल जाता है। इसे ग्रोस हेमाटुरिया कहते हैं। वहीं कुछ स्थितियों में खून की मात्रा इतनी कम होती है कि यह सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देता। लेकिन प्रयोगशाला जांच में पेशाब के सैंपल (Urine samples) में आरबीसी (लाल रक्त कोशिकाएं) पाई जाती हैं। इस अवस्था को माइक्रोस्कोपिक हेमट्यूरिया (Microscopic Hematuria) कहते हैं। इसलिए पेशाब में खून दिखे तो तुरंत से परामर्श लें।
पेशाब में खून आने के कई कारण होते हैं। अगर आप भी परेशान है तो लिवर विशेषज्ञ डॉक्टर नोएडा से संपर्क करें। पेशाब में खून आने के कुछ लक्षण सामान्य हैं और कुछ गंभीर बीमारियों से जुड़े होते हैं।
यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) : बैक्टीरिया से संक्रमण के कारण ब्लैडर और यूरेथ्रा में सूजन आती है। जिससे खून निकलता है।
किडनी या ब्लैडर की पथरी: पथरी मूत्र मार्ग को चोट पहुंचाती है जिससे खून आता है।
प्रोस्टेट संबंधी रोग: प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland) बढ़ने (बीपीएच) या संक्रमण के कारण भी खून आता है।
गंभीर व्यायाम: बहुत अधिक दौड़ने या शारीरिक परिश्रम से अस्थायी रूप से हेमाटुरिया होता है।
ब्लैडर कैंसर या किडनी कैंसर (Kidney Cancer): पेशाब में खून का एक प्रमुख और गंभीर कारण होता है।
किडनी की बीमारी (Kidney disease): इसमें किडनी के फिल्टर (ग्लोमेरुली) क्षतिग्रस्त होमे से समस्या होती हैं।
इंजरी या दुर्घटना: किडनी या ब्लैडर पर चोट लगने से रक्तस्राव होता है।
दवाइयों के दुष्प्रभाव: खून पतला करने वाली दवाइयां (जैसे वॉरफरिन, एस्पिरिन) हेमाटुरिया का कारण बनती हैं।

पेशाब में खून आने की समस्या के अलग-अलग प्रकार होते हैं। यह समझना जरूरी है कि खून पेशाब के किस हिस्से में आता है, क्योंकि इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है समय रहते जांच जरूरी होती है। इसलिए लिवर विशेषज्ञ डॉक्टर नोएडा से सलाह ले। खासतौर से समस्या यूरि प्रणाली के किस हिस्से से जुड़ी होती है।
इसका मुख्य कारण अक्सर यूरेथ्रा यानी मूत्र नली से संबंधित होता है। जब यूरिन नली में चोट, संक्रमण या पथरी होती है, तो पेशाब शुरू होते समय खून आता है।
यह आमतौर पर ब्लैडर की समस्या का संकेत है। ब्लैडर की पथरी, संक्रमण या ब्लैडर कैंसर जैसी स्थितियों में पेशाब खत्म होने के समय खून निकलता है।
यह स्थिति अधिक गंभीर मानी जाती है क्योंकि इसका संबंध किडनी या ब्लैडर से जुड़ी बीमारियों से होता है। किडनी की बीमारी, ब्लैडर का ट्यूमर या गंभीर संक्रमण इसका कारण होता है।
कुछ लोगों में पेशाब में खून आने की संभावना अधिक होती है:
50 वर्ष से अधिक आयु वाले पुरुष में।
धूम्रपान करने वाले लोग लोगों में।
परिवार में किडनी या ब्लैडर कैंसर का इतिहास वाले व्यक्ति में।
लगातार यूरिनरी इंफेक्शन होने वाले व्यक्ति में
रेडिएशन थेरेपी या केमिकल के लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों में।
अधिक मात्रा में दर्द निवारक दवाओं का सेवन करने वाले लोगों में।
हेमाटुरिया यानी पेशाब में खून आने के साथ कई लक्षण दिखाई देते हैं। यह लक्षण बीमारी की गंभीरता और कारण पर निर्भर करते हैं। लक्षण दिखने पर लिवर विशेषज्ञ डॉक्टर नोएडा से मिले। अगर नीचे दिए गए संकेत लंबे समय तक बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
लगातार लाल, गुलाबी या भूरे रंग का पेशाब आना, जो हेमाटुरिया का सबसे आम लक्षण है।
कई बार खून के साथ थक्के भी पेशाब में निकलते हैं। जिससे यूरिन का बहाव रुक-रुक कर होता है।
पेशाब करते समय तेज जलन होना, ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने का अहसास और बार-बार पेशाब लगना।
निचले पेट, कमर या शरीर के साइड हिस्से में तेज या लगातार दर्द रहना, जो किडनी या पथरी की समस्या का संकेत होता है।
अचानक वजन घटना, लगातार थकान रहना और भूख कम लगना जो गंभीर संक्रमण या कैंसर जैसी बीमारी की ओर इशारा करते हैं।
पेशाब में खून आने (हेमाटुरिया) का सही कारण जानने के लिए यूरोलॉजिस्ट कई तरह की जांचें कराते हैं। लक्षण दिखने पर लिवर विशेषज्ञ डॉक्टर नोएडा से मिले। कई यह टेस्ट यह पता लगाने में मदद करते हैं कि समस्या साधारण संक्रमण की है या किसी गंभीर बीमारी की।
पेशाब के नमूने की माइक्रोस्कोपिक जांच से यह पता चलता है कि उसमें लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), संक्रमण के जीवाणु, प्रोटीन या पथरी के क्रिस्टल मौजूद हैं या नहीं।
इसमें किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), सीरम क्रिएटिनिन और अन्य जांचें की जाती हैं। जिससे किडनी की कार्यक्षमता और इंफेक्शन का पता चल सके।
पेट और मूत्र प्रणाली का अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन करके किडनी, ब्लैडर और प्रोस्टेट की संरचना, पथरी, ट्यूमर या सूजन का पता लगाते हैं।
इसमें एक पतली ट्यूब जिसमें कैमरा लगा होता है। उसे यूरेथ्रा और ब्लैडर में डालकर अंदर से जांच की जाती है। यह ब्लैडर कैंसर या अंदरूनी चोट का पता लगाते हैं।
अधिक जटिल और गंभीर मामलों में यह टेस्ट कराया जाता है। इससे किडनी, ब्लैडर, यूरेटर और कैंसर जैसी बीमारियों की सटीक पहचान की जाती है।
अगर ब्लैडर या किडनी में ट्यूमर का शक हो तो ऊतक का छोटा सा नमूना लेकर लैब में जांच की जाती है। यह जांच कैंसर की पुष्टि होती है।
इलाज हमेशा इस बात पर निर्भर करता है कि खून आने का असली कारण क्या है।
इसमें एंटीबायोटिक्स और अन्य दवाइयों से इलाज किया जाता है। ज्यादा पानी पीने और तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है ताकि बैक्टीरिया बाहर निकल सकें। बार-बार यूटीआई होने पर डॉक्टर द्वारा कारण (जैसे पथरी, रुकावट, ब्लैडर की कमजोरी) की जांच जरूरी है।
छोटी पथरी दवाओं और अधिक तरल पदार्थ से अपने आप निकल जाती है। दर्द कम करने और मूत्रमार्ग को चौड़ा करने वाली दवाइयां दी जाती हैं। लक्षण दिखने पर लिवर विशेषज्ञ डॉक्टर नोएडा से मिले। बड़ी पथरी के लिए लेजर, शॉक वेव (ईएसडब्ल्यूएल) या सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। पथरी बनने से बचाव के लिए आहार नियंत्रण और पानी की पर्याप्त मात्रा जरूरी है।
शुरुआती अवस्था में दवाइयों से पेशाब का दबाव और सूजन कम करती है। अगर दवा असर न करे या समस्या गंभीर हो, तो सर्जरी (जैसे टीयूआरपी) की जाती है। जीवनशैली सुधार (कैफीन कम करना, पर्याप्त पानी पीना) भी मददगार है।
शुरुआती अवस्था में ट्यूमर हटाने के लिए टीयूआरबीटी (मूत्राशय ट्यूमर का ट्रांसयूरेथ्रल रिसेक्शन), सर्जरी या लोकल थैरेपी की जाती है। एडवांस स्टेजमें रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी और कुछ मामलों में टार्गेटेड थेरेपी की जरूरत पड़ती है। लंबे समय तक नियमित जांच (सिस्टोस्कोपी, सीटी स्कैन, एमआरआई) की आवश्यकता होती है।
खून पतला करने वाली दवाइयां (जैसे वॉरफरिन, एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल) कभी-कभी खून आने का कारण बनती हैं। डॉक्टर दवा की खुराक कम करते हैं। अस्थायी रूप से दवा रोकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा बंद करना खतरनाक होता है।
थोड़ी-सी जीवनशैली में सुधार और समय पर जांच से किडनी और ब्लैडर को स्वस्थ रख सकते हैं। पेशाब में खून दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। जिससे गंभीर बीमारी से बचा जा सके।
धूम्रपान छोड़ेंः
ब्लैडर और किडनी कैंसर का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। सिगरेट और तंबाकू में मौजूद रसायन मूत्राशय और किडनी तक पहुंचकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। धूम्रपान छोड़ने से कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा कम होता है।
हाइड्रेटेड रहेंः
दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी (8–10 गिलास) पीना चाहिए। पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से पेशाब साफ रहता है। संक्रमण या पथरी बनने की संभावना घटती है। डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) यूरिन को गाढ़ा बनाकर किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
संतुलित आहार लेंः
हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और कम वसा वाला भोजन शामिल करें। अधिक नमक, तैलीय और प्रोसेस्ड फूड से बचें। क्योंकि यह पथरी और हाई बीपी जैसी समस्याओं को बढ़ाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर आहार (जैसे गाजर, चुकंदर, टमाटर, नींबू, सेब) किडनी और ब्लैडर को स्वस्थ रखता है।
संक्रमण से बचेंः
व्यक्तिगत साफ-सफाई रखें और गंदगी से बचें। पेशाब को लंबे समय तक रोककर न रखें। समय पर पेशाब करना जरूरी है। बार-बार संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। जिससे यूटीआई या अन्य गंभीर कारण समय रहते पकड़े जा सकें।
नियमित चेकअप करवाएं:
45–50 वर्ष की उम्र के बाद नियमित रूप से यूरिन टेस्ट और अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है। शुरुआती अवस्था में ही किसी भी समस्या का पता लगाकर उसका इलाज आसान हो जाता है। जिन लोगों को पहले से किडनी या ब्लैडर की बीमारी है, उन्हें सालाना हेल्थ चेकअप जरूर कराना चाहिए।
पेशाब में खून आना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता है। मगर इसे हल्के में भी नहीं लेना चाहिए। कई बार यह साधारण इंफेक्शन से जुड़ा होता है, जबकि कई बार यह ब्लैडर (Bladder) या किडनी कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी की ओर इशारा करता है। इसलिए विशेषज्ञ से परामर्श लेना आवश्यक है। अगर आप सही इलाज की तलाश में हैं, तो नोएडा में सर्वश्रेष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी अस्पताल में जाकर समय रहते आवश्यक जांच कराएं। शुरुआती जांच और सही उपचार से मरीज को आराम मिल सकता है।
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प्रश्न 1. क्या पेशाब में खून आना हमेशा कैंसर का संकेत होता है?
उत्तर: नहीं यह संक्रमण, पथरी या प्रोस्टेट की समस्या से भी हो सकता है। लेकिन अगर किसी भी प्रकार का लक्षण मिले तो जांच और इलाज समय पर जरूरी है।
प्रश्न 2. क्या पानी कम पीने से भी पेशाब में खून आ सकता है?
उत्तर: डिहाइड्रेशन से पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे हेमाटुरिया हो सकता है। इसे डॉक्टर की सलाह पर पानी का सेवन करना चाहिए।
प्रश्न 3. क्या महिलाओं में भी यह समस्या होती है?
उत्तर: हां महिलाओं में यूटीआई और किडनी की समस्या के कारण हेमाटुरिया होता है। इसलिए महिलाओं को समय रहते जांच करानी चाहिए।
प्रश्न 4. क्या हेमाटुरिया का इलाज घर पर संभव है?
उत्तर: नहीं, इसके लिए कारण पता करना जरूरी है। यूरोलॉजिस्ट से परामर्श के बिना इलाज नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार की दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 5. क्या पेशाब में खून आने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
उत्तर: हां, अगर लगातार खून दिख रहा है या दर्द/थक्के भी हैं तो तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है। इलाज में देरी नुकसानदेह हो सकता है।