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बर्साइटिस (Bursitis) एक आम लेकिन दर्दनाक स्थिति है। जिसमें हड्डी और टेंडन (मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाला ऊतक) के बीच स्थित छोटे-छोटे तरल भरे थैले (Bursa) में सूजन आती है। बर्सा का काम जोड़ों में घर्षण को कम करना और स्मूथ मूवमेंट सुनिश्चित करना होता है। जब इनमें सूजन होती है। तो दर्द, जकड़न और चलने-फिरने में परेशानी होती है। यह समस्या कंधे, कूल्हे, घुटने, एड़ी और कोहनी जैसे जोड़ों में अधिक होती है। अगर आपको लंबे समय तक दर्द या सूजन बनी रहती है, तो बर्साइटिस इलाज अस्पताल नोएडा (Bursitis Treatment Hospital in Noida)में उपलब्ध है। इसलिए परामर्श लेना जरूरी है।
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बर्साइटिस एक जोड़ संबंधी समस्या है। जिसमें जोड़ के पास स्थित बर्सा नामक तरल से भरी थैली में सूजन आती है। बर्सा का मुख्य कार्य जोड़ के हड्डियों, मांसपेशियों और टेंडन के बीच कुशन का काम करना और जोड़ की गति को आसान बनाना है। जब बर्सा सामान्य स्थिति में रहता है। तो यह जोड़ को झटकों और दबाव से बचाता है। जिससे चलने-फिरने और हाथ-पैर हिलाने में आसानी होती है। बार-बार जोड़ पर दबाव, अत्यधिक उपयोग, चोट या संक्रमण की स्थिति में बर्सा में सूजन होती है। इसे बर्साइटिस कहते हैं। समय पर निदान और सही देखभाल से बर्साइटिस का दर्द और असुविधा काफी हद तक कम होती है।
लगातार टाइपिंग, कीबोर्ड पर काम करना, खेल-कूद, लंबे समय तक दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना या भारी सामान उठाना जैसी गतिविधियों में जोड़ों पर दबाव पड़ता है। इससे बर्सा में सूजन और जलन होने की संभावना बढ़ जाती है।
अचानक गिरने, जोर का झटका लगने, चोट लगने या किसी दुर्घटना के कारण बर्सा में क्षति होती है। इससे तुरंत दर्द, सूजन और गर्मी महसूस होती है।
बैक्टीरिया या अन्य रोगाणु बर्सा में प्रवेश करते हैं। जिससे संक्रमण होता है। संक्रमित बर्सा में गंभीर सूजन, लालिमा, तेज दर्द और कभी-कभी बुखार भी होता है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस (Arthritis) जैसी जोड़ों की पुरानी बीमारियां भी बर्सा को प्रभावित करती हैं। इससे जोड़ में दर्द और गतिशीलता में कमी आती है।
यूरिक एसिड क्रिस्टल का जमा होना बर्सा में सूजन का कारण बनता है। आमतौर पर यह घुटने और पैरों के जोड़ को प्रभावित करता है।
अधिक वजन होने या लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठने या खड़े रहने से जोड़ पर दबाव बढ़ता है। इससे बर्सा में सूजन और दर्द होने की संभावना होती है
बर्साइटिस होने पर जोड़ में लगातार या कभी-कभी अचानक तेज दर्द महसूस होता है। जोड़ अकड़ जाता है। जिससे सामान्य गतिविधियाँ जैसे उठना, बैठना या हाथ-पैर हिलाना मुश्किल होता है।
प्रभावित हिस्से को छूने या हल्का दबाव डालने पर भी दर्द महसूस होता है। यह कोमलता सूजन और जलन के कारण होती है।
प्रभावित क्षेत्र में सूजन और लालिमा होती है। कभी-कभी सूजन इतनी बढ़ती है कि जोड़ का आकार असमान या बड़ा दिखाई देता है।
सूजन के कारण प्रभावित जोड़ या आसपास की त्वचा में गर्माहट और जलन का अनुभव होता है। यह संकेत है कि शरीर उस क्षेत्र में इन्फ्लेमेशन (सूजन) से लड़ रहा है।
बर्साइटिस से जोड़ की गति प्रभावित होती है। चलने, हाथ-पैर हिलाने या रोजमर्रा की गतिविधियां करने में कठिनाई होती है।
कभी-कभी दर्द रात के समय बढ़ता है। जिससे नींद में खलल पड़ता है। यह सामान्य दिनचर्या और मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है।
डॉक्टर प्रभावित जोड़ को धीरे-धीरे दबाकर और हिलाकर जांच करते हैं। इस दौरान दर्द, सूजन, लालिमा और जोड़ की मूवमेंट की सीमा का आकलन होता है। इससे बर्साइटिस की शुरुआती पहचान में मदद मिलती है।
एक्स-रे के माध्यम से हड्डियों में असामान्यता, फ्रैक्चर (Fracture) या जोड़ से जुड़ी अन्य समस्याओं की जांच की जाती है। हालांकि यह सीधे बर्सा की सूजन नहीं दिखाता है। लेकिन जोड़ की स्थिति और हड्डी की समस्याओं को स्पष्ट करता है।
यह इमेजिंग टेस्ट बर्सा में सूजन, तरल पदार्थ या संक्रमण का पता लगाने में मदद करते हैं। अल्ट्रासाउंड जल्दी और आसानी से उपलब्ध होता है। जबकि एमआरआई अधिक विस्तृत और सटीक जानकारी देता है।
ब्लड टेस्ट से संक्रमण, सूजन के स्तर और गाउट (Gout) जैसी बीमारियों की पहचान की जाती है। यूरिक एसिड, क्रिएटिनिन और अन्य सूचकांक जांच में शामिल होते हैं।
बर्सा से तरल निकालकर लैब में उसका परीक्षण किया जाता है। इससे संक्रमण (बैक्टीरिया) या यूरिक एसिड क्रिस्टल मौजूद हैं या नहीं, यह पता चलता है। लंबे समय तक रहने वाली सूजन खासतौर पर जरूरी होता है
प्रभावित जोड़ को आराम दें। दिन में 15-20 मिनट के लिए बर्फ की सिकाई करें। इससे दर्द और सूजन कम होती है। बर्साइटिस दर्द के लिए डॉक्टर नोएडा में उपलब्ध है। जो जोड़ की सूजन पर राहत दिलाते हैं।
पैरासिटामोल या एनएसएआईडी्स जैसे इबुप्रोफेन का उपयोग दर्द कम करने और सूजन घटाने के लिए किया जाता है। अगर सूजन अधिक हो, तो डॉक्टर विशेष सूजन कम करने वाली दवाएं सुझा सकते हैं। स्टेरॉयड इंजेक्शन से गंभीर या लंबे समय तक रहने वाले मामलों में जोड़ में दिया जाता है, जिससे लंबी अवधि तक राहत मिलती है।
स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम से जोड़ की गतिशीलता बढ़ती है। जोड़ के चारों ओर की मांसपेशियों को मजबूत करने से दर्द व सूजन कम होती है।
यदि बर्सा में संक्रमण है, तो एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है। संक्रमण गंभीर होने पर तरल पदार्थ निकालने की प्रक्रिया भी की जा सकती है।
दुर्लभ मामलों में जब बर्सा बार-बार संक्रमित या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो, तब डॉक्टर सर्जरी की सलाह देते हैं।
रोजाना हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग करें। इससे जोड़ की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। जोड़ पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता है।
बैठते और उठते समय हमेशा सही मुद्रा अपनाएं। लंबे समय तक झुकने या गलत मुद्रा में बैठने से जोड़ पर दबाव बढ़ता है और सूजन का खतरा होता है।
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना या खड़ा रहना जोड़ पर तनाव डालता है। समय-समय पर छोटे ब्रेक लें और हल्के कदम चलें।
खेल-कूद और एक्सरसाइज के दौरान नी गार्ड, एल्बो पैड, हेलमेट या अन्य सुरक्षा उपकरण पहनें। इससे जोड़ चोट से बचते हैं और बर्साइटिस की संभावना कम होती है।
अतिरिक्त वजन जोड़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से वजन नियंत्रित रखने से जोड़ सुरक्षित रहते हैं।
अगर जोड़ में दर्द, सूजन, लालिमा या गर्माहट महसूस हो तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। जिससे समस्या बढ़ने से पहले इलाज हो सके।
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बर्साइटिस एक आम लेकिन दर्दनाक समस्या है। जिसे समय रहते पहचानकर और सही इलाज लेकर नियंत्रित किया जा सकता है। हल्के मामलों में आराम, दवाएं और फिजियोथेरेपी (physiotherapy) से राहत मिलती है। लेकिन अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे या बार-बार सूजन हो तो इसे नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें। इलाज में देरी लापरवाही होती है। इसलिए लक्षण दिखने पर ही इलाज शुरू कर देना चाहिए।
प्रश्न 1: क्या बर्साइटिस हमेशा चोट से होता है ?
उत्तर: नहीं, यह संक्रमण, दोहराव वाली गतिविधियों या गाउट जैसी बीमारियों से भी होता है। इसलिए लक्षण दिखने पर ही इलाज शुरू कर देना चाहिए।
प्रश्न 2: क्या बर्साइटिस खुद ठीक हो है ?
उत्तर: हल्के मामलों में आराम और बर्फ की सिकाई से आराम मिलता है, लेकिन लगातार दर्द में डॉक्टर से परामर्श जरूरी है। इलाज में देरी नुकसानदेह होती है
प्रश्न 3: क्या बर्साइटिस का इलाज बिना सर्जरी के संभव है ?
उत्तर: हां, ज्यादातर मामलों में दवाएं, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में सुधार से ठीक होता है। मगर ज्यादा लंबे समय तक इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 4: बर्साइटिस किन जोड़ों में ज्यादा होता है ?
उत्तर: बर्साइटिस आमतौर पर उन जोड़ों में अधिक होता है जहां बार-बार घर्षण या दबाव पड़ता है। मगर यह कंधे, घुटने, कूल्हे, एड़ी और कोहनी में ज्यादा होता है।
प्रश्न 5: क्या मोटापा बर्साइटिस का खतरा बढ़ाता है ?
उत्तर: हां, अतिरिक्त वजन जोड़ पर दबाव डालता है। जिससे बर्सा में सूजन की संभावना बढ़ती है। इसलिए वजन उठाते समय सावधानी बरते।