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गर्भाशय ग्रीवा कैंसर (Cervical Cancer) महिलाओं में होने वाला गंभीर कैंसर है। यह मुख्य रूप से एचपीवी (मानव पेपिलोमावायरस) संक्रमण की वजह से होता है। भारत में यह महिलाओं में कैंसर से मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण मामूली होते हैं। इसलिए समय पर जांच और एचपीवी वैक्सीन बहुत जरूरी है। नोएडा में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर विशेषज्ञ (Best Oncologist in Noida) उपलब्ध है। अगर शुरूआती चरण में इस कैंसर का पता चल जाए तो इलाज संभव होता है।
अच्छी बात यह है कि अगर समय पर पता चल जाए तो इसका इलाज संभव है।
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गर्भाशय ग्रीवा गर्भाशय का निचला हिस्सा होता है। जो सीधे योनि से जुड़ा रहता है। यह महिला प्रजनन प्रणाली का बेहद महत्वपूर्ण अंग है। जब इस हिस्से की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ती हैं और नियंत्रण से बाहर होती हैं, तो यह स्थिति धीरे-धीरे कैंसर का रूप लेती है। जिसे गर्भाशय ग्रीवा कैंसर कहते हैं। यह कैंसर महिलाओं में पाए जाने वाले सबसे सामान्य कैंसरों में से एक है और खासतौर पर विकासशील देशों में इसकी संख्या अधिक देखी जाती है। कैंसर का सबसे बड़ा कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण है। यह वायरस यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। तथा अधिक समय तक शरीर में रहने पर कोशिकाओं में बदलाव लाकर कैंसर को जन्म देता है। शुरुआत में इस बीमारी के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते। इसलिए अधिकतर मामलों में महिलाएं देर से इसकी पहचान कर पाती हैं। समय पर जांच और रोकथाम से इस कैंसर से बचाव पूरी तरह संभव है।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का सबसे बड़ा कारण एचपीवी वायरस है। यह वायरस यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। खासतौर पर हाई-रिस्क टाइप्स (एचपीवी-16 और एचपीवी-18) लंबे समय तक गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं को प्रभावित कर कैंसर की आशंका को बढ़ाता है।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन से शरीर की कोशिकाओं की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसमें मौजूद हानिकारक रसायन गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
असुरक्षित यौन संबंध न सिर्फ एचपीवी बल्कि अन्य यौन संचारित संक्रमणों (एसटीआई) का खतरा बढ़ाते हैं। कई पार्टनर्स के साथ असुरक्षित संबंध बनाने से एचपीवी संक्रमण की संभावना अधिक होती है।
जिन महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर होती है। जैसे एचआईवी संक्रमित मरीज या जिनका इलाज इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं से हो रहा है। उनमें कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।
अगर महिला लंबे समय तक (पांच वर्ष या उससे अधिक) लगातार ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का सेवन करती हैं तो उनके गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का खतरा बढ़ता है। हालांकि डॉक्टर की सलाह से इनका सेवन सुरक्षित है।
संतुलित आहार की कमी, विशेषकर विटामिन ए, सी और फोलेट जैसे पोषक तत्वों की कमी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करती है। यह स्थिति गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं को संक्रमण और कैंसर के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामलों में मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) होता है। यह वायरस सीधे कोशिकाओं के डीएनए को प्रभावित कर उन्हें असामान्य रूप से बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।
एचपीवी मुख्यतः यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। इससे संक्रमित व्यक्ति सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अन्य व्यक्तियों में वायरस का संक्रमण फैलाता है। यह पुरुष और महिला दोनों में मौजूद होता है। हालांकि महिलाओं में यह गर्भाशय ग्रीवा कोशिकाओं को विशेष रूप से प्रभावित करता है।
सभी एचपीवी संक्रमण कैंसर का कारण नहीं बनते है। अधिकांश संक्रमण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता के कारण अपने आप समाप्त होते हैं। लेकिन यदि संक्रमण लंबे समय तक बना रहे खासकर (एचपीवी-16 और एचपीवी-18) स्ट्रेन की वजह से तो यह कोशिकाओं में गंभीर बदलाव लाता है। कैंसर का जोखिम बढ़ाता है।
यह दोनों हाई-रिस्क स्ट्रेन हैं जो सीधे गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि और प्री-कैंसरल बदलाव करते हैं। शोधों में पाया गया है कि गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के अधिकांश गंभीर मामलों में यही स्ट्रेन मौजूद होते हैं।
आज उपलब्ध HPV वैक्सीन गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है। यह टीका विशेष रूप से किशोरियों और युवतियों को प्राथमिक रूप से दिया जाता है, लेकिन अब कुछ देशों में इसे 45 साल तक की महिलाओं को भी दिया जाता है। वैक्सीन से न सिर्फ (एचपीवी-16 और एचपीवी-18) स्ट्रेन से बचाव होता है, बल्कि अन्य हाई-रिस्क स्ट्रेन से भी सुरक्षा मिलती है।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के शुरूआती लक्षण आम है। जो निम्न है
योनि से असामान्य रक्तस्राव यह गर्भाशय कैंसर का सबसे आम लक्षण है।
रजोनिवृत्ति से पहले मासिक धर्म के बीच में रक्तस्राव या स्पॉटिंग।
रजोनिवृत्ति के बाद किसी भी तरह का रक्तस्राव या स्पॉटिंग असामान्य है।
पेट के निचले हिस्से में दर्द या ऐंठन होती है। पेट के ठीक नीचे दर्द होना भी एक लक्षण हो सकता है।
असामान्य योनि स्राव होना। यानी पानी जैसा या बदबूदार योनि स्राव होता है।
संभोग के दौरान दर्द होता है। यानी सेक्स करते समय दर्द का अनुभव होता है.
जब कैंसर बढ़कर आसपास की मांसपेशियों, नसों या रीढ़ की हड्डी तक फैलता है, तो महिलाओं को कमर और पैरों में लगातार या तीव्र दर्द महसूस होता है। यह दर्द शुरुआत में हल्का होता है, लेकिन समय के साथ बढ़तता है।
एडवांस स्टेज में शरीर को कैंसर से लड़ने में अधिक ऊर्जा लगती है। इस वजह से थकान, कमजोरी और अचानक वजन घटता है। अक्सर महिलाएं बिना किसी स्पष्ट कारण के भूख में कमी और कमजोरी महसूस करती हैं।
कैंसर जब मूत्राशय या आंत के पास तक फैलता है, तो पेशाब या मल त्याग में कठिनाई, जलन या दर्द होता है। कभी-कभी यूरिन या मल में रक्त भी दिखाई देता है।
एडवांस स्टेज में कैंसर रक्त और लिम्फेटिक सिस्टम को प्रभावित करता है। इससे पैरों, टखनों या शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन देखने को मिलती है। यह सूजन धीरे-धीरे बढ़ती है। रोजमर्रा की गतिविधियों में परेशानी पैदा करती है।
कम उम्र में यौन गतिविधि शुरू होना और जल्दी गर्भधारण करने से गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाएं अधिक संवेदनशील होती हैं। इससे एचपीवी जैसे वायरस के संक्रमण और भविष्य में कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
लगातार गर्भधारण और जन्म देने वाली महिलाओं में गर्भाशय की कोशिकाओं पर अधिक दबाव पड़ता है। यह कोशिकाओं को कमजोर करता है। असामान्य बदलाव होने की संभावना बढ़ाता है।
बिना सुरक्षा उपाय के यौन संबंध से एचपीवी सहित अन्य यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) का खतरा बढ़ता है। कई पार्टनर्स होने पर संक्रमण की संभावना अधिक होती है। जिससे कैंसर का जोखिम बढता है।
स्मोकिंग से शरीर में हानिकारक रसायन प्रवेश करते हैं, जो गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे कैंसर के खतरे में वृद्धि होती है। खासकर यदि महिला में एचपीवी संक्रमण मौजूद हो।
एचआईवी/एड्स जैसी बीमारियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण शरीर एचपीवी या अन्य संक्रमणों से लड़ने में सक्षम नहीं होता है। कैंसर का खतरा बढ़ता है।
एचपीवी वैक्सीन गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। इसे 9–14 वर्ष की लड़कियों को प्राथमिक रूप से लगाते हैं। क्योंकि इस उम्र में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता सबसे मजबूत होती है।यौन सक्रियता से पहले सुरक्षा मिलती है। 26 साल तक की महिलाओं को भी वैक्सीन दी जा सकती है। जिससे एचपीवी के हाई-रिस्क स्ट्रेन से बचाव संभव होता है।
गर्भाशय ग्रीवा की असामान्य कोशिकाओं का पता लगाने के लिए नियमित पैप स्मियर टेस्ट बहुत जरूरी है। 21 साल की उम्र से हर 3 साल में यह टेस्ट करवाना चाहिए। समय पर जांच से कैंसर का प्रारंभिक चरण पकड़ सकते हैं। प्रभावी इलाज संभव होता है।
एचपीवी और अन्य यौन संचारित संक्रमणों से बचने के लिए कंडोम का उपयोग करना अत्यंत जरूरी है। सुरक्षित यौन व्यवहार न केवल गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन से गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इनसे बचाव करके आप कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम करती हैं।
संतुलित आहार, जिसमें पर्याप्त विटामिन और मिनरल हों, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। हेल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद से इम्यून सिस्टम मजबूत रहता है। एचपीवी जैसे संक्रमणों से लड़ने में मदद मिलती है।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के शुरुआती चरण में पहचानने के लिए 21–65 वर्ष की महिलाओं को नियमित जांच कराना बहुत जरूरी है। इसके लिए पैप स्मीयर टेस्ट औरएचपीवी डीएनए टेस्ट सबसे प्रभावी हैं। समय परस्क्रीनिंग से प्री-कैंसरल बदलाव पकड़े आते हैं। गंभीर स्थिति बनने से पहले इलाज संभव होता है।
एचपीवी वैक्सीन जितनी जल्दी दी जाए। उतना अधिक प्रभावी होती है। यह न केवल हाई-रिस्क एचपीवी स्ट्रेन (HPV 16 और 18) से बचाती है। बल्कि अन्य प्रकार के स्ट्रेन से भी सुरक्षा प्रदान करती है। किशोरावस्था या यौन सक्रियता से पहले वैक्सीन लगवाना सबसे बेहतर है।
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं। अनियमित रक्तस्राव, संभोग के बाद खून आना या असामान्य डिस्चार्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जल्दी पहचान से इलाज का स्तर सरल और सफल हो सकता है।
एडवांस स्टेज के मरीजों के लिए इलाज में स्त्री रोग विशेषज्ञ, ऑन्कोलॉजिस्ट और विकिरण विशेषज्ञ की संयुक्त टीम बेहद महत्वपूर्ण होती है। ग्रेटर नोएडा में सर्वश्रेष्ठ गर्भाशय कैंसर अस्पताल उपलब्ध है। यह सुनिश्चित करता है कि सर्जरी, कीमोथेरपी और रेडिएशन थेरेपी का सही संतुलन बना रहे। रोगी को सबसे बेहतर परिणाम मिले।
नियमित जांच और वैक्सीन के अलावा सुरक्षित यौन व्यवहार, धूम्रपान और शराब से दूरी, हेल्दी डाइट और इम्यूनिटी मजबूत रखना गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है। जीवनशैली में बदलाव लंबी अवधि में सुरक्षा प्रदान करते हैं।
दिल्ली-एनसीआर में कई सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और कैंसर सेंटर हैं जहाँ अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध है।
फेलिक्स हॉस्पिटल ग्रेटर नोएडा
एम्स दिल्ली
राजीव गांधी कैंसर संस्थान, दिल्ली
मेदांता हॉस्पिटल गुरुग्राम
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट गुरुग्राम
गर्भाशय ग्रीवा कैंसर आज की महिलाओं में तेजी से बढ़ रही एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन रहा है। यह कैंसर मुख्यतः एचपीवी संक्रमण के कारण होता है, जो यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। हर एचपीवी संक्रमण कैंसर में बदलता नहीं है। लेकिन लंबे समय तक शरीर में रहने वाले हाई-रिस्क स्ट्रेन जैसे एचपीवी 16 और एचपीवी 18 विशेष रूप से खतरनाक माने जाते हैं। शुरुआती चरण में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लक्षण अक्सर हल्के और अस्पष्ट होते हैं। कई महिलाएं इन संकेतों को नजरअंदाज करती हैं। जिससे बीमारी एडवांस स्टेज तक पहुंचती है। एडवांस स्टेज में लक्षण और गंभीर होते हैं। सभी उपाय अपनाकर और नियमित स्क्रीनिंग करवाकर गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।
प्रश्न 1: गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं ?
उत्तरः अनियमित पीरियड्स, संभोग के बाद खून आना और दुर्गंधयुक्त सफेद पानी आता है। ऐसे लक्षण दिखने पर सावधान हो जाए।
प्रश्न 2: एचपीवी और गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का क्या संबंध है ?
उत्तरः लगभग 90% मामलों में एचपीवी संक्रमण ही कारण होता है, खासकर एचपीवी 16 और 18। इसलिए समय रहते जांच कराएं।
प्रश्न 3: गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का इलाज कैसे होता है ?
उत्तरः शुरुआती स्टेज पर सर्जरी और एडवांस स्टेज पर रेडियोथेरेपी व कीमोथेरेपी दी जाती है। इलाज हमेसा डॉक्टर की सलाह पर ही करवाना चाहिए।
प्रश्न 4: क्या एचपीवी वैक्सीन लेना जरूरी है ?
उत्तरः हां, यह गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव का सबसे असरदार तरीका है। डॉक्टर की सलाह पर समय-समय वैक्सीन लगवानी चाहिए
प्रश्न 5: दिल्ली एनसीआर में बेस्ट हॉस्पिटल कौन सा है ?
उत्तरः फेलिक्स, मेदांता, मैक्स, फोर्टिस और एम्स जैसे बड़े हॉस्पिटल्स बेहतरीन इलाज उपलब्ध कराते हैं। यहां अच्छे डॉक्टर मरीजों का इलाज करते हैं