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यौन संचारित रोग यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) पुरुष और महिला दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इनमें से गोनोरिया सबसे सामान्य लेकिन गंभीर संक्रमण है। यह नेइसेरिया गोनोरहोई (Neisseria gonorrhoeae) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। गोनोरिया के इलाज के लिए ग्रेटर नोएडा में सर्वश्रेष्ठ यूरोलॉजी अस्पताल उपलब्ध है। समय पर इलाज न मिलने पर यह न केवल मूत्र और प्रजनन तंत्र बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है और पुरुषों में बांझपन और महिलाओं में पीआईडी (पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज) जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे – गोनोरिया क्या है, इसके मुख्य कारण, लक्षण, जोखिम कारक, बचाव और यूरोलॉजी गाइडलाइन के अनुसार इसका इलाज।
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गोनोरिया एक यौन संचारित बैक्टीरियल संक्रमण (एसटीआई) है जो नेइसेरिया गोनोरहोई (Neisseria gonorrhoeae) नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह संक्रमण मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंधों से फैलता है। पुरुषों व महिलाओं दोनों को प्रभावित करता है। पुरुषों में यह प्रायः यूरिनमार्ग को प्रभावित करता है। जिससे पेशाब के दौरान जलन, दर्द और गाढ़ा पीला या हरा डिस्चार्ज होता है। महिलाओं में यह गर्भाशय ग्रीवा फैलोपियन ट्यूब्स (cervix fallopian tubes) और गर्भाशय तक पहुंचकर संक्रमण और सूजन का कारण बनता है। समय रहते इलाज न मिलने पर यह पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी), एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic Pregnancy) और बांझपन जैसी गंभीर समस्याएं पैदा करता है।
गोनोरिया (Gonorrhea) केवल जननांग तक सीमित नहीं है, यह गला, मलद्वार और आंख में भी संक्रमण फैलाता है। गले में खराश, मलद्वार से डिस्चार्ज या आंखों में सूजन और लालिमा इसके लक्षण होते हैं। नवजात शिशुओं में यह संक्रमण जन्म के समय मां से बच्चे तक पहुंचता है। उनकी आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

बिना कंडोम के यौन संबंध बनाना गोनोरिया (Gonorrhea) का कारण है। यह संक्रमण यौन तरल पदार्थ या योनि द्रव के संपर्क से फैलता है। एक बार संक्रमित पार्टनर (Infected partner) के साथ बिना सुरक्षा के संबंध बनाने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
जिन लोगों के यौन साथी बार-बार बदलते हैं। एक से अधिक पार्टनर होते हैं। उनमें गोनोरिया होने की संभावना ज्यादा होती है। कई बार किसी को संक्रमण का पता भी नहीं होता। अनजाने में यह दूसरों तक फैलता है।
अगर कोई संक्रमित पार्टनर के साथ ओरल सेक्स करता है तो बैक्टीरिया गले तक पहुंचता हैं। इसका परिणाम गले में खराश, सूजन और निगलने में दर्द के रूप में सामने आता है। इसे ग्रसनी सूजाक (Pharyngeal gonorrhea) कहते है।
गोनोरिया मलद्वार को प्रभावित करता है। इससे वहां खुजली, दर्द, डिस्चार्ज और कभी-कभी रक्तस्राव भी होता है।
गोनोरिया केवल यौन संबंधों से ही नहीं बल्कि गर्भवती महिला से नवजात शिशु तक भी फैलता है। डिलीवरी के दौरान बैक्टीरिया शिशु की आंखों में पहुंचते हैं। नवजात शिशु में आंख का संक्रमण पैदा करते हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह स्थायी आंखों की क्षति और अंधेपन तक का कारण बनता है।

पेशाब करते समय जलन या दर्द।
गाढ़ा सफेद/पीला/हरा डिस्चार्ज।
अंडकोष में सूजन और दर्द।
बार-बार पेशाब की इच्छा।
असामान्य योनि स्राव।
पेशाब के दौरान दर्द।
पेल्विक एरिया में दर्द।
पीरियड्स के बीच रक्तस्राव।
यौन संबंध के दौरान दर्द।
गले में खराश, सूजन।
मलद्वार में खुजली, दर्द, डिस्चार्ज।
बिना कंडोम के यौन संबंध बनाने से गोनोरिया और अन्य यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) का खतरा होता है। संक्रमण ग्रसित पार्टनर के जननांग तरल पदार्थ (सीमन या योनि द्रव) के सीधे संपर्क से यह बैक्टीरिया फैलता है।
एक से अधिक या बार-बार बदलते यौन साथी रखने वाले लोगों में संक्रमण बढ़ता है। अक्सर पार्टनर को यह पता नहीं होता कि वह संक्रमित हैं। इसी वजह से गोनोरिया बिना लक्षण दिखे फैलता है।
जिन लोगों को पहले से क्लैमाइडिया, एचआईवी (HIV) या अन्य यौन संक्रमण हैं। उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। गोनोरिया का खतरा बढ़ता है। एक साथ कई यौन संक्रमण होने से जटिला बढ़ती हैं।
बहुत कम उम्र में यौन गतिविधि शुरू करने पर प्रजनन अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते है। जिससे संक्रमण फैलता है। इस कारण किशोर और युवा महिलाओं में गोनोरिया व एसटीआई (STIs) का अधिक रहता है।
कई बार लोग लक्षण दिखने पर इलाज शुरू करते हैं। मगर पूरा कोर्स नहीं करते है। अधूरा इलाज संक्रमण को जड़ से खत्म नहीं करता। बैक्टीरिया अधिक खतरनाक रूप लेता है। इससे गोनोरिया की संभावना बढ़ती है। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (antibiotic resistance) विकसित होता है।
सुरक्षित यौन संबंध बनाएं:
हर बार यौन संबंध बनाते समय कंडोम का प्रयोग करें। यह न केवल गोनोरिया बल्कि अन्य यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) से सुरक्षा प्रदान करता है।
एकल यौन साथी रखें:
पार्टनर बार-बार बदलने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है। एकल और वफादार संबंध गोनोरिया से बचाव का सुरक्षित तरीका है।
नियमित एसटीडी टेस्ट कराएंः
अगर आप यौन सक्रिय हैं, तो समय-समय पर एसटीडी टेस्ट कराना जरूरी है। इससे संक्रमण का पता शुरुआती अवस्था में चलता है। जिससे इलाज आसान होता है।
स्वच्छता का पालन करेंः
यौन अंगों की साफ-सफाई का ध्यान रखें। अस्वच्छता बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है।
संक्रमण होने पर तुरंत इलाज कराएंः
अगर असामान्य स्राव, पेशाब में जलन, दर्द या अन्य लक्षण दिखें तो तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। जल्दी इलाज कराने से जटिलता और बांझपन से बच सकते हैं।
यूरोलॉजी और डब्ल्यूएचओ गाइडलाइन के अनुसार गोनोरिया का इलाज एंटीबायोटिक थेरेपी से किया जाता है।
गोनोरिया के इलाज के लिए डॉक्टर सबसे पहले सेफ्ट्रिएक्सोन (Ceftriaxone) और एजिथ्रोमाइसिन (azithromycin) देते हैं। इन दोनों दवाओं को साथ में देना आवश्यक है। अकेले दवा लेने पर बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होता है। कॉम्बिनेशन थेरेपी संक्रमण (Combination Therapy Infections) को पूरी तरह खत्म करने में अधिक प्रभावी होती है।
गोनोरिया के मरीजों में अक्सर क्लैमाइडिया संक्रमण पाया जाता है। अगर केवल गोनोरिया का इलाज किया जाए। क्लैमाइडिया (Chlamydia) का नहीं तो संक्रमण फिर से होता है। ग्रेटर नोएडा में गोनोरिया के डॉक्टर उपलब्ध है। जहां डॉक्टर दोनों संक्रमणों की जांच कराते हैं। जरूरत पड़ने पर साथ-साथ इलाज करते हैं।
केवल मरीज का इलाज काफी नहीं है। अगर यौन साथी का इलाज नहीं किया गया तो दोबारा संक्रमण की संभावना रहती है। इसीलिए गोनोरिया का इलाज दोनों पार्टनर्स को एक साथ करवाना चाहिए। चाहे दूसरे पार्टनर में लक्षण हों या नहीं हों।
अगर महिला में पीआईडी (पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज) या पुरुष में एपिडीडिमाइटिस हो हो तो मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है। यहां उसे इंजेक्शन के जरिए उच्च मात्रा में एंटीबायोटिक दी जाती हैं। जिससे गंभीर जटिलता से बचा जा सके।
संक्रमण अंडकोष की नली तक पहुंचकर एपिडिडिमाइटिस करता है। जिससे अंडकोष में दर्द और सूजन होती है। लंबे समय तक इलाज नहीं कराने पर यह स्थिति पुरुष बांझपन का कारण बनती है।
महिलाओं में संक्रमण गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब तक पहुंचकर पीआईडी (पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज) पैदा करता है।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का खतरा बढ़ता है। जिसमें गर्भ भ्रूण गर्भाशय के बाहर, अक्सर ट्यूब में, विकसित होता है।
लंबे समय तक संक्रमण रहने पर महिलाओं में बांझपन होता है।
प्रसव के दौरान संक्रमित मां से बच्चा संक्रमित होता है। इससे शिशु की आंखों में गंभीर संक्रमण होता है। यह इलाज न मिलने पर स्थायी अंधापन का कारण बनता है।
अगर बैक्टीरिया रक्त में फैल जाए तो पूरे शरीर पर असर डालता है। इसमें जोड़ों में दर्द होता है। त्वचा पर लाल या दर्दनाक दाने होते है। गंभीर अवस्था में सेप्सिस जैसी होता है।
पेशाब करते समय जलन और तेज दर्द।
गाढ़ा डिस्चार्ज आना।
पेल्विक या अंडकोष में सूजन और दर्द।
गले या मलद्वार में असामान्य लक्षण।
बार-बार संक्रमण या बुखार।
ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
गोनोरिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह इलाज योग्य यौन संचारित संक्रमण है। समय पर पहचान और सही एंटीबायोटिक इलाज से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। सुरक्षित यौन संबंध, जागरूकता और नियमित चेकअप ही बचाव के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं। इलाज में देर करने पर यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में बांझपन (Infertility), पीआईडी (PID), एक्टोपिक प्रेग्नेंसी और नवजात शिशु (Newborn Baby) में आंखों के संक्रमण व अंधेपन जैसी गंभीर जटिलताओं का कारण बनता है।
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प्रश्न 1: गोनोरिया का सबसे बड़ा कारण क्या है?
उत्तर: असुरक्षित यौन संबंध और एक से अधिक पार्टनर रखने से होता है। जब कोई व्यक्ति संक्रमित पार्टनर के साथ बिना कंडोम के यौन संबंध बनाता है चाहे वह वजाइनल, ओरल या एनल सेक्स हो।
प्रश्न 2: क्या गोनोरिया से बांझपन हो सकता है?
उत्तर: हां, यदि समय पर इलाज न हो तो यह पुरुष और महिला दोनों में बांझपन का कारण बन सकता है। गोनोरिया से एपिडिडिमाइटिस (शुक्राणु ले जाने वाली नली में सूजन) होती है।
प्रश्न 3: क्या गोनोरिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?
उत्तर: हां, सही एंटीबायोटिक थेरेपी से यह पूरी तरह ठीक हो सकता है। अगर दवा पूरी खुराक में और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ली जाए तो यह संक्रमण पूरी तरह खत्म होता है।
प्रश्न 4: क्या गोनोरिया दोबारा हो सकता है?
उत्तर: हां, यदि दोबारा असुरक्षित यौन संबंध बनाए जाएं तो यह फिर से होता है। एक बार गोनोरिया होने और ठीक होने के बाद भी शरीर में इसका प्रतिरक्षा विकसित नहीं होती है।