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गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (GI Bleeding) एक गंभीर मेडिकल स्थिति है। जिसमें पाचन तंत्र अन्ननली, पेट, छोटी आंत, बड़ी आंत या रेक्टम किसी भी हिस्से से खून निकलता है। यह हल्का भी होता है। अचानक भारी रक्तस्राव के रूप में भी होता है। इसलिए समय पर पहचान, सही निदान और उचित उपचार बहुत जरूरी है। नोएडा में बेस्ट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर है। जो जीआई ब्लीडिंग की जांच और उपचार करते हैं।
जब पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से से खून निकलकर उल्टी, मल या शरीर के अन्य लक्षणों के रूप में बाहर आता है, तो इसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग (Gastrointestinal bleeding) कहते है। यह दो प्रकार का होता है। ऊपरी जीआई रक्तस्राव और निचले जीआई रक्तस्राव। ऊपरी या निचले हिस्से में ब्लीडिंग कहाँ से हो रही है, यह सही निदान और उपचार के लिए बहुत जरूरी है।
यह अन्ननली, पेट और ड्युओडेनम (Duodenum) से होने वाली ब्लीडिंग है। लक्षणों में खून की उल्टी (ताजा या कॉफी-कलर) और काला, चिपचिपा मल शामिल हैं। यह गंभीर स्थिति है और तुरंत चिकित्सीय जांच व उपचार जरूरी है।
यह छोटी और बड़ी आंत, कोलन (Colon), रेक्टम या एनल कैनाल से होने वाली ब्लीडिंग है। लक्षणों में मल के साथ ताजा लाल खून, पेट में ऐंठन और अत्यधिक कमजोरी शामिल हैं। यह भी गंभीर स्थिति है और तुरंत चिकित्सीय जांच आवश्यक है।
उल्टी में खून आना
मल का काला या लाल होना
चक्कर आना, बेहोशी
तेज़ कमजोरी और थकान
पेट दर्द या जलन
तेज दिल धड़कना
पसीना आना
सांस लेने में तकलीफ
खून की कमी के लक्षण
गैस्ट्रिक या ड्यूओडेनल अल्सर
ईसोफैजियल वैरिक्स (लीवर सिरोसिस में)
गैस्ट्राइटिस या एसिडिटी (Acidity)
ईसोफैजाइटिस (अन्ननली की सूजन)
हीलिकोबैक्टर पाइलोरी इंफेक्शन
लंबे समय तक दर्द निवारक दवा का उपयोग
ट्यूमर या कैंसर
डायवर्टीकुलर बीमारी
कोलाइटिस / इंफ्लेमेट्री बाउल डिजीज
पाइल्स/एनल फिशर
कोलन कैंसर या पॉलीप्स
इस्केमिक कोलाइटिस
संक्रमण
लीवर सिरोसिस (liver cirrhosis) और पोर्टल हाइपरटेंशन
आंतों में ट्यूमर
बड़े अल्सर
अत्यधिक दर्द निवारक दवा या ब्लड थिनर का सेवन
आंतरिक चोट या ट्रॉमा
इसमें सीबीसी (CBC) से खून की कमी और संक्रमण का पता चलता है। एलएफटी (LFT) और केफटी (KFT) से लीवर और किडनी की स्थिति की जानकारी मिलती है। जमावट प्रोफ़ाइल से खून जमने की क्षमता जांची जाती है।
यह अल्सर, वैरिक्स, गैस्ट्राइटिस और ब्लीडिंग पॉइंट का पता लगाता है। आवश्यक होने पर तुरंत उपचार भी कर सकता है। जैसे बैंडिंग, क्लिपिंग या इंजेक्शन।
यह कोलन, रेक्टम (Rectum) और लोअर जीआई में ब्लीडिंग के स्रोत की पहचान करती है और पॉलीप हटाना या ब्लीडिंग रोकना भी संभव बनाती है।
यह आंतों में एक्टिव ब्लीडिंग का पता लगाती है और ट्यूमर, सूजन या इस्केमिक क्षेत्र की पहचान भी करती है।
यह लीवर सिरोसिस, पोर्टल हाइपरटेंशन और पैंक्रियाटिक (Pancreatic) समस्याओं की पहचान करता है।
इंफेक्शन, ब्लड ट्रेस, आईबीडी आदि की जांच के लिए होता है।
जीआई ब्लीडिंग गंभीर स्थिति है और इसका उपचार चरणबद्ध तरीके से किया जाता है।
मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती किया जाता है। जहां रक्तचाप, नाड़ी और ऑक्सीजन स्तर की निरंतर निगरानी की जाती है। डिहाइड्रेशन और शॉक से बचाव के लिए आईवी फ्लूड दिया जाता है और आवश्यकता अनुसार ब्लड ट्रांसफ्यूजन से खून की कमी को पूरा किया जाता है।
प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (पीपीआई) अल्सर और पेट की एसिडिटी को कम करने के लिए दिए जाते हैं। ऑक्ट्रेओटाइड विशेष रूप से वैरिक्स ब्लीडिंग में इस्तेमाल होता है, एंटीबायोटिक्स संक्रमण से बचाव या उपचार के लिए दी जाती हैं, और हैमोस्टेटिक ड्रग्स रक्तस्राव रोकने के काम आती हैं।
बैंड लिगेशन वैरिक्स ब्लीडिंग के लिए किया जाता है। क्लिपिंग ब्लीडिंग पॉइंट पर क्लिप लगाकर खून रोकती है। इंजेक्शन थेरपी में विशेष दवाइयों का इंजेक्शन देकर रक्तस्राव रोका जाता है, और कोएग्युलेशन थेरपी इलेक्ट्रिकल या लेजर तकनीक से ब्लीडिंग को बंद करती है।
कोलोनोस्कोपी द्वारा पॉलीप हटाकर ब्लीडिंग के स्रोत का इलाज किया जाता है, ब्लीडिंग स्पॉट का कैटराइजेशन कर उसे जलाकर रोका जाता है, और एंटी-कोलाइटिस या आईबीडी थेरेपी (IBD therapy) से सूजन और रोग को नियंत्रित किया जाता है।
यह तब उपयोग किया जाता है जब एंडोस्कोपी से ब्लीडिंग कंट्रोल न हो, प्रक्रिया में ब्लीडिंग वाली रक्त वाहिनी को ब्लॉक कर रक्तस्राव रोका जाता है, और यह न्यूनतम इनवेसिव तकनीक जीवनरक्षक साबित होती है।
यह बड़े अल्सर, ट्यूमर, फटी नसों या नियंत्रण न होने वाली ब्लीडिंग में की जाती है, जब अन्य विकल्प विफल हों तो यह जीवनरक्षक उपाय साबित होती है और अक्सर एंडोस्कोपी और एम्बोलाइजेशन के बाद इसकी आवश्यकता पड़ती है। नोएडा में जीआई ब्लीडिंग स्पेशलिस्ट (GI bleeding specialist in Noida) उपलब्ध है।
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गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग एक गंभीर स्थिति है जो पाचन तंत्र के किसी भी हिस्से से हो सकती है। इसके कारण अल्सर से लेकर कैंसर और लीवर सिरोसिस तक हो सकते हैं। समय पर जांच, एंडोस्कोपी और उचित उपचार से जान बचाई जा सकती है। यदि उल्टी या मल में खून दिखे, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। नोएडा में सर्वश्रेष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी अस्पताल में अनुभवी विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक जांच और प्रभावी इलाज उपलब्ध है।
प्रश्न 1: क्या जीआई ब्लीडिंग हमेशा गंभीर होती है?
उत्तर: हल्की ब्लीडिंग भी अंदर गंभीर समस्या का संकेत होती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर जांच हमेशा जरूरी है।
प्रश्न 2: ऊपरी जीआई और निचले जीआई रक्तस्राव में क्या फर्क है?
उत्तर: ऊपरी जीआई अन्ननली, पेट, ड्यूओडेनम से। निचली जीआई बड़ी आंत, कोलन, रेक्टम से होती है।
प्रश्न 3: जीआई ब्लीडिंग का सबसे जरूरी टेस्ट कौन सा है?
उत्तर: ऊपरी जीआई में एंडोस्कोपी, निचली जीआई में कोलोनोस्कोपी सबसे जरूरी हैं।
प्रश्न 4: क्या जीआई ब्लीडिंग का इलाज दवाओं से हो सकता है?
उत्तर: हल्के मामलों में हां, लेकिन गंभीर ब्लीडिंग में एंडोस्कोपी/एंजियो/सर्जरी की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर की सलाह पर इसे कराना चाहिए।
प्रश्न 5: क्या यह स्थिति जानलेवा हो सकती है?
उत्तर: हां, भारी रक्तस्राव में तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है। बिना इलाज के किसी प्रकार की दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए।