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गैस्ट्राइटिस एक सामान्य लेकिन कई बार गंभीर पेट संबंधी समस्या है। इसमें पेट की अंदरूनी परत में सूजन होती है। यह समस्या अचानक भी होती है और लंबे समय तक चलने वाली भी होती है। अगर समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह अल्सर, ब्लीडिंग और पाचन तंत्र की अन्य जटिलताओं में बदलता है। नोएडा में अनुभवी Gastroenterologist in Noida उपलब्ध हैं, जो गैस्ट्राइटिस की एंडोस्कोपी जांच और आधुनिक उपचार प्रदान करते हैं।
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गैस्ट्राइटिस वह स्थिति है। जिसमें पेट की अंदरूनी परत में सूजन, जलन या चोट होती है। यह कई कारणों से होता है। अधिक एसिडिटी, दवाओं का दुष्प्रभाव, संक्रमण, गलत खान-पान या बैक्टीरिया एच. पाइलोरी के कारण। यदि यह सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस कहते है। यह अल्सर (Ulcer) तथा पाचन संबंधी जटिलताओं का कारण बनता है।
अचानक शुरू होने वाला पेट का दर्द, जलन, उल्टी या गैस की समस्या होती है।
पेट की परत लंबे समय तक क्षतिग्रस्त रहती है। एच. पाइलोरी संक्रमण और लंबे समय से दर्दनिवारक दवाएँ इसका प्रमुख कारण हैं।
पेट के ऊपरी हिस्से में जलन
लगातार पेट दर्द (stomach pain) या भारीपन
मिचली और उल्टी
भूख कम लगना
सीने में जलन
बदहजमी, गैस और डकारें
खट्टा या कड़वा पानी मुंह में आना
कभी-कभी उल्टी में खून (यदि अल्सर विकसित हो गया हो)
यह बैक्टीरिया पेट की परत को नुकसान पहुंचाता है, क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस और अल्सर का मुख्य कारण होता है।
जैसे आइबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक, एस्पिरिन लंबे समय तक लेने पर पेट की परत क्षतिग्रस्त होती है।
तेज मसालेदार भोजन, अनियमित खान-पान से पेट में सूजन होती है।
पेट में सूजन और अल्सर का बड़ा कारण होता है।
लंबे समय तक तनाव, वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण होता है।
शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली खुद पेट की परत को नुकसान पहुंचाती है।
सीबीसीः ब्लड में संक्रमण या एनीमिया का पता लगाने के लिए होता है।
एलएफटीः लीवर (liver) संबंधी बदलाव जो पेट को प्रभावित करते हैं।
एच. पाइलोरी परीक्षणः श्वास परीक्षण / मल परीक्षण / बायोप्सी से पुष्टि होती है।
अल्ट्रासाउंड पेटः पेट के अंगों की स्थिति का आकलन करने के लिए होता है।
ऊपरी जीआई एंडोस्कोपीः गैस्ट्राइटिस, अल्सर और ब्लीडिंग का डायरेक्ट पता चलता है।
ऊपरी जीआई एंडोस्कोपी में एक पतली कैमरा ट्यूब अन्ननली और पेट में डाली जाती है। इसके जरिए डॉक्टर सीधे पेट और अन्ननली की परत की स्थिति देखते हैं। अल्सर, सूजन और कटाव की पहचान करते हैं। साथ ही एच. पाइलोरी संक्रमण (H. pylori infection) की बायोप्सी भी ली जाती है। जरूरत पड़ने पर तुरंत ब्लीडिंग कंट्रोल भी किया जा सकता है। नोएडा में आधुनिक एंडोस्कोपी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जो सुरक्षित और प्रभावी तरीके से पेट की समस्याओं का निदान और इलाज सुनिश्चित करती हैं।
गैस्ट्राइटिस पेट की परत की सूजन है, जो हल्की या गंभीर हो सकती है। इसका इलाज समय पर शुरू किया जाए तो पेट की समस्याओं को नियंत्रित और पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। गैस्ट्राइटिस के उपचार (Treatment of gastritis) में दवाओं का सेवन, संक्रमण का नियंत्रण, और जीवनशैली सुधार प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
गैस्ट्राइटिस की दवा उपचार योजना अक्सर मरीज की स्थिति, एसिडिटी और संक्रमण के आधार पर तय की जाती है। प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (पीपीआई) उदाहरण के लिए पैंटोप्राजोल, ओमेप्राजोल देते हैं। इसका काम पेट में एसिडिटी कम करना और पेट की परत को ठीक होने में मदद करना है। खाने के 30–60 मिनट पहले या डॉक्टर की सलाह अनुसार लेना चाहिए। वहीं एंटासिड का काम तुरंत राहत देना, पेट की जलन और एसिडिटी को कम करना है। जब पेट में जलन या एसिडिटी महसूस हो तो दी जाती है।
यदि गैस्ट्राइटिस का कारण एच. पाइलोरी संक्रमण हो, तो डॉक्टर 10–14 दिन की ट्रिपल या क्वाड्रपल थेरेपी देते हैं। इस थेरेपी में आमतौर पर दो एंटीबायोटिक्स और एक प्रोटॉन पंप इन्हिबिटर (PPI) शामिल होता है, जो संक्रमण को पूरी तरह खत्म करने में मदद करता है। एच. पाइलोरी का पूर्ण इलाज करने से गैस्ट्राइटिस दोबारा होने की संभावना काफी कम हो जाती है और पेट की परत ठीक होने लगती है। प्रोबायोटिक्स पाचन को सुधारने और पेट में अच्छे बैक्टीरिया को संतुलित रखने में मदद करते हैं। ये विशेष रूप से एच. पाइलोरी संक्रमण के दौरान सहायक भूमिका निभाते हैं और पेट की स्वास्थ्यपूर्ण परत को बनाए रखने में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक्स का सेवन दही, छाछ या प्रोबायोटिक सप्लीमेंट के रूप में किया जाता है।
यदि गैस्ट्राइटिस लंबे समय तक चलता है या बार-बार लौटता है, तो इसे क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस कहा जाता है। इसका इलाज अधिक व्यवस्थित और निरंतर फॉलो-अप पर निर्भर करता है। क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस के उपचार में मुख्य कदम इस प्रकार हैं:-
सबसे पहले, लंबी चलने वाली सूजन की पहचान की जाती है। मरीज में पेट में बार-बार दर्द, भारीपन, एसिडिटी या गैस की समस्या होती है। कभी-कभी बार-बार उल्टी और भूख कम लगना भी इसके लक्षण होते हैं।
एंडोस्कोपी आधारित जांच की जाती है। इसके जरिए डॉक्टर पेट और अन्ननली की परत का डायरेक्ट अवलोकन करते हैं और अल्सर, कटाव या सूजन जैसी किसी भी समस्या की पहचान करते हैं। जरूरत पड़ने पर बायोप्सी भी ली जाती है।
अगर गैस्ट्राइटिस का कारण एच. पाइलोरी संक्रमण है, तो इसका पूर्ण इलाज किया जाता है। संक्रमण के स्रोत को समाप्त करने से पुनः संक्रमण और अल्सर बनने की संभावना कम हो जाती है।
दर्द निवारक दवाओं जैसे एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन का लगातार सेवन पेट की परत को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए इन्हें बंद या कम करना और डॉक्टर की सलाह अनुसार वैकल्पिक दवा अपनाना जरूरी होता है।
शराब और धूम्रपान पूरी तरह बंद करना चाहिए, क्योंकि ये गैस्ट्राइटिस और अल्सर दोनों को बढ़ाते हैं। पेट की परत की मरम्मत और सूजन को कम करने के लिए इन्हें पूरी तरह रोकना आवश्यक है।
पाचन सुधारने वाली दवाएं भी दी जाती हैं, जो पेट की म्यूकस परत को सुरक्षा देती हैं और एसिडिटी, गैस तथा जलन को कम करने में मदद करती हैं।
अंत में नियमित फॉलो-अप बेहद जरूरी है। एंडोस्कोपी या डॉक्टर की सलाह अनुसार नियमित जांच से उपचार की प्रभावशीलता का आकलन किया जाता है। यदि लक्षण दोबारा आते हैं, तो दवा या जीवनशैली में सुधार किया जाता है, ताकि क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस पूरी तरह नियंत्रित रहे।
दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में बदलाव गैस्ट्राइटिस के उपचार में बेहद जरूरी हैं। हल्का और सुपाच्य भोजन यानी दलिया, उबली सब्जियां, कम तला-भुना खाए। भोजन समय का नियमित पालन करें। अनियमित भोजन से पेट में एसिडिटी बढ़ती है। कैफीन और मसालेदार भोजन कम करें पर्याप्त पानी पिएं। इससे पाचन और एसिडिटी नियंत्रण में मदद करता है। तनाव कम करें। योग, ध्यान, और पर्याप्त नींद गैस्ट्राइटिस को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।
हल्का, कम-मसाले वाला भोजन
खट्टा, तला-भुना बंद
धूम्रपान और शराब से परहेज
तनाव कम करना
दिन में 5–6 छोटे मील लेना
सोने से पहले भारी खाना न लें
नोएडा में सर्वश्रेष्ठ लिवर डॉक्टर (Best liver doctor in Noida) एंडोस्कोपी आधारित जांच और उन्नत उपचार उपलब्ध कराते हैं। गंभीर मामलों में डॉक्टर एंडोस्कोपी के माध्यम से पेट और अन्ननली की परत की स्थिति का गहराई से मूल्यांकन करते हैं। आवश्यकता पड़ने पर बायोप्सी लेकर सूजन या संक्रमण की पुष्टि की जाती है और तुरंत ब्लीडिंग को नियंत्रित किया जाता है। एडवांस अल्सर मैनेजमेंट के जरिए अल्सर को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जाता है। यदि समस्या का कारण H. pylori संक्रमण हो, तो उसका पूर्ण इलाज किया जाता है, जिससे गैस्ट्राइटिस और अल्सर की समस्या दोबारा नहीं होती। नोएडा में गैस्ट्रोलॉजी और लिवर से संबंधित विशेषज्ञ डॉक्टर आसानी से उपलब्ध हैं।
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गैस्ट्राइटिस एक आम स्थिति है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। पेट दर्द, जलन, मिचली, एसिडिटी जैसे लक्षण दिखते ही नोएडा का सर्वश्रेष्ठ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी अस्पताल (best gastroenterology hospital in Noida) में अनुभवी गैस्ट्रो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। एंडोस्कोपी और समय पर दी जाने वाली दवाओं से गैस्ट्राइटिस को पूरी तरह नियंत्रित और ठीक किया जा सकता है। इसलिए लक्षण नजर आते ही देरी न करें और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेकर उपचार शुरू करें।
प्रश्न. 1: क्या गैस्ट्राइटिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?
उत्तर: हां, सही दवा, एंडोस्कोपी जांच और डाइट से यह ठीक होता है। मगर डॉक्टर की सलाह पर जांच और उपचार कराना चाहिए।
प्रश्न 2: क्या गैस्ट्राइटिस में एंडोस्कोपी जरूरी है?
उत्तर: लगातार दर्द, ब्लीडिंग, उल्टी या क्रॉनिक समस्या में एंडोस्कोपी सबसे आवश्यक है। डॉक्टर जांच के आधार पर इसे करते हैं।
प्रश्न. 3: क्रॉनिक गैस्ट्राइटिस का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: एच. पाइलोरी बैक्टीरिया, दर्द निवारक दवा और अनियमित खान-पान मुख्य कारण हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह पर इलाज शुरू करना चाहिए।
प्रश्न. 4: गैस्ट्राइटिस में क्या खाना चाहिए?
उत्तर: हल्का भोजन, दलिया, खिचड़ी, नारियल पानी, केले और उबली सब्जियां। जीवनशैली में सुधार से बीमारी से निजात मिलता है।
प्रश्न. 5: क्या गैस्ट्राइटिस अल्सर में बदल सकता है?
उत्तर: हां, इलाज न मिलने पर यह गैस्ट्रिक अल्सर और ब्लीडिंग का कारण बनता है। अगर लक्षण गंभीर है तो डॉक्टर से मिलने में देरी नहीं करें।